नोएडा में बिजली महकमे में बड़ा घपला, कंज्यूमर्स के 1.77 करोड़ रुपये हड़पे

नोएडा में बिजली महकमे में बड़ा घपला, कंज्यूमर्स के 1.77 करोड़ रुपये हड़पे

नोएडा में बिजली महकमे में बड़ा घपला, कंज्यूमर्स के 1.77 करोड़ रुपये हड़पे

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नोएडा में बिजली महकमे में बड़ा घपला, कंज्यूमर्स के 1.77 करोड़ रुपये हड़पे
पावर कारपोरेशन और बैंक के कर्मचारियों ने मिलकर घपले को अंजाम दियाgangaपावर कारपोरेशन की ओर से डीसीपी प्रथम जोन को मामले की शिकायत दी गईgangaकरीब 10 महीने से यह घोटाला नोएडा के पावर कॉरपोरेशन में चल रहा था

पावर कॉरपोरेशन और प्राइवेट बैंक के कर्मचारियों ने मिलकर नोएडा के कंज्यूमर्स के 1.77 करोड़ रुपये हड़प लिए हैं। बड़ी बात यह कि करीब 10 महीनों से घोटाला अफसरों की नाक के नीचे चल रहा था और भनक तक नहीं लगी। बैंक में फर्जी खाता खोलकर इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। अब मामले का खुलासा होने के बाद पावर कारपोरेशन ने डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस फस्र्ट जोन से शिकायत की है। डीसीपी ने एसीपी को मामले की जांच सौंपी है।

घोटाले का खुलासा होने के बाद उत्तर प्रदेश पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (यूपीपीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक (एमडी) ने भी विभागीय जांच का आदेश दिया है। जिसके तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। यह कमेटी एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। उसके बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। पावर कारपोरेशन में बिल का भुगतान नकदी, चेक और डिमांड ड्रॉफ्ट (डीडी) के जरिए होता है। उपभोक्ता ऑनलाइन भी बिल का भुगतान कर सकते हैं। पावर कारपोरेशन के अफसरों का कहना है कि निजी एजेंसी के माध्यम से सेक्टर-50 स्थित एक नामी निजी बैंक में सभी चेक और डीडी जमा किए जाते हैं। इनकी नियमित रिसिविंग भी ली जाती हैं।

 

आरोप है कि बैंक और विद्युत निगम के कुछ कर्मियों की मिलीभगत से कुछ डीडी बुलंदशहर के सरकारी बैंक के फर्जी खाते में जमा किए जाते थे। फिर उस खाते से पैसे तत्काल निकाल लिए जाते थे। अभी उस खाते में मात्र 20 हजार रुपये हैं। खाते को सीज कर दिया गया है। जालसाजी करने वाले लोगों ने बुलंदशहर में देहात क्षेत्र की सरकारी बैंक शाखा में पावर कॉरपोरेशन के नाम ईयूडीडी (विद्युत वितरण नगरीय खंड) से ही मिलता-जुलता फर्जी खाता खुलवाया था। डीडी के रुपये बैंक खाते में आते ही जालसाज रुपये निकाल लेते थे। इसमें बुलंदशहर के सरकारी बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।

 

पिछले दस महीने से यह सिलसिला पावर कॉरपोरेशन में जारी था। इस तरह सबसे ज्यादा गबन सेक्टर-18 अधिशासी अभियंता द्वितीय के कार्यालय से हुआ है। आशंका है कि विभाग के कुछ उच्चाधिकारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। मामले की शिकायत मिलते ही एसीपी विमल कुमार सिंह ने जांच भी शुरू कर दी है। एसीपी ने सेक्टर-50 के नामी निजी बैंक के अधिकारी और कर्मचारियों से पूछताछ की है। इसके साथ ही बिजली अधिकारी और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। एसीपी टीम के साथ बुलंदशहर स्थित सरकारी बैंक की शाखा में पूछताछ करने जाएंगे। 

गबन करने वाले लोगों के तार तीन अधिशासी अभियंता के कार्यालय से जुड़े हैं। पिछले 10 महीनों से लगातार अधिशासी अभियंता द्वितीय के क्षेत्र में गबन हो रहा था। इसके कुछ सप्ताह बाद से अधिशासी अभियंता पंचम व सप्तम में भी इसी तरह गबन होने लगा था। बिजली अधिकारियों का मानना है कि अगर समय पर विभाग द्वारा ध्यान दिया जाता तो गबन को रोका जा सकता था।

सेक्टर-62 स्थित अधिशासी अभियंता सप्तम के लेखाधिकारी ने जांच की तो कुछ डीडी का पैसा विभाग के खाते में नहीं पहुंचा है जबकि उपभोक्ता भुगतान के सबूत पेश कर रहे थे। इसके बाद अंतरिम जांच की गई जिसमें गड़बड़ी पकड़ी गई। इस मामले के तार बुलंदशहर से जुड़े बताए जा रहे हैं। बुलंदशहर में भी इस तरह का गबन हुआ है।

यह मामला मेरठ मुख्यायल पहुंचने के बाद एमडी अरविंद मल्लप्पा बांगरी ने भी तीन सदस्य जांच कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने अधीक्षण अभियंता द्वितीय बीएल मौर्य की अध्यक्षत में कमेटी गठित की गई है। उनके साथ अधिशासी अभियंता आईटी शिवम शर्मा व मुख्य लेखाधिकारी गाजियाबाद आशीष गर्ग को जांच टीम में शामिल किया गया है। टीम ने मंगलवार को सेक्टर-16ए फिल्म सिटी कार्यालय और बुधवार को सेक्टर-16 मुख्य अभियंता कार्यलय परिसर में जांच शुरू की। 

नोएडा के अधिशासी अभियंता द्वितीय के कार्यालय में 1.32 करोड़ रुपये, अधिशासी अभियंता पंचम के कार्यालय में 0.025 करोड़, अधिशासी अभियंता सप्तम के कार्यालय में 0.425 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। बिजली अधिकारियों के अनुसार विभाग के 50 से ज्यादा डीडी फर्जी बैंक खाते में जमा करके रुपये निकाले गए हैं। इसमें सबसे ज्याद रुपये उद्यमियों के बिल के हैं। ऐसे में उन उद्यमियों की परेशानी बढ़ गई है। उद्यमियों पर विभाग का बिल बकाया भी आ रहा है।

इस पूरे घोटाले के बारे में मेरठ पीवीवीएनएल के एमडी अरविंद मल्लप्पा बांगरी का कहना है कि राजस्व गबन का मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस विभाग में शिकायत दे दी है। इसके साथ ही विभागीय जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित ही कर दी है। जांच रिपोर्ट सप्ताह भर में दी जाएगी। इसके बाद संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मामले की जांच का आदेश देने वाले नोएडा के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस संकल्प शर्मा का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन के अधिशासी अभियंता ने मामले की शिकायत दी है। एसीपी तृतीय को मामले की जांच सौंप दी गई है। जांच में जो तथ्यों सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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