गेहूं बेचने के लिए धक्के खा रहे किसान, पहले रजिस्ट्रेशन और फिर सत्यापन के नाम पर चल रही अफसरशाही

गेहूं बेचने के लिए धक्के खा रहे किसान, पहले रजिस्ट्रेशन और फिर सत्यापन के नाम पर चल रही अफसरशाही

गेहूं बेचने के लिए धक्के खा रहे किसान, पहले रजिस्ट्रेशन और फिर सत्यापन के नाम पर चल रही अफसरशाही

Tricity Today | प्रतीकात्मक फोटो

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री से लेकर तमाम बड़े अफसर कह रहे हैं कि किसानों को गेहूं खरीद में किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन गौतम बुद्ध नगर के हालात तो बहुत बुरे हैं। एक अप्रैल को गेहूं क्रय केंद्र तो शुरू कर दिए गए लेकिन अभी तक ज्यादातर क्रय केंद्र तक ठप पड़े हुए हैं। कहीं बोरे नहीं हैं तो कहीं कांटा शुरू नहीं हो सका है। ऊपर से किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फिर एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल से सत्यापन के नाम पर धक्के खाने पड़ रहे हैं। कई ऐसे किसान सामने आए हैं, जो पिछले एक हफ्ते से रजिस्ट्रेशन करवाने के बाद सत्यापन के लिए दौड़ लगा रहे हैं।

लतीफपुर बांगर गांव के निवासी किसान दिनेश कुमार ने बताया कि उन्होंने 12 तारीख को रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की थी। जिसे पूरा करने में 5 दिन लग गए। 16 अप्रैल को उन्होंने रजिस्ट्रेशन पूरा किया और प्रिंट ले लिया। यह प्रिंट सत्यापन करवाने के लिए केंद्र पर दाखिल कर दिया। अब पूरा एक सप्ताह बीत चुका है। लेकिन अब तक सत्यापन नहीं हुआ है। दूसरी ओर हम लोग अपना गेहूं ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर क्रय केंद्र पर खड़े हुए हैं। दिनेश का कहना है कि एक सप्ताह से किसान क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर धक्के खाता रहे, यह कहां का इंसाफ है।

दिनेश ने सवाल किया, जब हमारे पास जमीन के खसरा और खतौनी हैं। रजिस्ट्रेशन और सत्यापन का क्या मतलब है? मुझे लगता है सरकार किसानों को बेवकूफ बना रही है। प्रशासन लॉकडाउन और कोरोनावायरस के नाम पर घोर लापरवाही बरत रहा है। कोई सुनवाई करने के लिए तैयार नहीं है। ऊपर से मौसम खराब है। रोज बारिश हो रही है। किसान को केवल मूर्ख बनाया जा रहा है। 

दनकौर की एक अन्य किसान सुनीता ने भी यही परेशानी बताई। सुनीता ने बताया कि वह गेहूं केंद्र क्रय केंद्र पर अपना गेहूं बेचने आई थी। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के बाद 16 अप्रैल को सारे कागजात तहसील के अधिकारियों को दे दिए। सात दिन का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक सत्यापन करने के बाद रिपोर्ट क्रय केंद्र पर नहीं भेजी गई है। मैं बार-बार परेशान होकर लेखपाल और एसडीएम को फोन मिला रही हूं। एसडीएम फोन नहीं उठाते हैं और लेखपाल फोन उठाने के बाद एक ही बात कहते हैं, उनकी ड्यूटी लॉकडाउन में लगी हुई है। अब ऐसे में क्या किया जाए? मजबूर होकर बड़ी संख्या में किसान व्यापारियों को औने-पौने दाम पर गेहूं बेच रहे हैं। वह कहती हैं, पिछले एक सप्ताह में मैंने 100 से ज्यादा किसानों को दनकौर की मंडी में  1600 से 1700 रुपये प्रति कुंतल के भाव पर गेहूं बेचते हुए देखा है।

अतुल शर्मा एडवोकेट का कहना है कि उन्होंने सत्यापन को लेकर एसडीएम से बात की थी। एसडीएम ने कहा, सत्यापन के लिए कागजात लेखपाल के पास गए होंगे। लेखपाल से बात कीजिए। लेखपाल से बात करने के लिए फोन किया गया। दो बार तो उसने फोन ही नहीं उठाया। तीसरी बार फोन उठाया तो कहा कि अभी एक-दो दिन का वक्त और लगेगा। कुल मिलाकर यह चंद किसानों की कहानी नहीं है। जिले में कमोबेश यही हालात बने हुए हैं। किसान अपने गेहूं लेकर धक्के खा रहे हैं और क्रय केंद्र सूने पड़े हुए हैं। किसान के कई दिन रजिस्ट्रेशन में बीत रहे हैं। उसके बाद सत्यापन के नाम पर उन्हें इधर से उधर दौड़ना पड़ रहा है। मजबूर किसान व्यापारियों को सस्ते में क्यों बेच कर घर लौट रहे हैं।

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