गौतमबुद्ध नगर की बदौलत चीन को पछाड़ेगा भारत, जानिए क्या है योजना

Updated Sep 23, 2020 16:52:52 IST | Upasna Kashyap

Jewar Inter National Airport: गौतमबुद्ध नगर में जेवर के पास बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बदौलत भारत, चीन को एवियशन...

गौतमबुद्ध नगर की बदौलत चीन को पछाड़ेगा भारत, जानिए क्या है योजना
Photo Credit:  Tricity Today
Noida Gate

Jewar Inter National Airport: गौतमबुद्ध नगर में जेवर के पास बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की बदौलत भारत, चीन को एवियशन की दुनिया में बहुत पीछे छोड़ देगा। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे एशिया में इकलौता होगा, जहां एक साथ पांच रनवे काम करेंगे। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पांच रनवे का निर्माण करके भारत चीन की बराबरी करेगा। एशिया में चीन के शंघाई एयरपोर्ट पर अभी सबसे ज्यादा पांच रनवे हैं। इसी सप्ताह यमुना एक्सप्रेस वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.अरुण वीर सिंह ने जेवर एयरपोर्ट पर पांच रनवे बनाने की परियोजना को मंजूरी दी है। 

नामचीन रिसर्च कम्पनी प्राइस वाटर हाउस कूपर (पीडब्ल्यूसी) जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पांच रनवे का निर्माण करने के लिए जरूरी व्यवहारिकता रिपोर्ट एक सप्ताह में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी (नियाल) को सौंप देगी। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में दो रनवे का निर्माण किया जाना है। प्रदेश सरकार ने इसे एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनाने के लिए व्यावहारिकता रिपोर्ट तैयार करने का आदेश नियाल दिया था। पीडब्ल्यूसी की तैयार की गई व्यवहारिकता रिपोर्ट में कहा गया है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पांच रनवे का निर्माण किया जा सकता है। इसके तहत पहले चरण में बनाए जा रहे दो रनवे के ठीक उत्तर दिशा में एक और रनवे बनाया जाएगा। दक्षिण दिशा में दो और रनवे बनाए जा सकते हैं। इस परियोजना के लिए करीब साढ़े तीन हजार हेक्टेयर जमीन की और जरूरत होगी।

उत्तर दिशा में बनने वाले रनवे का उपयोग हवाई जहाजों के मेंटेनेंस, रिपेयर, ओवरहालिंग (एमआरओ) के लिए किया जा सकता है। यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सीडब्ल्यूसी से मिली व्यवहारिकता रिपोर्ट शासन को भेजकर जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। दरअसल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मल्टीपरपज एविएशन फैसिलिटी के तौर पर विकसित करना चाहते हैं। यहां यात्री, मालवाहक और एमआरओ से जुड़ी गतिविधियां एक ही प्लेटफार्म पर उपलब्ध करवाने की योजना है।

आपको बता दें कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में पांच हजार हेक्टेयर जमीन आरक्षित है। पहले चरण के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की जा चुकी है। मास्टर प्लान 2041 में जरूरत को देखते हुए एयरपोर्ट का क्षेत्र बढ़ाया जा सकता है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण के लिए ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी के साथ 10 अक्टूबर को करार होने की संभावना है। विकासकर्ता कंपनी के रूप में नवंबर 2019 में ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल का चयन किया गया था। कोरोना के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं बंद हो गई हैं। जिसके कारण अब तक करार में विलंब हो रहा है। दरअसल, इस एयरपोर्ट से 2022-23 से हवाई सेवा शुरू करने का लक्ष्य है।

उत्तर प्रदेश सरकार का एक लाख करोड़ रुपए की आमदनी का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार और नियाल की निगाह जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ एमआरओ से मिलने वाले राजस्व पर भी है। जेवर एयरपोर्ट को एमआरओ का हब बनाने की भी योजना है। प्राधिकरण ने मास्टर प्लान 2031 में जेवर एयरपोर्ट से सटे चार सेक्टर प्रस्तावित किए हैं। इन्हें इलेक्ट्रानिक्स, एमआरओ, ट्रांसपोर्ट हब के लिए प्रस्तावित किया गया है। एमआरओ की संभावनाओं को देखते हुए प्राधिकरण सेक्टर सात, आठ व 30 को इसके लिए आरक्षित करने पर विचार कर रहा है। दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले 20 वर्षों के दौरान राज्य को कम से कम एक लाख करोड़ रुपए की आमदनी होगी। सरकार जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश के ग्रोथ इंजन के रूप में विकसित करना चाहती है।

यमुना प्राधिकरण और नियाल के सीईओ डॉ.अरुण वीर सिंह का कहना है कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे की संख्या बढ़ाने के लिए व्यावहारिकता रिपोर्ट तैयार कराई गई है। एयरपोर्ट पर पांच रनवे बनाए जा सकते हैं। पहले चरण में दो रनवे के लिए जमीन अधिग्रहण हो चुका है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दूसरे चरण पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए और भूमि अधिग्रहण करने की आवश्यकता होगी। जिसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव जल्दी ही उत्तर प्रदेश सरकार को भेज दिया जाएगा। फिलहाल, हम लोगों का फोकस एयरपोर्ट का निर्माण करने के लिए ठेका हासिल करने वाली कंपनी से करार करना है। उम्मीद है कि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में यह एग्रीमेंट हो जाएगा। इसके तुरंत बाद कभी भी जेवर एयरपोर्ट का निर्माण करने के शिलान्यास करवाया जा सकता है।

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