देश में रियल्टी सेक्टर को एक लाख करोड़ का नुकसान, दिल्ली-एनसीआर की हालत ज्यादा खराब, नोएडा की स्थिति जानिए

देश में रियल्टी सेक्टर को एक लाख करोड़ का नुकसान, दिल्ली-एनसीआर की हालत ज्यादा खराब, नोएडा की स्थिति जानिए

देश में रियल्टी सेक्टर को एक लाख करोड़ का नुकसान, दिल्ली-एनसीआर की हालत ज्यादा खराब, नोएडा की स्थिति जानिए

Tricity Today | प्रतीकात्मक फोटो

कोरोना महामारी वैसे तो दुनिया के हर छोटे-बड़े कारोबार को बड़ा नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन भारत के रियल एस्टेट सेक्टर को इस बीमारी के कारण एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। यह राजस्व हानि चालू वित्त वर्ष 2020 के दौरान होगी। वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म केपीएमजी ने एक रिपोर्ट में कहा कि चालू वित्त वर्ष (2020-21) के अंत तक भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। 

इस रिपोर्ट के सापेक्ष ट्राइसिटी टुडे ने नार्थ हब के सबसे बड़े हिस्से (दिल्ली, गुरुग्राम, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद) के हालात का विश्लेषण किया। सेक्टर के जानकार अनुमान लगा रहे हैं कि इन शहरों को करीब 25-30 हजार करोड़ रुपए का झटका लगेगा। मतलब, देशभर में होने वाले एक चौथाई नुकसान का सामना दिल्ली-एनसीआर को करना होगा।

 "COVID-19: प्रतिक्रिया, अनुकूलन और पुनर्प्राप्ति: नई वास्तविकता" शीर्षक वाली यह रिपोर्ट बताती है कि महामारी अगले 6-12 महीनों में अचल संपत्ति से जुड़ी गतिविधियों को कम कर देगी। अगले 18 से 24 महीनों के बाद ही रियल प्रोपर्टी कारोबार में हलचल शुरू होने की संभावना है। केपीएमजी की रिपोर्ट के अनुसार आवासीय क्षेत्र में कोविड-19 से पूर्व बड़ी चुनौतियां थीं। मांग और तरलता दबाव के चलते बिक्री में मंदी चल रही थी।

अब क्रेडिट क्रंच से आवासीय बिक्री में कमी आएगी। जिससे 2019-20 में 4 लाख यूनिट से बिक्री घट जाएगी और यह देशभर में 2020-21 के दौरान 2.8 से 3 लाख यूनिट तक सिमट सकती है। दूसरी ओर वाणिज्यिक, आईटी और बीपीएम क्षेत्र में ऑफिस स्पेश के लिए मांग जारी रहने की संभावना है। प्रमुख भारतीय शहरों में कार्यक्षेत्रों में लगातार लीजिंग होने के बावजूद अगले 9-12 महीनों में गिरावट का सामना करना पड़ेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है, "भारतीय रियल एस्टेट करीब 250 से अधिक उद्योगों को आर्थिक योगदान या समर्थन करता है। भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र मौजूदा महामारी के कारण अस्थायी और अप्रत्यक्ष रूप से करीब-करीब विकलांग हो जाएगा।" अगले एक साल में सेक्टर को अपने नियोजित विकास, विस्तार और निवेश को फिर से अर्जित करना होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मौजूदा वित्तीय समस्याओं और अभूतपूर्व वैश्विक महामारी संकट ने निवेश के माहौल को अनिश्चित बना दिया है। लगभग कोई भी उद्योग, निर्माण और अचल संपत्ति के लिए आगे आने के लिए अभी तैयार नहीं है। जहां तक ​​इस क्षेत्र में पुनरुद्धार की बात है तो रिपोर्ट बताती है कि डेटा सेंटर, इंटीग्रेटिड सप्लाई चेन, वेयरहाउसिंग, इंडिपेंडेंट इंडस्ट्रियल पार्कों, डिजाइन, सोशल डिस्टेंशिंग और निवारक के रूप में अप्रयुक्त अचल संपत्ति इस सेक्टर में अव्यक्त अवसर लाएगा।

नोएडा ट्राईसिटी को 10-12 हजार करोड़ का नुकसान सम्भव
सुपरटेक के चेयरमैन और नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) के यूपी प्रेसिडेंट आरके अरोड़ा ने कहा, "अगर केपीएमजी का अनुमान है कि पूरे देश भर में एक लाख करोड रुपए का नुकसान रियल एस्टेट सेक्टर को होगा तो इसमें से 25-30 फीसदी नुकसान दिल्ली-एनसीआर के रियल्टी हब को होगा। इसे अगर और निचले स्तर तक ले जाएं तो नोएडा ट्राइसिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना सिटी) को 10-12 हजार करोड रुपए का नुकसान होने की संभावना है।" 

आरके अरोड़ा आगे कहते हैं, "लॉकडाउन के कारण रियल एस्टेट को बड़ा झटका लगा है। लेकिन नोएडा ट्राइसिटी के मामले में और भी कई परेशानियां हैं। मसलन, बिल्डर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में फंसे मुकदमों के कारण काम नहीं कर पाए। दूसरी ओर विकास प्राधिकरण लगातार बकाया धनराशि पर ब्याज और पैनल्टी ब्याज लगाते जा रहे हैं। विकास प्राधिकरण लैंडिंग कंपनी की तरह से काम कर रहे हैं। वह अपने खातों में मूलधन, ब्याज और दंड ब्याज जोड़कर पैसा बढ़ा रहे हैं।" 

आरके अरोड़ा ने कहा, "दूसरी ओर हम लोगों की ओर से सरकार को जो रिप्रेजेंटेशन दिए गए हैं, उन पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। जब तक सरकार हमारी समस्याओं को नहीं सुनेगी, उनका समाधान नहीं निकालकर देगी, तब तक काम कैसे शुरू पाएगा। आम आदमी को उसका घर कैसे मिलेगा। मैं व्यक्तिगत रूप से कई बार विकास प्राधिकरण और सरकार के जिम्मेदार लोगों से इन मुद्दों पर चर्चा कर चुका हूं, लेकिन अभी समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। जिसकी नितांत जरूरत है।"

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