नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों ने फिर हल्ला बोला, किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई

नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों ने फिर हल्ला बोला, किसानों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई

Tricity Today | नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों ने फिर हल्ला बोला

"आबादी बचाओ, आजादी बचाओ" आंदोलन के तहत नोएडा विकास  प्राधिकरण के खिलाफ शुक्रवार को एक बार फिर सैकड़ों किसान और महिलाएं धरना देने पहुंचे। किसानों और महिलाओं को नोएडा पुलिस ने विकास प्राधिकरण के गेट पर रोका। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का मुक्की हुई। किसान अपने नेता सुखबीर पहलवान को रिहा करने की मांग लेकर आए हैं। तीन दिन पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था और जेल भेज दिया था। 11 किसानों की जेल भेजने के खिलाफ पूरे जिले के किसानों में रोष व्याप्त है।

किसानों का आरोप है कि विकास प्राधिकरण उनकी आबादी को तोड़ने की साज़िश रच रहा है। प्राधिकरण अफसरों की मनमानी से आंदोलन करना पड़ रहा है। किसानों ने आजादी के नारे लगाए। किसानों का कहना है कि विकास प्राधिकरण के अफसरों की मानसिकता अंग्रेज़ी है। ये किसानों को दोयम दर्जे का मानते हैं। पिछले 10 वर्षों से किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। हर बार केवल झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं। जब किसान अपना हक मांगने आते हैं तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है।

तीन दिन पहले नोएडा में प्राधिकरण के कार्यालय पर धरना दे रहे किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई। पुलिस ने 120 किसानों को हिरासत में लिया। उसके बाद 11 किसान नेताओं की जेल भेज दिया गया। पूरे जिले के किसानों ने ऐलान किया है कि अगर शुक्रवार की शाम तक सभी 11 किसानों को रिहा नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा। अपनी मांगों को लेकर शुक्रवार को एक बार फिर सैकड़ों किसान और महिलाओं ने नोएडा विकास प्राधिकरण के कार्यालय के लिए कूच किया। किसानों के आंदोलन के मद्देनजर भारी फोर्स प्राधिकरण के बाहर तैनात किया गया है। किसानों को पुलिस ने प्राधिकरण की ओर बढ़ने से रोका। जिसके चलते पुलिस और किसानों में धक्का-मुक्की हुई। अभी किसान प्राधिकरण के बाहर जमे हुए हैं। प्राधिकरण अफसरों की बुद्धि शुद्धि के लिए हवन कर रहे हैं।

किसानों ने कहा कि, नोएडा विकास प्राधिकरण अंग्रेज सरकार की तरह काम करता है। प्राधिकरण केवल किसानों को लूटने और बर्बाद करने के लिए नई नई नीति अपनाता है। कभी किसानों के विकास और न्याय के लिए कोई नियम नहीं बनाया है। किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव में लूट कर बड़े-बड़े बिल्डरों और उद्योगों को दे दी गई है। 

किसानों के परिवारों के बारे में विकास प्राधिकरण कुछ नहीं सोचता है। किसानों को ने आरोप लगाया कि विकास प्राधिकरण में बैठे सारे अधिकारी भ्रष्ट हैं। किसानों का यह भी आरोप है कि मौजूदा सरकार का रवैया किसान विरोधी है। जैसा हाल इससे पहले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की सरकारों में था। उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। उत्तर प्रदेश में भले ही सरकारें बदल जाए लेकिन विकास प्राधिकरण में बैठे अधिकारियों का कामकाज करने का तरीका नहीं बदलता है। किसान हाथों में लेकर हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे थे। जिन पर प्राधिकरण विरोधी नारे लिखे गए थे। किसान विकास प्राधिकरण से आजादी के लिए नारे लगा रहे हैं। किसानों ने इस आंदोलन को आबादी बचाओ आजादी बचाओ का नाम दिया है। 

किसानों का कहना है कि हम जब तक पीछे नहीं हटेंगे। जब तक जेल में बंद किए गए। सभी 11 लोगों को बिना शर्त रिहा नहीं कर दिया जाता है और हमारी सभी मांगों को विकास प्राधिकरण मान नहीं लेता है।

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