अच्छी खबर : अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखना हुआ आसान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नई ट्रेनों को दिखाई झंडी, पूरी जानकारी

अब स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखना हुआ आसान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नई ट्रेनों को दिखाई झंडी, पूरी जानकारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय रेल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी एक स्थान के लिए देश के 8 अलग जगहों से एक साथ रेल सेवाएं शुरू की गईं। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के 8 राज्यों से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी तक सीधे ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाई। अब गुजरात स्थित स्टेच्यू ऑफ यूनिटी घूमने के इच्छुक पर्यटकों के लिए बड़ी राहत है। बताते चलें कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है, जो गुजरात के केवड़िया में स्थित है। यह प्रतिमा महान स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। वल्लभ भाई पटेल ने आजादी के बाद देश की सारी रियासतों की भारत में विलय कराया था। प्रधानमंत्री ने जिन आठ ट्रेनों को हरी झंड़ी दिखाई है, उनमें शामिल एक ट्रेन अहमदाबाद-केवड़िया जन शताब्दी एक्सप्रेस में विस्टाडोम पर्यटन कोच की सुविधा उपलब्ध है। इसका मतलब है कि इस कोच की छत पर शीशे लगे हैं। छत पर शीशे लगे होने के कारण इस कोच में बैठे यात्री बाहर का खूबसूरत नजारा और बेहतर तरीके से देख सकेंगे।

प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गुजरात में सरदार सरोवर बांध के समीप वनाच्छादित पर्यटन स्थल केवडिया, डभोई और चांदौद रेलवे स्टेशनों के नवनिर्मित भवनों, डभोई-चांदौद अमान परिवर्तन, प्रतापनगर-केवडिया नवविद्युतीकृत रेलखंड और चांदौद-केवडिया ब्रॉड गेज लाइन का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने देश की राजधानी समेत कई स्थानों से आठ जोड़ी रेलसेवाओं की हरी झंडी दिखा कर शुरुआत की। इस मौके पर हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर रेल मंत्री पीयूष गोयल, विदेश मंत्री एस जयशंकर और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन मौजूद थे। केवडिया स्टेशन पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी उपस्थित रहे।  वीडियो लिंक के जरिए गुजरात के राज्यपाल देवव्रत आचार्य, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी जुड़े रहे। 

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के मंत्र की सुंदर तस्वीर पेश करता है। रेलवे के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब किसी एक स्थान के लिए देश के अलग अलग हिस्सों से एक साथ रेलसेवाएं शुरू की जा रहीं हैं। यह सरदार पटेल के भारत को एक करने के मिशन और भारतीय रेल के विज़न को परिभाषित करता है। उन्होंने कहा, “केवडिया का देश के हर हिस्से से सीधे रेल कनेक्टिविटी से जुड़ना पूरे देश के लिए एक अद्भूत पल है। हमें गर्व से भरने वाला क्षण है। ये नई ट्रेनें और रेल लाइन अब केवडिया की विकास यात्रा में नया अध्याय लिखने जा रही हैं।” 

इस रेल कनेक्टिविटी का सबसे ज्यादा फायदा सरदार पटेल की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' देखने आने वाले पर्यटकों को मिलेगा। साथ ही इससे केवडिया के आदिवासी भाई-बहनों का जीवन भी बदल जाएगा। केवडिया का देश में एक फैमिली टूरिस्ट डेस्टीनेशन के रूप में विकास वहां के लोगों के लिए रोज़गार एवं स्वरोज़गार के अवसर भी लाया है। नई रेलवे लाइन ने इस पूरे इलाके में करनाली गोइचा, गरुड़ेश्वर जैसे महत्वपूर्ण आस्था के केंद्रों को आपस में जोड़ दिया है। आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत होने के वजह यहां हजारों की संख्या में पर्यटक आते हैं। अब केवड़यिा गुजरात के सुदूर इलाके में बसा एक छोटा सा ब्लॉक नहीं रह गया है। बल्कि यह विश्व के सबसे बड़े पर्यटक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए अब स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ज्यादा पर्यटक आने लगे हैं। लोकार्पण के बाद तकरीबन 5० लाख लोग स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने आ चुके हैं। एक अध्ययन के मुताबिक आने वाले समय में रोज़ाना एक लाख से अधिक पर्यटक यहां आएंगे।
             
छोटा सा खूबसूरत केवड़यिा इस बात का बेहतरीन उदाहरण है, कि कैसे सुनियोजित तरीके से पयार्वरण की रक्षा करते हुए आर्थिकी और पारिस्थितिकी दोनों का तेजी से विकास किया जा सकता है। बढ़ते हुए पर्यटन के कारण केवड़यिा के आदिवासी युवाओं को रोजगार मिल रहा है। यहां के लोगों के जीवन में तेजी से आधुनिक सुविधाएं पहुंच रही हैं।”  बीते वर्षों में देश में रेलवे के पूरे तंत्र में व्यापक बदलाव करने के लिए अभूतपूर्व काम किया गया। ये काम सिर्फ बजट बढ़ाना, घटाना, नई ट्रेनों की घोषणा करने तक सीमित नहीं रहा। ये परिवर्तन अनेक मोर्चों पर एक साथ हुआ है। इस परियोजना के निमार्ण में मौसम और कोरोना महामारी जैसी तमाम बाधाएं आईं। पर उच्च तकनीक के उपयोग से 2० महीने के रिकॉर्ड समय में इतनी बड़ी परियोजना का काम पूरा किया गया।
             
बताते चलें कि कुछ वक्त पहले ही पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के एक बड़े खंड का लोकार्पण किया गया है। इस परियोजना पर 2006 से लेकर 2014 तक यानी करीब 8 वर्षों में सिर्फ कागजों पर ही काम हुआ। 2014 तक  इस कॉरिडोर पर 1 किलोमीटर तक भी ट्रैक नहीं बिछाया गया था। “आज जब भारतीय रेल के ट्रांसफॉर्मेशन की तरफ हम आगे बढ़ रहे हैं, तो उसके लिए उच्चश्रेणी के कुशल विशेषज्ञ और पेशेवर भी बहुत जरूरी हैं। वडोदरा में भारत की पहली डीम्ड रेल यूनिवर्सिटी की स्थापना के पीछे यही मकसद है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केवडिया देश की अखंडता एवं एकता का प्रतीक है। अनेकता में एकता की भावना, स्वतंत्रता के संघर्ष को दर्शाते हुए एकता स्थापित करने के सरदार पटेल की इच्छाशक्ति का प्रतीक है। इसके विकास से स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं को विश्व मानचित्र पर पहचान मिली है।
              
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस क्षण को यादगार मानते हुए कहा, “केवडिया में सरदार पटेल की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा देशवासियों को गौरवान्वित करने वाला राष्ट्रीय तीर्थस्थल है। यह अब विश्व भर में एक अलग पहचान बना चुका है।“ इस मौके पर सरदार पटेल के परिजन आणंद और नडियाद से वीडियो लिंक से जुड़े थे।  केवडिया के लिए जिन ट्रेनों का उद्घाटन किया गया, उनमें वाराणसी केवडिया महामना एक्सप्रेस (साप्ताहिक), दादर-केवडिया एक्सप्रेस (दैनिक), अहमदाबाद-केवडिया जनशताब्दी एक्सप्रेस (दैनिक), हजरत निजामुद्दीन-केवडिया एक्सप्रेस (सप्ताह में दो दिन), रीवा-केवडिया एक्सप्रेस (साप्ताहिक), चेन्नई एमजीआर सेंट्रल - केवडिया एक्सप्रेस (साप्ताहिक) ट्रेनों के अलावा दो जोड़ी प्रतापनगर -केवडिया मेमू ट्रेनें शामिल हैं। केवडिया स्टेशन पहला नवनिर्मित स्टेशन है, जिसे पूर्ण रूप से हरित स्टेशन का प्रमाणपत्र दिया गया है। भारतीय रेल खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) केवडिया में 200 कमरों का एक बजट होटल बना रहा है। इसके अलावा 200 कमरों का होमस्टे विकसित किया जा रहा है। पर्यटन के लिहाज से केवडिया शीघ्र ही दुनिया के चुनिंदा स्थानों में शामिल हो जाएगा।

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