पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर 43 वर्ष बाद फैसला, योगी आदित्यनाथ से पहले कोई सीएम नहीं दिखा पाया दम, जानिए क्यों

Updated Jan 13, 2020 20:15:54 IST | TriCity Today Correspondent

उत्तर प्रदेश के दो शहरों में आज से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है। लखनऊ और नोयडा में कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही नए अधिकारीयों की नियुक्ति भी हो गई हैं। लखनऊ को अब 13 आईपीएस अफसरों की टीम संभालेगी, वहीं नोएडा में 10 अधिकारियों की टीम के जिम्मे कानून-व्यवस्था रहेगी। लेकिन, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जो हिम्मत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिखाई है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। दरअसल, यूपी के शहरों में कोई आज नहीं वर्ष 1977 से कमिश्नर ऑफ पुलिस सिस्टम लागू करने पर सरकारें विचार कर रही थीं। आईएएस लॉबी के सामने सारे मुख्यमंत्री यह फैसला लेने का दम नहीं दिखा सके।

पुलिस कमिश्नर सिस्टम पर 43 वर्ष बाद फैसला, योगी आदित्यनाथ से पहले कोई सीएम नहीं दिखा पाया दम, जानिए क्यों
Photo Credit:  Tricity Today
Chief Minister Yogi Adityanath
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इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जो हिम्मत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिखाई है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। दरअसल, यूपी के शहरों में कोई आज नहीं वर्ष 1977 से कमिश्नर ऑफ पुलिस सिस्टम लागू करने पर सरकारें विचार कर रही थीं। आईएएस लॉबी के सामने सारे मुख्यमंत्री यह फैसला लेने का दम नहीं दिखा सके।
अगली सूची में सरकार तीन जिलों में यह सिस्टम लागू करेगी। जिनमें वाराणसी, कानपुर और गाजियाबाद जिले हैं। इन तीनों जिलों में यह व्यवस्था लागू करने के लिए कैबिनेट की बैठक में बातचीत हुई और लगभग तय हो चुका है कि लखनऊ और नोएडा के परिणाम देखने के बाद सरकार फैसला लेगी।
आज से ठीक छह महीने बाद नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम की समीक्षा की जाएगी। अगर प्रयोग सफल रहा तो इसके बाद यूपी के कई और शहरों में यह व्यवस्था देखने को मिलेगी। महानगरों और बड़े-बड़े जिलों में कप्तान और कलेक्टर बनने के लिए आईएएस और आईपीएस अफसर न जाने क्या-क्या करते हैं।

उत्तर प्रदेश के दो शहरों में आज से पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो गया है। लखनऊ और नोएडा में कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही नए अधिकारीयों की नियुक्ति भी हो गई हैं। लखनऊ को अब 13 आईपीएस अफसरों की टीम संभालेगी, वहीं नोएडा में 10 अधिकारियों की टीम के जिम्मे कानून-व्यवस्था रहेगी। लेकिन, इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जो हिम्मत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिखाई है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। दरअसल, यूपी के शहरों में कोई आज नहीं वर्ष 1977 से कमिश्नर ऑफ पुलिस सिस्टम लागू करने पर सरकारें विचार कर रही थीं। आईएएस लॉबी के सामने सारे मुख्यमंत्री यह फैसला लेने का दम नहीं दिखा सके।

आज से ठीक छह महीने बाद नोएडा और लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम की समीक्षा की जाएगी। अगर प्रयोग सफल रहा तो इसके बाद यूपी के कई और शहरों में यह व्यवस्था देखने को मिलेगी। महानगरों और बड़े-बड़े जिलों में कप्तान और कलेक्टर बनने के लिए आईएएस और आईपीएस अफसर न जाने क्या-क्या करते हैं। जिसकी बानगी हाल ही में आईपीएस अधिकारी वैभव कृष्ण की रिपोर्ट में देखने के लिए मिली है। अब एसएसपी बनने के मंसूबे खत्म हो गए हैं। अब ऐसे अफसरों को यूपी के सामान्य जिलों में ही एसपी और एसएसपी की हसरत से गुजारा करना होगा।

अगली सूची में सरकार तीन जिलों में यह सिस्टम लागू करेगी। जिनमें वाराणसी, कानपुर और गाजियाबाद जिले हैं। इन तीनों जिलों में यह व्यवस्था लागू करने के लिए कैबिनेट की बैठक में बातचीत हुई और लगभग तय हो चुका है कि लखनऊ और नोएडा के परिणाम देखने के बाद सरकार फैसला लेगी।

एक बार पहले यूपी में लागू हो चुका है कमिश्नर सिस्टम
तीसरे पुलिस कमीशन धरमवीर कमीशन की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम राम नरेश यादव ने यूपी में कमिश्नर सिस्टम लागू किया था। आईपीएस वासुदेव पंजानी को कानपुर का पुलिस कमिश्नर बनाया था। लेकिन उनके काम शुरू करने से पहले ही यह व्यवस्था वापस ले ले ली गई थी। इसके बाद यूपी में कभी कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं हो पाया। इसी के बाद प्रदेश की नौकरशाही ने मान लिया था कि यूपी में कोई भी सरकार अब पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं कर पाएगी। लेकिन, सीएम योगी आदित्यनाथ अफसरशाही का मिथक तोड़ दिया है।

ये हैं कमिश्नरी सिस्टम की खासियतें
1-    यह निर्णय पुलिस महकमे के लिए उम्मीद से ज्यादा देने वाला है। दरअसल, आईपीसी और सीआरपीसी में ऐसे प्रावधान हैं, जिनकी वजह से आईएएस अधिकारी आईपीएस पर हावी रहते हैं।
2-    सीएम योगी ने यूपी की आम जनता के हित में ऐतिहासिक फैसला लिया है। इससे आम आदमी को त्वरित न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेंगी। दरअसल, एडीजी स्तर के पुलिस कमिश्नर होने से निर्णय जिला स्तर पर होंगे।
3-    नोएडा एक औद्योगिक शहर है। यहां पूरी दुनिया की कंपनियां अरबों रुपये का निवेश कर रही हैं। ऐसे में नोएडा को विश्वस्तरीय कानून-व्यवस्था की जरूरत है। इस दिशा में योगी सरकार का यह बहुत बड़ा फैसला है।
4-    पिछले कई दशकों से यूपी में उठ रही थी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग। लेकिन आईएएस अधिकारियों के दबाव में करीब 40 वर्षों से कोई मुख्यमंत्री यह फैसला नहीं ले पा रहा था।
5-    धर्मवीर कमीशन (तीसरे राष्ट्रीय पुलिस आयोग) ने वर्ष 1977 में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। नौकरशाही के एक बड़े तबके और राजनीतिक आकाओं ने चार दशकों से कमिश्नर सिस्टम की फाइल दबाकर रखी थी।
6-    राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यूपी में अभी नहीं लागू हो पाया कमिश्नर सिस्टम। पूर्व में कई मुख्यमंत्री ने इस दिशा में कदम उठाने का विचार किया। लेकिन पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का साहस नहीं दिखा सके थे।
7-    सरकारें पुलिस को फ्री हैंड देने से डरती रही हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने पॉलिटिकल विल यानी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई है।
8-    इस व्यवस्था से उम्मीद है कि राजनीतिक संरक्षण में अपराधियों, माफियाओं और अपराध को बढ़ावा देने वालों के दिन लद जाएंगे।
9-    नौकरशाही का एक बड़ा तबका इस सिस्टम का विरोध भी करता रहा है। योगी आदित्यनाथ ने हर विरोध को दरकिनार किया और लागू किया। कमिश्नर सिस्टम त्वरित, पारदर्शी और जनहित में फैसले लेने वाला साबित होने की उम्मीद है।
10-    पुलिस को पर्याप्त अधिकार के साथ पूरी जवाबदेही वाली यह व्यवस्था है। अब दंगाइयों, उपद्रवियों पर बल प्रयोग करनके के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अब जो दंगा करेगा, उपद्रव करेगा, आमजन और पुलिस पर हमला करेगा, सार्वजनिक संपत्तियों को बर्बाद करेगा, उससे सीधे निपटेगी पुलिस।
11-    पुलिस में सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो गया है। अब गुडों, माफियाओं, सफेदपोशों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेटों के कार्यालयों में नहीं भटकना पड़ेगा।
12-    पुलिस को खुद गुंडों, माफियाओं और सफेदपोशों को चिन्हित करके उनके खिलाफ त्वरित कार्रवाई का पूरा अधिकार मिल गया है। अपराधियों, माफियाओं और सफेदपोशों के असलहों के लाइसेंस रद्द करने के लिए भी पुलिस के पास सीधे अधिकार होंगे।
13-    सीआरपीसी की धारा 151, 107 और 116 में पुलिस को अपराधी को गिरफ्तार करके सीधे जेल भेजने का अधिकार होगा। आमजन के हित में फैसले लेने के लिए नौकरशाही का मकड़जाल खत्म हो गया है।
14-    कमिश्नर सिस्टम से पुलिस की जवाबदेही बढ़ेगी। थाना स्तर पर आम लोगों की सुनवाई और बेहतर होगी। पुलिस की गड़बड़ी पर अंकुश लगेगा। जिले में पुलिस विभाग के पास सबसे छोटी से लेकर सबसे बड़ी पोस्ट होगी। जिससे अपील और सुनवाई तेजी से होगी।

देश के 15 राज्यों में 71 शहरों में पुलिस कमिश्नर
देश के 15 राज्यों के 71 शहरों में अभी पुलिस कमिश्नर हैं। इनमें राजधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बंगलुरू, अहमदाबाद, राजकोट, बड़ौदा, हैदराबाद, त्रिवेंद्रम जैसे शहर शामिल हैं। इन सारे शहरों में सिस्टम लागू है और बेहतर कार्य कर रहा है। एनसीआर में दिल्ली के अलावा गुड़गांव और फरीदाबाद में भी पुलिस कमिश्नर हैं।

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