यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए अब जमीन खरीदने की जरूरत नहीं, कम पूंजी वाले भी कर सकेंगे बड़ा काम

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए अब जमीन खरीदने की जरूरत नहीं, कम पूंजी वाले भी कर सकेंगे बड़ा काम

Google Image | Dr Arunvir Singh IAS

अब Yamuna Authority क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए जमीन खरीदने की जरूरत नहीं होगी। प्राधिकरण काम पूंजी और नवोदित उद्यमियों के लिए एक शानदार योजना लेकर आया है। अब यमुना अथॉरिटी इमारत और शेल्टर का निर्माण करवाएगी। उद्योग चलाने के लिए इन्हें किराए पर देगी। इसका फायदा यह होगा कि यहां उद्योग चलाने की योजना बना रहे उद्यमी तुरंत काम शुरू कर सकते हैं। इसके लिए बहुत काम पूंजी की जरूरत होगी। बेहद कम समय में उत्पादन शुरू हो जाएगा।

अभी अगर कोई यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में उद्योग लगाना चाहता है तो उसे पहले जमीन आवंटित करवानी पड़ती है। उसके बाद कम्पनी का निर्माण करना पड़ता है। इस सारे काम में उद्यमियों को 3 से 5 साल का समय लग जाता है। जमीन आवंटन और निर्माण आदि की लंबी और खर्चीली प्रक्रियाओं से उद्यमियों को बचाने के लिए यमुना प्राधिकरण एक शानदार योजना लेकर आया है। अथॉरिटी बहुत जल्दी फ्लेटिड इंडस्ट्री की योजना लेकर आ रही है। इसके तहत प्राधिकरण उद्यमियों को विकल्प देगा। वह किराए पर प्राधिकरण के शेल्टर या बिल्डिंग लेकर अपना उद्योग शुरू कर सकेंगे। इसके लिए उद्योगों के लिहाज से शेल्टर और इमारत तैयार करवाई जाएंगी।

उद्यमियों को 10 से 15 साल का एग्रीमेंट करना होगा

यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.अरुण वीर सिंह का कहना है कि उद्यमियों से कंपनी चलाने के लिए 10 से 15 साल का करार होगा। किराए पर शेल्टर देकर उद्यमियों को तुरंत उद्योग शुरू करने की सुविधा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका प्रस्ताव तैयार हो रहा है। प्रस्ताव को शासन के पास भेजा जाएगा। प्राधिकरण अपनी बोर्ड बैठक में भी इस प्रस्ताव को पास करवाएगा। बेहद काम पूंजी वाले युवा उद्यमी इस योजना का भरपूर लाभ उठा सकते हैं। इसे हमारे यहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। काम समय में ज्यादा औद्योगिक इकाई लगेंगी।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा ने भी बनाई थी योजना

किराए पर सेल टावर बिल्डिंग देकर उद्योग शुरू कराने की योजना करीब एक साल पहले ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण ने भी बनाई थी। हालांकि, इस पर अभी अमल नहीं हो सका है। वहीं, नोएडा प्राधिकरण के बोर्ड ने पिछली बैठक में वहां ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

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