नोएडा में नगर निगम बनाने की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा

Updated Feb 14, 2020 19:08:41 IST | TriCity Today Correspondent

नोएडा में नगर निगम की स्थापना या पंचायत प्रणाली को पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। समाज सेवी और पूर्व ग्राम प्रधान अजीत सिंह तोमर 'बजरंगी' व नोवरा (नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन ) ने संयुक्त रूप से याचिका उच्च न्यायालय में दायर की है। जिस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की। जिस पर अदालत ने केंद्र सरकार से जवाग मांगा है।

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नोएडा में नगर निगम बनाने के लिए समाजसेवी अजित सिंह बजरंगी और नोवरा ने संविधान की धारा 243 को चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता ने न्यायालय में कहा कि उसे स्थानीय स्वशासन चुनने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता है।

नोएडा में नगर निगम की स्थापना या पंचायत प्रणाली को पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है। समाज सेवी और पूर्व ग्राम प्रधान अजीत सिंह तोमर 'बजरंगी' व नोवरा (नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन ) ने संयुक्त रूप से याचिका उच्च न्यायालय में दायर की है। जिस पर शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई की। जिस पर अदालत ने केंद्र सरकार से जवाग मांगा है।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की तरफ से सीनियर एडवोकेट अशोक मेहता और ज्ञानू शुक्ल उपस्थित थे। वहीं, नोएडा की तरफ से कौशलेन्द्र सिंह और भारत सरकार की तरफ से मनोज कुमार सिंह ने जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ के सामने तथ्य रखे। न्यायालय में सुप्रीम कोर्ट का आदेश क प्रस्तुत किया गया। जिसमें औद्योगिक टाउनशिप कानून तहत विकास प्राधिकरण बनाया गया है। इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायतों की समाप्ति को सही ठहराया गया था। सरकार के निर्णय को संविधान की धारा 243-क्यू के तहत संविधानिक कहा था।

इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील अशोक मेहता ने सवाल उठाया कि यह याचिका औद्योगिक टाउनशिप कानून के खिलाफ नहीं है। अपितु उसको शक्ति देने वाली संविधान की धारा  243-क्यू के उस प्रावधान को चुनौती देती है, जिसमें इस प्रकार के गैर लोकतांत्रिक कृत्यों को करने का अधिकार राज्य सरकारों को मिलता है। अशोक मेहता ने आगे कहा कि लोकतंत्र एवं संविधान के मूलभूत ढांचे के अनुसार ऐसा कोई रिहायशी शहर नहीं हो सकता जहां स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था न हो। इसके अलावा औद्योगिक बस्ती की परिभाषा में नोएडा आता ही नहीं है। अत: यहां की जनता को चुनी हुई स्थानीय निकाय मिलना ही चाहिए और संविधान की इस धारा को अमान्य माना जाना चाहिए।

इस बात का संज्ञान लेते हुए खंडपीठ ने भारत सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह को अगली सुनवाई पर तलब किया है। उनसे इस बाबत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई अब 19 फरवरी को होगी। याचिकाकर्ता अजीत सिंह तोमर बजरंगी ने इस बात पर ख़ुशी जताई। कहा, जल्द से जल्द नोएडा में लोकतंत्र की स्थापना की लड़ाई में जीत होने की उम्मीद है। नोवरा के अध्यक्ष रंजन तोमर ने कहा, लोकतंत्र की लड़ाई के अंतिम पड़ाव में पहुंचने और इससे लाखों लोगों के सशक्तिकरण की उम्मीद जगी है।