बड़ी खबर: गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में राजभाषा का दर्जा मिलेगा, सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में रखा प्रस्ताव

बड़ी खबर: गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में राजभाषा का दर्जा मिलेगा, सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में रखा प्रस्ताव

बड़ी खबर: गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में राजभाषा का दर्जा मिलेगा, सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में रखा प्रस्ताव

Google Image | BJP Leader Surendra Singh Nagar

बड़ी खबर: गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में राजभाषा का दर्जा मिलेगा, सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में रखा प्रस्ताव

गुर्जर समाज के बड़े नेता और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर ने बुधवार को राज्यसभा में वक्तव्य दिया है। इससे पहले पिछले सप्ताह सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में प्रस्ताव देकर गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में मान्यता देने की मांग की थी। इसी सिलसिले में बुधवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर राजभाषा विधेयक-2020 पेश किया गया है। जिस पर सुरेंद्र सिंह नागर ने पार्टी की ओर से विचार रखे हैं।

जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन करने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य में भाषाओं को मान्यता देने के लिए जम्मू-कश्मीर राजभाषा विधेयक-2020 राज्यसभा में पेश किया है। जिसमें 5 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा देने की बात कही गई है। गूजरी, पंजाबी और पहाड़ी भाषा को वहां की क्षेत्रीय भाषा के तौर पर मान्यता देने का प्रस्ताव है। पिछले सप्ताह सुरेंद्र सिंह नागर ने राज्यसभा में यह प्रस्ताव रखा था। सुरेंद्र सिंह नागर ने मांग की थी कि जम्मू-कश्मीर में गुर्जर समाज बड़ी संख्या में निवास करता है। उनकी भाषा गूजरी है। इस भाषा को जम्मू-कश्मीर में राजकीय मान्यता मिलनी चाहिए।

अब बुधवार को राजभाषा विधेयक संसद में लाया गया है। जिसमें गूजरी भाषा को मान्यता देने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुरेंद्र सिंह नागर ने विचार रखे। सुरेंद्र सिंह नागर ने कहा, "भाषा के अभाव में सशक्त और अच्छा समाज भी पिछड़ सकता है। अगर हमारे पास अपनी भाषा नहीं है तो हम आत्मसम्मान का बोध नहीं करते हैं। हमें सभी भाषाओं की कद्र करनी चाहिए, लेकिन अपनी मातृभाषा और समाज की भाषा को बनाए रखने के लिए भी सदैव प्रयासरत रहना चाहिए। मैंने इसी को आधार मानते हुए राज्यसभा में मांग की थी कि गूजरी भाषा को जम्मू-कश्मीर में मान्यता दी जाए।

सुरेंद्र सिंह नागर ने ट्राइसिटी टुडे से बातचीत में कहा, "जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद गुर्जर समाज को वहां व्यापक स्तर पर अधिकार मिले हैं। गूजरी भाषा को राजकीय भाषा का दर्जा मिलेगा। साथ ही फॉरेस्ट एक्ट के तहत लगी हुई पाबंदियां खत्म हो जाएंगी। गुर्जर समाज जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और क्षेत्र में निवास करता है। धारा 370 लागू होने के कारण उन्हें अपने ही इलाके और वन संपदा पर अधिकार हासिल नहीं थे। केंद्र सरकार ने धारा 370 समाप्त करके ऐतिहासिक कदम उठाया है। जिसका जम्मू-कश्मीर में गुर्जर समाज को व्यापक लाभ मिल रहा है।" 

आपको बता दें कि सुरेंद्र सिंह नागर गुर्जर समाज से ताल्लुक रखते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और यूपी के तराई वाले इलाके में इस जाति का अच्छा वर्चस्व है। सुरेंद्र सिंह नागर गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं।

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