जेपी के 20 हजार फ्लैट ख़रीदारों के लिए बड़ी खबर, जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की एनबीसीसी को मंजूरी मिली

जेपी के 20 हजार फ्लैट ख़रीदारों के लिए बड़ी खबर, जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की एनबीसीसी को मंजूरी मिली

Tricity Today | Jaypee Group

जेपी ग्रुप को बड़ा झटका लगा है, वहीं इस कंपनी से फ्लैट खरीदने वाले 20 हजार लोगों को बड़ी राहात मिली है। केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले नेशनल बिल्डिंग कन्स्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) को NCLT ने मंगलवार को जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। कर्ज से दबे जेपी इंफ्राटेक का अधिग्रहण करने और अगले साढ़े तीन वर्षों में लगभग 20,000 लंबित फ्लैटों को पूरा करने की मंजूरी दी गई है।

मंगलवार को इस मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की प्रधान पीठ ने यह फैसला सुनाया है। पीठ में कार्यवाहक अध्यक्ष बीएसवी प्रकाश कुमार की अध्यक्षता में एनबीसीसी के संकल्प योजना को आगे बढ़ाने का आदेश दे दिया गया है।

अब जेपी ग्रुप की अटकी परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में एनबीसीसी की मदद सरकार करेगी। ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के साथ जेपी इंफ्राटेक की मूल कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) द्वारा जमा किए गए 750 करोड़ रुपये एनबीसीसी को दिए जाएंगे। यह धनराशि संकल्प योजना का हिस्सा है। इससे प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद मिलेगी।

बेंच ने अपने मौखिक आदेश में कहा कि 750 करोड़ रुपये को योजना का हिस्सा माना जाएगा। लिखित आदेश बुधवार को उपलब्ध होगा। जेपी इंफ्राटेक पर एनबीसीसी के हक में आए इस आदेश से न केवल हजारों संकटग्रस्त होमबायर्स को एक बहुत ही आवश्यक राहत मिलेगी, बल्कि भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र, विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर के सुस्त आवास बाजार को पुनर्जीवित करने में मदद होगी।

जेपी इन्फ्राटेक कम्पनी अगस्त 2017 में दिवालिया प्रक्रिया में चली गई थी। पिछले साल दिसंबर में 13 बैंकों और लगभग 21,000 होमबॉयर्स लेनदारों (सीओसी) की एक समिति ने एनबीसीसी की संकल्प योजना को 97.36 प्रतिशत वोट के पक्ष में मंजूरी दी थी। जेपी इंफ्राटेक के लिए खरीदार खोजने के लिए एनबीसीसी के प्रस्ताव को तीसरे दौर की बोली प्रक्रिया में ऋणदाताओं ने मंजूरी दी थी।

अपनी बोली में NBCC ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश) में जेपी इंफ्राटेक द्वारा शुरू की गई आवास परियोजनाओं में 20,000 से अधिक लंबित फ्लैटों को पूरा करने का प्रस्ताव दिया था। होमबॉयर्स का दावा 13,364 करोड़ रुपये और ऋणदाताओं का 9,783 करोड़ रुपये का किया गया था। एनबीसीसी ने 1,526 एकड़ भूमि ऋणदाताओं को सौदे के तहत कर्ज के बदले देने की पेशकश की।

यमुना एक्सप्रेस वे को एनबीसीसी ने ऋणदाताओं को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन इससे पहले वह टोल राजस्व के सापेक्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये का ऋण लेगी। NCLT ने IDBI बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम की ओर से एक आवेदन स्वीकार करने के बाद जेपी इन्फ्राटेक को अगस्त 2017 में दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया था।

अनुज जैन को इन्सॉल्वेंसी प्रोसेस का संचालन करने के लिए IRP के रूप में नियुक्त किया गया था और कंपनी के मामलों का प्रबंधन भी उनके हाथों में था। पिछले साल हुई इन्सॉल्वेंसी कार्यवाही के पहले दौर में लक्षद्वीप के सुरक्षा समूह की 7,350 करोड़ रुपये की बोली को ऋणदाताओं ने खारिज कर दिया था।

सीओसी ने मई-जून 2019 में आयोजित दूसरे दौर में सुरक्षा रियल्टी और एनबीसीसी की बोलियों को खारिज कर दिया। मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) और फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। 6 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक की 90 दिनों के भीतर इन्सॉल्वेंसी प्रक्रिया को पूरा करने और संशोधित संकल्प योजना को केवल एनबीसीसी और सुरक्षा रियल्टी से आमंत्रित करने का निर्देश दिया।

7 दिसंबर 2019 को सीओसी ने दिवालिया रियल्टी फर्म का अधिग्रहण करने के लिए NBCC और सुरक्षा रियल्टी की बोलियों को एक साथ वोट देने का फैसला किया। मतदान प्रक्रिया 10 दिसंबर से शुरू हुई और 16 दिसंबर को समाप्त हुई।

कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) में 13 बैंकों और 21,000 से अधिक होमबॉयर्स के पास वोटिंग अधिकार थे। खरीदारों में 57.66 प्रतिशत मतदान अधिकार, सावधि जमा धारक 0.13 प्रतिशत और ऋणदाता 42.21 प्रतिशत थे। किसी भी फैसले को अनुमोदित होने के लिए 66 प्रतिशत मतों की आवश्यकता थी।

मतदान के परिणाम में NBCC को होमबॉयर्स का संपूर्ण 57.66 प्रतिशत और सावधि जमा धारकों का 0.13 प्रतिशत वोट मिला। सार्वजनिक क्षेत्र की फर्म को कुल 42.21 प्रतिशत मतों में से 39.57 प्रतिशत ऋणदाताओं के वोट मिले। सुरक्षा रियल्टी के प्रबंधक केवल फिक्स्ड डिपॉजिट होल्डर्स, एक्सिस बैंक और जम्मू एंड कश्मीर बैंक के रूप में 2.12 फीसदी वोट हासिल करने में सफल रहे थे। अंततः मंगलवार को होम बायर्स और निवेशकों के बहुमत वाले फैसले पर NCLT ने भी अपनी मुहर लगा दी है।

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