Exclusive: स्कूल फीस बढ़ाने की मनमानी पर उतरे, गुरुग्राम से शुरू हुई पैरेंट्स की मुहिम नोएडा-ग्रेनो तक पहुंची, आप घर से ही कर सकते हैं मदद, Lockdown Stories

Updated Apr 08, 2020 21:12:20 IST | Mayank Tawer

इस वक्त राष्ट्रव्यापी तालाबंदी चल रही है। सरकार देश के नागरिकों को तमाम रियायतें दे रही है। लोगों के वेतन इस साल नहीं बढ़ेंगे। पूरा देश एक बड़े संकट से जूझ रहा है। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल फीस बढ़ाने पर अमादा हैं। अभिभावकों...

Exclusive: स्कूल फीस बढ़ाने की मनमानी पर उतरे, गुरुग्राम से शुरू हुई पैरेंट्स की मुहिम नोएडा-ग्रेनो तक पहुंची, आप घर से ही कर सकते हैं मदद, Lockdown Stories
Photo Credit:  Tricity Today
प्रतीकात्मक फोटो

इस वक्त राष्ट्रव्यापी तालाबंदी चल रही है। सरकार देश के नागरिकों को तमाम रियायतें दे रही है। लोगों के वेतन इस साल नहीं बढ़ेंगे। पूरा देश एक बड़े संकट से जूझ रहा है। इसके बावजूद प्राइवेट स्कूल फीस बढ़ाने पर अमादा हैं। अभिभावकों को ईमेल, नोटिस और फोन कॉल के जरिए स्कूलों की ओर से फीस बढ़ाने की जानकारी दी जा रही है। उन पर फीस जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। नोएडा के जिलाधिकारी ने तो तीन दिन पहले एक सर्कुलर जारी करके हिदायत दी है कि अगर तालाबंदी के दौरान किसी स्कूल ने फीस मांगने के लिए दबाव बनाया तो उसके मालिकों को जेल होगी। लेकिन हमेशा की तरह स्कूल मैनेजमेंट पर इन आदेशों का कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है।

दूसरी ओर इस साल स्कूलों की फीस नहीं बढ़ाई जाए, इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के कुछ अभिभावकों ने मुहिम छेड़ दी है। यह शुरुआत गुरुग्राम की रहने वाली अमरप्रीत ने की है। अमरप्रीत ने चेंज डॉट ओआरजी पर एक पिटीशन फाइल की है। जिस पर वह देशभर के अभिभावकों से समर्थन चाहती हैं। अब तक उन्हें करीब 28 हजार अभिभावकों का समर्थन मिल चुका है। वह 35 हजार अभिभावकों का समर्थन चाहती हैं। आप घर बैठे इस पेटीशन को समर्थन कर सकते हैं।

अमरप्रीत कहती हैं, मैं मिलेनियम सिटी गुड़गांव का निवासी हूं। हम सभी कोरोना वायरस संकट के बीच अनिश्चितताओं और भय के बीच हैं। पूरी दुनिया में COVID-19 द्वारा निर्मित वर्तमान परिस्थितियों के कारण आर्थिक मंदी स्पष्ट है। मैं भारत की आम नागरिक हूं और मेरे दोनों बच्चे गुड़गांव के एक स्कूल में पढ़ते हैं। लॉकडाउन के तहत हम घर में बैठे स्थिरता के साथ हम अपने दिन की शुरुआत करते हैं।

अमरप्रीत आगे कहती हैं, और यहां इस माहौल के बीच मुझे फीस में बढ़ोतरी के बारे में स्कूल से सूचना प्राप्त होती है। मैं चकित हूं कि मैं कैसे सामना पाऊंगी? मैं स्कूल फीस में वृद्धि और परिवहन शुल्क वृद्धि के बारे में जानने के लिए उत्सुक हूं कि स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2020-21 क्या करने वाले हैं। संपूर्ण भारत इस अनिश्चित काल से प्रभावित है। जब कंपनियां वेतन कटौती, ले-ऑफ, बिना वेतन के छुट्टी की घोषणा करने की योजना बना रही हैं। कई बड़े और छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, ऐसी स्थिति में स्कूल फीस बढ़ाने की बात कर रहे हैं। लेकिन शुल्क बढ़ोतरी पूरी तरह से अनुचित और असंवेदनशील है। स्कूल और माता-पिता इस कठिन समय में एक साथ हैं, जबकि शुल्क का भुगतान शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और स्कूलों के लिए अन्य खर्चों को सुनिश्चित करेगा। NO FEE HIKE और इस समय के लिए केवल ट्यूशन शुल्क लेने के अलावा कोई अन्य शुल्क लेना गलत है। 

अमरप्रीत ने मानव संसाधन विकास मंत्री को एक पत्र भेजा है। वह कहती हैं कि मैं पूरे भारत में स्कूलों को विनियमित करने और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश चाहती हूं कि इस वर्ष में कोई HIKE नहीं हो। स्कूल इस दौरान सेवाओं के लिए शुल्क नहीं लें, जो वे प्रदान नहीं कर रहे हैं (जैसे परिवहन ईंधन, बिजली, विकास, रखरखाव आदि)।

अमरप्रीत को ऑनलाइन समर्थन मिल रहा है। नोएडा आल स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष यतेंद्र कसाना ने कहा, हमने करीब 10 दिन पहले ट्वीटर पर यूपी के सीएम से मांग रखी है। तालाबंदी के दौरान अलग-अलग जिलों में वहां के डीएम अलग-अलग आदेश कर रहे हैं। कानपुर में तीन महीनों की फीस लेने से इनकार किया है। गौतमबुद्ध नगर में फीस लेने के लिए दबाव नहीं बनाने का आदेश है। यतेंद्र कहते हैं, मैंने नोएडा के कई स्कूलों से जुड़े दस्तावेज जुटाए हैं। इनके पास 100-100 करोड़ रुपये की एफडीआर हैं। कोई घाटे में नहीं है।

यतेंद्र कसाना ने स्कूलों से अपील की कि अब जब पूरा देश संकट में हैं तो हर कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार चैरिटी कर रहा है। थोड़ी चैरिटी स्कूलों को भी करनी चाहिए। मैं तो कहता हूं कि फीस बढ़ाने या नहीं बढ़ाने का तो मुद्दा ही नहीं है, इस साल स्कूलों को फीस नहीं लेनी चाहिए। अगर कोई स्कूल फीस खत्म नहीं करना चाहता तो कम से कम 50 फीसदी तो कटौती करें। अगर इस माहौल में भी स्कूल फीस बढ़ाते हैं तो यह गैर कानूनी होने से साथ अमानवीय भी होगा।

ग्रेटर नोएडा पेरेंट्स असोसिएशन के संस्थापक सदस्य आलोक सिंह का कहना है कि फिलहाल जो दौर चल रहा है, वह तो आर्थिक संकट बना हुआ ही है, इसके बाद का वक्त भी कुछ अच्छा नहीं आएगा। इस बन्दी का बड़ा नुकसान लोगों को उठाना पड़ेगा। मेरा मानना है कि स्कूलों को फीस बढ़ाना तो दूर पूरी फीस भी नहीं लेनी चाहिए। मेरा सुझाव है कि स्कूलों को केवल 30 फीसदी फीस लेनी चाहिए। जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दिया जाना है। सारे स्कूलों को चलाने वाली संस्थाएं नो प्रॉफिट नो लॉस वाली हैं। इस साल इन्हें इसी पैटर्न पर काम करना चाहिए।

आलोक सिंह आगे कहते हैं कि  अक्सर देखने में आता है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन इन स्कूल मैनेजमेंट के सामने हल्के पड़ जाते हैं। इस बार परिस्थितियां दूसरी हैं। सामान्य परिस्थितियों में अभिभावक अपने बच्चों का नुकसान देखते हुए पीछे हट जाते हैं। लंबे मुकदमे चलने के कारण स्कूल प्रबंधन मनमानी करते हैं। लेकिन अब हम जिस वक्त में खड़े हैं, यह महामारी का दौर है। स्कूल प्रबंधनों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह संवेदनशील बनें। अगर स्कूल प्रबंधन संवेदनशीलता का परिचय नहीं देते हैं तो सरकार को कड़ाई के साथ कार्यवाही करनी चाहिए। महामारी अधिनियम में लिखा है कि ऐसे स्कूल मालिकों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्हें 2 साल तक की सजा हो सकती है। इसको सरकार अमल में लाए।

अभिभावकों की इस लड़ाई में शिक्षक भी साथ हैं। टीचर्स असोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर एके सिंह का कहना है कि स्कूल फीस बढ़ा नहीं सकते हैं। स्कूलों को फीस नहीं बढ़ानी चाहिए। कोई स्कूल शिक्षकों की सैलरी नहीं बढ़ाएगा। फीस एक-एक महीने की लें। कानून के मुताबिक स्कूल साढ़े तीन प्रतिशत से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते हैं। अगर टीचर्स की सैलरी बढ़ाएंगे तो साढ़े आठ फीसदी तक बढ़ सकती है। कानून के अनुसार पुराने बच्चों से ट्यूशन फीस के अलावा कोई फीस नहीं बढ़ाई जा सकती है। नए बच्चों पर बढ़ाने का प्रावधान है।

प्रोफेसर एके सिंह का कहना है कि इस साल स्कूलों को किसी का वेतन नहीं बढ़ाना चाहिए। साथ ही अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालें। अगर इस महामारी के दौर में भी स्कूलों ने फीस बढ़ाई तो यह अमानवीयता होगी। ऐसे स्कूलों के खिलाफ सभी को खड़ा होना चाहिए। ये जो सुनने में आ रहा है कि स्कूल 15-20 फीसदी तक फीस बढ़ा रहे हैं, यह तो कानून के भी खिलाफ है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

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