गाजियाबाद प्रदूषित में देश का नंबर एक शहर, नियमों की उडी धज्जियां

Updated Dec 29, 2019 04:41:02 IST | Tricity Today Reporter

बढ़ते प्रदूषण से लड़ने के लिए प्रशासन की ओर से किए गए इंतजाम की अब हवा निकलती नजर आ रही है। गाजियाबाद में मंगलवार की हवा सबसे प्रदूषित रहा, अगर देश की बात करें तो सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गाजियाबाद नंबर एक पर रहा। एक्यूआई 446 रेकॉर्ड किया गया। स्मॉग की चादर दिनभर छाई रही।

गाजियाबाद प्रदूषित में देश का नंबर एक शहर, नियमों की उडी धज्जियां
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प्रतीकात्मक फोटो

GHAZIABAD: बढ़ते प्रदूषण से लड़ने के लिए प्रशासन की ओर से किए गए इंतजाम की अब हवा निकलती नजर आ रही है। गाजियाबाद में मंगलवार की हवा सबसे प्रदूषित रहा, अगर देश की बात करें तो सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में गाजियाबाद नंबर एक पर रहा। एक्यूआई 446 रेकॉर्ड किया गया। स्मॉग की चादर दिनभर छाई रही।

आलम यह था कि पूरे दिन सूरज दिखा ही नहीं। सबसे गंभीर बात ये है कि प्रदूषित हवा चलने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इसे लेकर ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। जहां पड़ोस में ही दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण पानी का छिड़काव करवाया जा रहा है। वहीं गाजियाबाद सिर्फ मौसम पर निर्भर होकर बैठ गया है। जबकि ग्रैप के नियमानुसार एक्यूआई (एयर क्वॉलिटी इंडेक्स) 300 के पार होते ही पानी का छिड़काव प्रशासन को करवाना है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। ईपीसीए चेयरमैन भूरेलाल का आदेश ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

लोनी व वसुंधरा में पीएम 2.5 मानक से 15 गुना ज्यादा
वायु प्रदूषण के प्रमुख तत्व पीएम 2.5 और पीएम 10 जिले में खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। प्रदूषण विभाग के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को वसुंधरा व लोनी में सबसे ज्यादा स्थिति खराब है। यहां पर पीएम 2.5 की मात्रा 880 से 911 तक पहुंच गई।

जिले में जिस प्रकार से पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ रही है। उससे स्वस्थ भी बीमार हो रहे हैं। साथ ही सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए तो यह खतरनाक है। पल्मलॉजिस्ट डॉ. केके पांडे ने बताया कि पीएम 2.5 के कण समान्य आंखों से नहीं दिखाए देते हैं। यह गैस के रूप में कार्य करते हैं। सांस लेने पर वह फेफड़ों में चले जाते हैं। यह सामान्य मास्क लगाने पर भी राहत नहीं देते। इससे खांसी और अस्थमा के दौरे पड़ सकते हैं।

इसके अलावा हाई ब्लडप्रेशर, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है। यह कण इंसान को इस कदर बीमार कर सकता है कि मौत भी हो सकती है। पर्यावरणविद् विक्रांत का कहना है कि 2.5 इतना खतरनाक है कि वह शरीर के अंदर जाकर जम जाता है जो बाद में ज्यादा दिक्कत देता है। डॉ. केके पांडे के अनुसार ऐसी स्थिति समान्य व्यक्ति के लिए रोजाना 17-18 सिगरेट के बराबर का धुआं शरीर में लेने जैसा है।

अब जब हवा खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है तो प्रशासन ने जीडीए और नगर निगम से करीब 100 मीटर ऊंचे स्थान तक पानी के छिड़काव वाले संयत्र खरीदने के लिए कहा है। वहीं सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।
 

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