मूट कोर्ट एक प्रकार का काल्पनिक न्यायालय है: पल्लवी गुप्ता

Updated Feb 15, 2020 18:21:41 IST | Mayank Tawer

ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 3 स्थित जगन्नाथ इंस्टीट्यूट के विधि विभाग में आज दूसरे दिन देशभर से आई बीस टीमों ने कानूनी दाव पेचों की जोर आजमाइश की। प्रतियोगिता का आरम्भ मे प्रिलिमिनरी राउंड हुए। जिसमें सभी टीमों के मूट स्पीकर्स ने पक्ष...

मूट कोर्ट एक प्रकार का काल्पनिक न्यायालय है: पल्लवी गुप्ता
Photo Credit:  Tricity Today
Second day of moot court at Jagannath Institute in Greater Noida

ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 3 स्थित जगन्नाथ इंस्टीट्यूट के विधि विभाग में आज दूसरे दिन देशभर से आई बीस टीमों ने कानूनी दाव पेचों की जोर आजमाइश की। प्रतियोगिता का आरम्भ मे प्रिलिमिनरी राउंड हुए। जिसमें सभी टीमों के मूट स्पीकर्स ने पक्ष और विपक्ष की ओर से अपने अपने पक्षो को रखा। 

जगन्नाथ इंस्टीट्यूट में आयोजित तीन दिवसीय जग्गनाथ राष्ट्रीय मूट कोर्ट के दूसरे दिन के बहस के बाद आठ टीमें क्वार्टरफाइनल में पहुंची। क्वार्टरफाइनल मे टीमों के बीच सटीक तर्क, विर्तक की कड़ी प्रतिस्पद्र्धा के बाद आठ टीमें क्वार्टफाइनल में पहुंची है। इस मुकाबले के बाद चार टीमें नोकआउट राउंड के लिए सेमीफाइनल में पहुंचे। कार्यक्रम मे विभागध्यक्षीका ने टीमों को जानकारी दी ओर बताया कि, मूट एक कला है जो विधिक तर्क वितर्क से ही विकसित हो सकती है।

कार्येक्रम के सयोंजक मंडल में सुधीर द्विवेदी, आकांक्षा घोष ने बताया कि मूट कोर्ट एक प्रकार का काल्पनिक न्यायालय है। इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को काल्पनिक केस दिया जाता है। इसमें प्रतिभागी केस पर लीगल आधार पर बहस करते हैं। कोर्ट में निर्णायक के रूप में न्यायविद्, न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता निर्णायक की भूमिका में होते हैं। इस दौरान प्रतिभागियों के धैर्य, विधि का ज्ञान, उत्तर देने की क्षमता के आधार पर आकलन किया जाता है।

कार्यक्रम का समापन रविवार 16 फरवरी को होगा। इस समारोह में सर्वोच्च न्यायलय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति स्वतन्त्र कुमार, दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल हिस्सा लेंगे।
 

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