BIG NEWS: जेपी समूह का फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक नीलाम होगा लेकिन 4,605 आवंटियों को बड़ी राहत

Updated Feb 12, 2020 18:58:42 IST | TriCity Today Chief Correspondent

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने जेपी समूह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सैंकड़ों करोड़ रुपए के बकायादारी के चलते प्राधिकरण ने जेपी एसोसिएट्स को आवंटित 1,000 हेक्टर की स्पोटर्स सिटी का पैसा जब्त कर लिया है और आवंटन रद्द कर दिया है। दूसरी ओर जेपी एसोसिएट्स की सहयोगी कम्पनियों के 4,605 प्लॉट और फ्लैट आवंटियों के लिए राहत भरी खबर है। इन्हें अब प्राधिकरण खुद प्लॉट और फ्लैट विकसित करके देगा। बाकी जमीन प्राधिकरण खुद बेचेगा। फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक भी नीलाम होगा। इसके लिए ग्लोबल टेंडर निकाला जाएगा। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इससे करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आमदनी...

BIG NEWS: जेपी समूह का फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक नीलाम होगा लेकिन 4,605 आवंटियों को बड़ी राहत
Photo Credit:  Tricity Today
Jaypee Groups Formula One racing track
Key Highlights
कंपनी के आवंटियों को अब यमुना एक्सप्रेस वे प्राधिकरण विकास प्राधिकरण प्लॉट और फ्लैट विकसित करके देगा
1,000 हेक्टेयर की स्पोर्ट सिटी को बेचकर प्राधिकरण अपना पैसा वसूलेगा। जल्दी ग्लोबल टेंछर निकालेगा प्राधिकरण

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने जेपी समूह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सैंकड़ों करोड़ रुपए के बकायादारी के चलते प्राधिकरण ने जेपी एसोसिएट्स को आवंटित 1,000 हेक्टर की स्पोटर्स सिटी का पैसा जब्त कर लिया है और आवंटन रद्द कर दिया है। दूसरी ओर जेपी एसोसिएट्स की सहयोगी कम्पनियों के 4,605 प्लॉट और फ्लैट आवंटियों के लिए राहत भरी खबर है। इन्हें अब प्राधिकरण खुद प्लॉट और फ्लैट विकसित करके देगा। बाकी जमीन प्राधिकरण खुद बेचेगा। फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक भी नीलाम होगा। इसके लिए ग्लोबल टेंडर निकाला जाएगा। प्राधिकरण को उम्मीद है कि इससे करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आमदनी होगी।

यह पूरा मामला
यमुना प्राधिकरण ने जेपी एसोसिएट्स को स्पोर्ट सिटी बसाने के लिए वर्ष 2009 में 1,000 हेक्टेयर जमीन आवंटित की थी। जमीन का आवंटन एसडीजेड योजना के तहत किया गया था। जेपी ग्रुप को यहां फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक, इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, हॉकी स्टेडियम और अन्य खेलों के लिए इंटरनेशनल स्तर के स्टेडियम बनाने थे। परियोजना की कुल 35 फीसदी जमीन पर खेल गतिविधि और अन्य हिस्से पर आवासीय एवं  वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित करने की छूट दी थी। बताया जा रहा है कि ग्रुप ने अपनी दस सहायक कम्पनियां बनाईं और लोगों को यहां प्लाट, फ्लैट, विला आदि का आवंटन शुरू कर दिया। कुल 4,605 आवंटियों को आवंटन कर दिया गया है।

आवंटियों से 75 फीसदी पैसा ले लिया
आवंटियों से करीब 1,900 करोड़ रुपए वसूल भी किए हैं। जबकि, आवंटियों से 2,400 रुपए वसूले जाने थे। आवंटियों पर केवल 532 करोड़ रुपए बकाया हैं। लेकिन, कब्जा किसी को भी नहीं दिया गया है। प्राधिकरण को बकाया किस्तों का भुगतान भी नहीं किया गया। इस बीच 2011 से लेकर 2015 तक ग्रुप को 21 बार नोटिस जारी किए गए लेकिन, प्राधिकरण को बकाया किस्तों का भुगतान नहीं किया गया है। प्राधिकरण का भी ग्रुप पर करीब 943 करोड़ रुपए बकाया हो गया। कम्पनी ने स्पोटर्स गतिविधियों के नाम पर फार्मूला वन ट्रैक बना लिया। मगर, अन्य कोई स्टेडियम नहीं बनाया है।

प्राधिकरण बोर्ड ने दो महीने पहले प्रस्ताव पर लगाई थी मुहर
दो माह पूर्व प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में स्पोटर्स सिटी प्रोजेक्ट का आवंटन रद करने के प्रस्ताव रखा गया था। बोर्ड इस मामले में निर्णय लेने के लिए यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. अरुणवीर सिंह को अधिकृत कर दिया था। डा. अरुणवीर सिंह ने बताया कि बुधवार को जेपी समूह को किया गया आवंटन रद कर दिया गया है। जमीन पर प्राधिकरण ने कब्जा हासिल कर लिया है। जमीन के खाली पड़े हिस्से को ग्लोबल टेंडर के जरिए बेचा जाएगा। इसे बेचकर प्राधिकरण को करीब 20 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे। इस रकम से प्राधिकरण अपनी बकाया धनराशि को वसूल करेगा और जेपी की सहयोगी कम्पनियों के 4,605 आवंटियों को उनके प्लॉट देगा। किसानों को भी बढ़ी दरों पर दिया जाने वाली मुआवजे की रकम की भरपाई की जाएगी।

फार्मूला वन परियोजना ने बिगाड़ा खेल
जेपी ग्रुप रियल स्टेट सेक्टर में देश की बड़ी कम्पनियों में से एक थी। एसडीजेड परियोजना का आवंटन भी कम्पनी की ख्याति को देखते हुए किया गया था। जानकारों का कहना है कि कम्पनी के हजारों करोड़ रुपए फार्मूला वन रेसिंग ट्रैक बनाने में डूब गए। यह देश का पहला कार रेसिंग ट्रैक था। ट्रैक पर केवल वर्ष 2011, 2012 और 2013 में एफ-वन रेस हुई हैं। इसके बाद से कोई बड़ी प्रतियोगिता यहां नहीं हो सकी। कम्पनी को रेसिंग ट्रैक से आमदनी की जो उम्मीद थी, उसके विपरीत हजारों करोड़ का घाटा हो गया। बताया जाता है कि इसी वजह से यह परियोजना डूब गई।

अभी जेपी ग्रुप के कानूनी रास्ते खुले हैं
इस कार्यवाही के बाद जेपी समूह के कानूनी रास्ते खुले हुए हैं। जानकारों का कहना है कि अभी जेपी हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटाखटा सकता है। प्राधिकरण को अपने निर्णय के पक्ष में न्यायालयों को संतुष्ट करना पड़ेगा। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि प्राधिकरण ने 21 नोटिस भेजकर और बोर्ड में प्रस्ताव को मंजूर करवाने के बाद कार्रवाई की है। ऐसे में प्राधिकरण को न्यायालय में कोई परेशानी नहीं होगी। केवल न्यायिक प्रक्रिया में समय लग सकता है।

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