जेवर एयरपोर्ट: मुआवजे से बहनों का हिस्सा हड़पने के लिए बन रहे फर्जी दस्तावेज, जांच होगी

Updated Feb 24, 2020 20:35:01 IST | Rakesh Tyagi

जेवर एयरपोर्ट के लिए किसानों को बांटे जा रहे करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि के पीछे एक स्याह तस्वीर सामने आई है। मुआवजे के लिए रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे...

जेवर एयरपोर्ट: मुआवजे से बहनों का हिस्सा हड़पने के लिए बन रहे फर्जी दस्तावेज, जांच होगी
Photo Credit:  Tricity Today
प्रतीकात्मक फोटो
Key Highlights
बहनों को हिस्सा नहीं देने के लिए भाई फर्जी वारिस प्रमाण पत्र बनवाकर यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में दाखिल कर रहे हैं
सोमवार को पकड़ा गया गए और मामला, सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने एसीईओ को ऐसे मामलों की जांच करने के की जिम्मेदारी सौंप दी है

जेवर एयरपोर्ट के लिए किसानों को बांटे जा रहे करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि के पीछे एक स्याह तस्वीर सामने आई है। मुआवजे के लिए रिश्तों की डोर कमजोर पड़ रही है। जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे को हड़पने के लिए लोगों ने खून के रिश्तों को छोड़ दिया है। मुआवजे में हिस्सा नहीं देने के लिए भाई अपनी बहनों का नाम रेवेन्यू डॉक्यमेंट्स से हटवा रहे हैं। कुछ लोग तो जिंदा बहनों को मृत दिखाने से भी परहेज नहीं बरत रहे हैं। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में इस तरह के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। सोमवार को भी ऐसा एक मामला पकड़ में आया है। जिसके बाद प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी जांच सौंप दी है।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट के अलावा प्राधिकरण की योजनाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण बड़े पैमाने पर हुआ है। कई इलाकों में प्राधिकरण ने सीधे किसानों से भी जमीन खरीदी हैं। यह प्रक्रिया चल भी रही है। जिन किसानों को मुआवजा मिल चुका है, अब उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिया जा रहा है। नियमों के मुताबिक पिता की पैतृक संपत्ति में भाई-बहनों (विवाहित बहनों) को भी बराबर का हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन, यहां बहनों को हिस्सा नहीं देना पड़े इसके लिए लोग हर हथकंडा अपना रहे हैं।

इसके लिए राजस्व अभिलेखों में हेरफेर करके बहन-बेटियों को मृत दिखया जा रहा है। ज्यादातर मामलों में तो उनका जन्म होना भी नहीं दर्शाया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा वारिसान प्रमाण पत्र भी बनवा रहे हैं। परिवार रजिस्टर तक में से नाम हटवा दिए गए हैं। ऐसे दस्तावेज तहसील से बनवाकर मुआवजे लेने के लिए प्राधिकरण में तैयार हो रही फाइलों में लगवा रहे हैं।

अफसरों के मुताबिक यमुना प्राधिकरण में इस तरह के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। सोमवार को भी एक मामला पकड़ में आया है। प्राधिकरण क्षेत्र के जुनैदपुर गांव के स्वर्गीय जयवीर सिंह की जमीन धनौरी गांव में खसरा संख्या 43 और 44 में थी। प्राधिकरण ने इस जमीन का अधिग्रहण कर लिया। एसडीएम सदर ने 2015 में परिवार सदस्यता प्रमाण पत्र बनाया। इसमें जयवीर की मृत्यु मई 2014 में होना बताया गया है। परिवार में जयवीर की पत्नी सावित्री, बेटा ईश्वर, दीपक, अमित, सुमित और ललित बताते हुए प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

ऐसे मामले पकड़ में आने लगे
यमुना प्राधिकरण के सीईओ डा. अरुणवीर सिंह ने बताया कि यह लोग जमीन का अतिरिक्ति मुआवजा मांगने के लिए सोमवार को आए। इन लोगों ने शिकायत की कि मुआवजा देने के बदले 50 हजार रुपये घूस मांगी जा रही है। शिकायत के बाद मूल मुआवजा की फाइल मंगवाई गई। मूल मुआवजा की फाइल चेक की गई तो पाया कि इन लोगों ने सितंबर 2019 में एसडीएम सदर के यहां से बनाया दूसरा वारिसान प्रमाण पत्र लगाया हुआ है। जिसमें अपनी मां सावित्री देवी, ईश्वर, दीपक, अमित, सुमित, ललित से पहले उनकी बहन पूजा का भी नाम दर्ज है।

कई-कई प्रमाण पत्र बना दिए गए
सितंबर 2019 में बने वारिसान प्रमाण पत्र में जयवीर की मृत्यु नवंबर 2013 में होना बताया गया है। दोनों प्रमाण पत्र में जयवीर की मृत्यु में एक साल का अंतर है। सीईओ ने बताया कि इस तरह के मामले और भी पकड़ में आए है। निलौनी में कौशल्या, मिर्जापुर में भगवती, मिर्जापुर में ही चंद्रवती और तारा धनौरी में शकीला मिर्जापुर में शशि के मामले में तो तीन वारिसान प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

इस मुद्दे पर यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. अरुणवीर सिंह का कहना है कि फर्जी तरीके से वारिसान प्रमाण पत्र बनाकर मुआवजा लेने वाले मामलों की जांच कराई जाएगी। एसीईओ को जांच सौंप दी गई है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र  भेजा जाएगा।

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