अब 30 लाख में एक रुपये बीघा देने को तैयार नहीं जेवर के किसान, एयरपोर्ट ने बढ़ाई कीमत

Updated Mar 01, 2020 10:10:35 IST | Tricity Today Chief Correspondent

जेवर एयरपोर्ट पर तेजी से काम शुरू होने का असर जेवर क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। एयरपोर्ट के लिए जमीन दे रहे किसानों को अपने और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की उम्मीद है। एयरपोर्ट के लिए गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के विशेषज्ञों की टीम ने गांवों में सोशल इम्पेक्ट एसेसमेंट (SIA) किया था। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 90 फीसदी से ज्यादा किसानों ने एयरपोर्ट के लिए जमीन देने की हामी भरी...

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प्रतीकात्मक फोटो

जेवर एयरपोर्ट पर तेजी से काम शुरू होने का असर जेवर क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। एयरपोर्ट के लिए जमीन दे रहे किसानों को अपने और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की उम्मीद है। एयरपोर्ट के लिए गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के विशेषज्ञों की टीम ने गांवों में सोशल इम्पेक्ट एसेसमेंट (SIA) किया था। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 90 फीसदी से ज्यादा किसानों ने एयरपोर्ट के लिए जमीन देने की हामी भरी थी। इसे किसानों ने भविष्य संवारने वाला प्रोजेक्ट बताया है।
 
एसआईए रिपोर्ट के मुताबिक इन छह गांवों के 81.81 फीसदी लोगों ने माना की एयरपोर्ट आने से रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे। 90.9 फीसदी ने माना कि उनकी और बाकी क्षेत्र में जमीन की कीमत बढ़ जाएंगी। 72.72 प्रतिशत लोगों को लगता है कि आमदनी बढ़ेगी और 81.81 प्रतिशत ने कहा कि जनसुविधाओं में सुधार आएगा। कुल मिलाकर 91 प्रतिशत निवासियों ने जेवर एयरपोर्ट परियोजना के पक्ष में राय दी।

ग्रामीणों ने कहा, एक जमाना था जब यहां पांच लाख रुपये बीघा जमीन की कीमत कोई देने के लिए तैयार नहीं होता था। आज किसान 30 लाख रुपये में एक बीघा जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं। यह जेवर एयरपोर्ट परियोजना का ही असर है। किसानों का कहना है अभी कई और गांव की जमीन का अधिग्रहण प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। इससे यहां के 20-20 किलोमीटर के दायरे में जमीन की कीमत बढ़ गई हैं।

जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले पारोही गांव के निवासी कहते हैं कि हमारा गांव रोही गांव का मजरा है। मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर है। हमारा गांव शिफ्ट होकर टाउनशिप में जाएगा। हमने अफसरों के साथ बैठक के दौरान यही मांग की थी कि टाउनशिप जेवर के आसपास मुख्य मार्ग पर बसाई जाए। जेवर-टप्पल मार्ग पर टाउनशिप बसाई जाएगी। वहां सारी सुविधाएं मिलेंगी, जिनमें अब तक हम लोग वंचित थे।

दयानतपुर के युवा मनोज सिंह का कहना है कि लोगों ने इन्हीं वजहों से एयरपोर्ट के लिए जमीन दी है। अभी हमारे गांव में 85 फीसदी परिवार ऐसे हैं, जो 5,000 से 20 हजार रुपये प्रति माह कमाते हैं। खेती पर पूरी तरह आश्रित हैं। आठवीं से आगे स्कूल-कॉलेज नहीं हैं। अस्पताल 12 किलोमीटर दूर जेवर में है। गांव के लिए यातायात के साधन नहीं हैं। एयरपोर्ट आएगा तो ये सारी सुविधाएं लेकर आएगा। किल्लतों से पीछा छूट जाएगा।

किसानों को केवल मुआवजा और आवासीय सुविधाएं नहीं मिलेंगी बल्कि भविष्य में जेवर एयरपोर्ट से होने वाली सालाना आय में हिस्सेदारी भी मिलेगी। आय का एक फीसदी हिस्सा सीनियर सिटीजन को पेंशन के रूप में दिया जाएगा। युवकों के लिए नौकरियों का इंतजाम प्राधिकरण और सरकार कर ही रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार के उद्योग सचिव और नोएडा-ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रहे योगेंद्र नारायण कहते हैं कि इसमें कोई संदेह नहीं कि जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट वहां के निवासियों के लिए अपार संभावनाएं लेकर आएगा। उस क्षेत्र के नोएडा-दिल्ली तो क्या पूरी दुनिया से कनेक्टिविटी बन जाएगी।

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