BREAKING: राजस्थान की राजनीति में नया मोड़, बसपा ने अपने 6 विधायकों को व्हिप जारी कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट डालने का आदेश दिया

BREAKING: राजस्थान की राजनीति में नया मोड़, बसपा ने अपने 6 विधायकों को व्हिप जारी कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ वोट डालने का आदेश दिया

Google Image | अशोक गहलोत और मायावती

रविवार को राजस्थान की उठापटक के बीच एक और नया मोड़ आ गया है। इससे जहां राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार पर संकट बढ़ सकता है, वहीं दूसरी ओर अब बहुजन समाज पार्टी भी कानूनी दांवपेच में कूद पड़ी है। बहुजन समाज पार्टी ने रविवार को अपने सभी 6 विधायकों को व्हिप जारी किया है। आदेश दिया है कि अगर विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है तो उन्हें सरकार के खिलाफ अपना वोट देना है।

बहुजन समाज पार्टी के यह सभी छह विधायक पूर्व में कांग्रेस में विलय कर चुके हैं, लेकिन बहुजन समाज पार्टी का दावा है कि विलय की पूरी प्रक्रिया असंवैधानिक थी। जिसे बहुजन समाज पार्टी नहीं मानती है। रविवार को बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि पार्टी की ओर से यह व्हिप जारी किया गया है।

सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि राजस्थान विधानसभा में उनकी पार्टी के 6 विधायक हैं। जिन्हें बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने टिकट दिया था और पार्टी के सिंबल पर निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे थे। संवैधानिक व्यवस्था के तहत पार्टी को अपने विधायकों को व्हिप जारी करने का अधिकार है। इसके तहत विधायकों को निर्देशित किया गया है कि विधानसभा में अगर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आता है तो वह सरकार के खिलाफ वोट देंगे। सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि अगर बहुजन समाज पार्टी के विधायक व्हिप का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अयोग्य घोषित करने के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सतीश चंद्र मिश्रा ने प्रेस को जारी किए गए पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व में बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का कांग्रेस में विलय हो जाने की बात कही गई थी, लेकिन यह विलय संवैधानिक नहीं है और पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले पूर्व में आ चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के 3 जजों की बेंच जगजीत सिंह बनाम हरियाणा राज्य के मुकदमे में 2006 में और सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच राजेंद्र सिंह राणा के केस में वर्ष 2007 में फैसले सुना चुकी है। 

सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि इन तमाम फैसलों के प्रकाश में यह तय है कि बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय पूरी तरह असंवैधानिक है। जिसे बहुजन समाज पार्टी स्वीकार नहीं करती है। हमने अपने विधायकों को व्हिप जारी करके कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग करने का निर्देश दिया है। यह एक बार फिर स्पष्ट किया जा रहा है कि बहुजन समाज पार्टी के विधायक पार्टी का व्हिप मानने के लिए बाध्य हैं। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

सतीश चंद्र मिश्रा ने आगे कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका लंबित है, जिसमें बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के कांग्रेस में विलय को चुनौती दी गई है। राजस्थान हाईकोर्ट में कांग्रेस के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से जुड़ी एक अन्य पिटिशन भी लंबित पड़ी हुई है। इन याचिकाओं में बहुजन समाज पार्टी सुनवाई के लिए शामिल होगी।

आपको बता दें कि सचिन पायलट के समर्थक विधायकों के खिलाफ कांग्रेस ने अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया विधानसभा स्पीकर के सामने याचिका दायर करके शुरू की थी। इस याचिका पर राजस्थान विधानसभा के स्पीकर सीपी जोशी ने विधायकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। स्पीकर की ओर से जारी किए गए नोटिस के खिलाफ विधायक राजस्थान हाई कोर्ट चले गए थे। जिस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रखा है। 

दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का कांग्रेस में विलय को लेकर भी एक याचिका राजस्थान हाई कोर्ट में लंबित है। उस याचिका पर भी सोमवार को फैसला आने की उम्मीद है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी की ओर से उठाया गया यह कदम राजस्थान की राजनीति में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आपको बता दें कि सचिन पायलट के साथ करीब कांग्रेस के 20 विधायक हैं। अगर बहुजन समाज पार्टी के 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय असंवैधानिक करार दिया जाता है तो अशोक गहलोत सरकार का गिरना लगभग तय हो जाएगा।

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