मध्य प्रदेश के गृह मंत्री का विकास दुबे के सरेंडर ताल्लुक है? कांग्रेस के आरोपों में सच्चाई है?

Updated Jul 09, 2020 18:20:00 IST | Mayank Tawer

उत्तर प्रदेश में डीएसपी समेत आठ पुलिसवालों की हत्या करने के बाद छह दिन से फरार चल रहा गैंगस्टर विकास दुबे...

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री का विकास दुबे के सरेंडर ताल्लुक है? कांग्रेस के आरोपों में सच्चाई है?
Photo Credit:  Tricity Today
गैंगस्टर विकास दुबे
Key Highlights
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सीधे तौर पर गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को निशाना बना रहे हैं 
दिग्विजय सिंह ने कहा- एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा यूपी के विधानसभा चुनाव में कानपुर के प्रभारी थे 
दिग्विजय सिंह सीधे तौर पर नरोत्तम मिश्रा और विकास दुबे का कनेक्शन जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं
महाकाल मंदिर से यूपी के मोस्ट वांटेड विकास की गिरफ्तारी के तुरंत बाद नरोत्तम मिश्रा ने बयान जारी किया

उत्तर प्रदेश में डीएसपी समेत आठ पुलिसवालों की हत्या करने के बाद छह दिन से फरार चल रहा गैंगस्टर विकास दुबे गुरुवार की सुबह उज्जैन से गिरफ्तार कर लिया गया है। इसे विकास दुबे का सोचा-समझा सरेंडर ज्यादा माना जा रहा है। कांग्रेस तो सीधे तौर पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर आरोप लगा रही है। नरोत्तम मिश्रा का विकास दुबे और इस सरेंडर से क्या ताल्लुक है। इसका भी जवाब कांग्रेस ने दिया है।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ-साफ कहा, ‘यह तो उत्तर प्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए प्रायोजित सरेंडर लग रहा है। मेरी सूचना है कि मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह सारा कुछ संभव हुआ है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बिना वजह श्रेय ले रहे हैं और मध्य प्रदेश पुलिस की कामयाबी करार दे रहे हैं। यह श्रेय तो मध्य प्रदेश के गृह मंत्री जी को देना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा भाजपा के कानपुर जिले के प्रभारी थे।’

कुल मिलाकर साफ है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यूपी के मोस्ट वांटेड विकास दुबे और मध्य प्रदेश के मौजूदा गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का सीधे तौर पर कनेक्शन जोड़ रहे हैं। दिग्विजय सिंह इस पूरे प्रकरण को साजिश करार दे रहे हैं और उनका साफ-साफ कहना है कि यह गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह सोचा समझा और प्लानिंग करके सरेंडर किया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस विकास दुबे के पीछे खाक छानती रही और विकास दुबे वीआईपी पास लेकर महाकाल मंदिर पहुंच गया। एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि विकास दुबे के पास वीआईपी पास कैसे आया। इन सब सवालों के जवाब तलाशते हैं तो यह तो साफ दिखाई दे ही जाता है कि पूरे मामले में बहुत बड़ा झोल है।

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पूरी तरह खलबली मच गई है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जिस तरह से विकास दुबे कानपुर से उज्जैन 1250 किलोमीटर दूर पहुंच गया, भाजपा शासित तीन राज्यों में उसे कोई पकड़ नहीं सका, इसके पीछे कोई ना कोई बड़ा आदमी तो जरूर है। हालांकि, विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का ही बयान सबसे पहले आया था। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘हमने मध्य प्रदेश की सारी पुलिस को अलर्ट कर रखा था। पूरे राज्य में निगाह रखी जा रही थी। सवाल के जवाब में इंटेलिजेंस की बातें सीधी नहीं बताई जातीं। हम इसकी मर्म तक जाएंगे।’ गिरफ्तारी मंदिर से बाहर हुई या अंदर हुई है। इस सवाल पर उन्होंने कहा, "गिरफ्तारी बाहर हो, अंदर हो, मंदिर को बीच में न लाएं।"

इस पूरे मामले में एक वजह यह भी है कि जितने आराम से विकास दुबे की महाकाल मंदिर से गिरफ्तार हुई, वह कई सवाल खड़े कर रही है। छह दिन तक वह चार राज्यों में घूमता रहा। इनमें से तीन राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार हैं। विकास दुबे ने इस दौरान 1250 किलोमीटर का सफर बाइक, ट्रक, कार और ऑटो से तय किया है। यूपी पुलिस के सैकड़ों जवान उसकी तलाश में थे, लेकिन वह गिरफ्त से दूर रहा। उसे पकड़ा भी तो महाकाल मंदिर के गार्ड ने। गार्ड ने पहचाना और निहत्थे सिपाहियों ने पकड़ लिया।

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