दुनिया का भू-माफिया चीन, 14 देशों से मिलती हैं सीमाएं और 23 देशों से जमीन को लेकर विवाद

Updated Jun 20, 2020 18:50:03 IST | Anika Gupta

चीन को अगर दुनिया का भू-माफिया कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस बात के पक्ष में चीन के विवाद गवाही देते हैं। मसलन, चीन की सीमा 14 देशों से लगती है, लेकिन दुनिया....

दुनिया का भू-माफिया चीन, 14 देशों से मिलती हैं सीमाएं और 23 देशों से जमीन को लेकर विवाद
Photo Credit:  Tricity Today
दुनिया का भू-माफिया चीन
Key Highlights
दुनियाभर के 23 देशों की जमीन पर हक जता रहा है चीन
अभी चीन की 43% फीसदी जमीन अवैध कब्जे वाली
भारत और चीन की 3000 किलोमीटर लंबी सीमा हैं
रूस और जापान जैसी महा शक्तियों से भी विवाद में है
पुर्तगाल ने 450 साल शासन करके मकाउ चीन को सौंप दिया
हांगकांग और ताइवान पर कब्जा करने की फिराक में हे ड्रैगन

चीन को अगर दुनिया का भू-माफिया कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। इस बात के पक्ष में चीन के विवाद गवाही देते हैं। मसलन, चीन की सीमा 14 देशों से लगती है, लेकिन दुनिया के 23 मुल्कों से उसका जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। पड़ोसी देशों की बात तो छोड़िए हजार किलोमीटर दूर समंदर के बीच टापू पर भी चीन अपना हक जमाता है। इनकी गुंडागर्दी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके पास मौजूद जमीन का 43 फ़ीसदी हिस्सा दूसरे मुल्कों पर कब्जा करके हासिल किया है।

चीन ने जिस तरह अक्साई चिन को हड़पा अब उसी तरह पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी पर अपना कब्जा जमाने की नापाक कोशिश कर रहा है। वह सबकुछ चीन के लिए नया नहीं है। भारत ही नहीं दुनिया के 23 देशों की जमीन पर कब्जा करना चाहता है। चीन कई देशों को हथियाकर उन पर कब्जा किए बैठा है। चीन की सीमा 14 देशों से लगती है और 23 देशों की जमीन या समुद्री सीमाओं पर अपना मालिकाना हक जमता है। ला ट्रोबे यूनिवर्सिटी की एशिया सुरक्षा रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है।  

इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन अब तक दूसरे देशों की 41 लाख वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जे कर चुका है। यह मौजूदा चीन का 43% हिस्सा है। यानी ड्रैगन ने विस्तारवादी नीति से पिछले 6-7 दशकों में अपने साइज को लगभग दोगुना कर लिया है। उसका लालच अभी खत्म नहीं हुआ है। वे दुनिया के करीब आधा दर्जन और देशों को निकलने की तैयारी कर रहा है।

चीन आजाद हुआ और 1949 में कम्युनिस्ट शासन की स्थापना हो गई। उसके बाद चीनी सरकारों ने पड़ोसी मुल्कों की जमीन हथियाने की नीति पर काम शुरू कर दिया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग वर्ष 2013 में सत्ता में आए। उसके बाद से चीन ने भारत से लगी सीमा पर मोर्चेबंदी तेज की है। लेकिन उसे पहली बार इतनी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। चीन ने किस तरह एक-एक करके आसपास के देशों की जमीन पर कब्जा किया है यह ला ट्रॉब यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में दर्ज है।

1.ईस्ट तुर्किस्तान: 16.55 लाख वर्ग किमी का भूभाग
वर्ष 1934 में चीन ने इस पाकिस्तान पर हमला किया था। इसके बाद लगातार हमले करता रहा। अंततः 1949 तक चीन ने ईस्ट तुर्किस्तान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया। 45% आबादी वाले उइगर मुस्लिमों के इस इलाके पर चीन जुल्म ढा रहा है। अब चीन इस तुर्किस्तान को शिनजियांग प्रांत बताता है। यह चीन का सबसे बड़ा राज्य है। कहने को शिनजियांग प्रांत स्वायत्तशासी है, लेकिन वहां चीन की फौज हमेशा मुस्लिमों को कुचलने में लगी रहती है।

2. तिब्बत: 12.3 लाख वर्ग किमी का भूभाग
यह तीन का दूसरा सबसे बड़ा प्रांत है। इसे दुनिया की छत भी कहा जाता है। इस सुंदर प्राकृतिक देश पर चीन ने 7 अक्टूबर 1950 को कब्जा कर लिया था। 80% बौद्ध आबादी वाले तिब्बत पर हमला करके चीन ने अपनी सीमा का विस्तार भारत तक कर लिया। इसके अलावा उसे यहां अपार खनिज, सिंधु, ब्रह्मपुत्र और मीकांग जैसी नदियों का स्रोत मिल गया। जिसकी बदौलत आज चीन की 70 फ़ीसदी बिजली का उत्पादन यहां किया जा रहा है। तिब्बत पर कब्जा करने का मकसद ही वहां की प्राकृतिक संपदा हासिल करना था। जिसकी बदौलत चीन आत्मनिर्भर बना है। तिब्बत से दलाई लामा को उखाड़ने में चीन कामयाब रहा। दलाई लामा ने भागकर भारत की शरण ली। जिसकी वजह से भारत चीन युद्ध हुआ था।

3. इनर मंगोलिया: 11.83 लाख वर्ग किमी भूभाग
इनर मंगोलिया पर चीन ने अक्टूबर 1945 में हमला कर दिया और वहां भी कब्जा जमा लिया था। 13 फीसदी आबादी वाले मंगोलों की आजादी की मांग को बुरी तरह कुचला डाला गया। यहां दुनिया का 25 फीसदी कोयला भंडार है। यहां की आबादी 3 करोड़ है। यह चीन का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है। कहने को इसे भी चीन ने स्वायत्तशासी राज्य घोषित कर रखा है। 50 वर्षों के लिए मंगोलों को अपने प्रांत पर शासन करने का अधिकार है, लेकिन चीनी फौज और पुलिस वहां लगातार दमनकारी नीति अपनाए हुए हैं। चीन अपनी ईंधन की खपत का 80 फ़ीसदी कोयला इनर मंगोलिया से हासिल करता है। चीन वहां की प्राकृतिक संपदा का भरपूर दोहन कर रहा है।  

4. ताइवान: 35 हजार वर्ग किमी भूभाग
समुद्र से चारों ओर से घिरे ताइवान पर लंबे समय से चीन की नजर है। 1949 में कम्युनिस्टों की जीत के बाद राष्ट्रवादियों ने ताइवान में शरण ली थी। चीन इसे भी अपना हिस्सा मानता है। ताइवान डटकर उसके सामने खड़ा है। ताइवान को अमेरिकी समर्थन प्राप्त है। इसलिए चीन चाहकर भी उस पर हमला नहीं कर पा रहा है। ताइवान पर कब्जा करके चीन को 2 बड़े फायदे होंगे। पहला फायदा ताइवान की टेक्नोलॉजी से होगा। दरअसल ताइवान दुनिया के चुनिंदा तकनीकी मुल्कों में से एक है। चीन को दूसरा फायदा जापान समेत आसपास के तमाम इलाके पर नजर रखने और सामरिक दृष्टिकोण से मजबूती हासिल करने में मिलेगा।

5. हांगकांग
चीन ने 1997 में हांगकांग पर जबरन कब्जा कर लिया था। इन दिनों वह राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू कर हांगकांग पर शिकंजा कसने की फिराक में है। 50.5 फीसदी चीन का विदेशी निवेश और व्यापार हांगकांग के जरिये ही आता है। हांगकांग की जनता चीन की औपनिवेशिक और विस्तार वादी नीति के खिलाफ है। वहां लोग पिछले कई महीनों से सड़कों पर हैं। चीन की जमकर खिलाफत हो रही है। फिलहाल चल रहे भारत-चीन गतिरोध में भी हांगकांग के लोग भारत के साथ खड़े हुए हैं। चीन ने हांगकांग में द्विराष्ट्र शासन प्रणाली लागू कर रखी है। चीन हांगकांग को भी शिंजियांग की तरह स्वायत्त शासन देकर कब्जे में लेना चाहता है।

6. मकाउ
करीब 450 वर्ष के शासन के बाद 1999 में पुर्तगालियों ने चीन को मकाउ सौंप दिया। चीन ने दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए मकाउ द्वीप के निवासियों को 50 वर्ष तक का ऑटोनॉमस एडमिनिस्ट्रेशन दे रखा है, लेकिन मकाउ में सारे कामकाज, सुरक्षा और व्यवस्था चीनी सैनिकों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में है। वहां मामूली सा विरोध करने पर 3 लोगों को कुचल देता है।

7. भारत
चीन ने भारत के 38 हजार वर्ग किमी पर कब्जा कर रखा है। 14,380 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र अक्साई चिन का इसमें शामिल है। 5180 वर्ग किमी इलाका पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर पाकिस्तान ने चीन को दिया है। लेह लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक भारत और चीन की करीब 3000 किलोमीटर लंबी सीमाएं लगती हैं  जिन पर जगह-जगह चीन ने विवाद खड़े कर रखे हैं।

8. पूर्वी चीन सागर
ईस्ट चाइनीस सी में जापान के साथ जद्दोजहद चल रही है। करीब 81 हजार वर्ग किमी के आठ द्वीपों पर चीन की नजर है। 2013 में चीन ने यहां वायु सीमा जोन बनाया था। जिससे विवाद बढ़ गया था।

9. रूस
चीन का रूस से 52 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को लेकर सीमा विवाद चल रहा है। 1969 में चीन ने रूस पर हमले की कोशिश की थी। रूस के सीमावर्ती इलाकों पर चीन कब्जा करके अपने देश में मिलाना चाहता था। जिसका रूस ने मुंहतोड़ जवाब दिया और चीन को चुपचाप बैठना पड़ा था। अब एक बार फिर पिछले कुछ वर्षों से चीन रूसी सीमा पर विवाद खड़े कर रहा है।

10. दक्षिण चीन सागर
इस क्षेत्र में 7 देशों से जमीन हड़पने की कोशिश चीन कर रहा है। यहां ताइवान, ब्रूनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और सिंगापुर से तनाव है। चीन 35.5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले दक्षिणी चीन सागर के 90% क्षेत्र पर दावा करता है। चीन ने पारसले और स्पार्टले द्वीपों पर कब्जा जमाकर सैन्य अड्डे बना दिए हैं। यहां से चीन 33% यानी 3.37 लाख करोड़ का सालाना वैश्विक कारोबार करता है। करीब 77 अरब डॉलर का तेल और 266 लाख करोड़ क्यूबिक फीट गैस भंडार हैं।

ओबीओआर प्रोजेक्ट में फंसा चीन
चीन इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना पर काम कर रहा है। वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन लहासा से ईरान की खाड़ी तक एक सड़क बना रहा है। जो भारत की सीमा के पास से गुजरते हुए पूरे पाकिस्तान से होकर बलूचिस्तान तक जा रही है। चीन ने माना है कि यह आर्थिक गलियारा संकट में है। इससे उसकी 40 फीसदी परियोजनाओं पर बुरा प्रभाव पड़ा है। उसके 20 फीसदी प्रोजेक्ट बंद होने की कगार पर हैं। इस 3.7 लाख करोड़ की लागत वाले आर्थिक गलियारे को बनाकर चीन दुनिया के 100 देश जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रहा है।

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