नोएडा और ग्रेनो में तीन लाख फ्लैट खरीदारों पर आई नई आफत

Updated Feb 09, 2020 19:20:00 IST | Tricity Today Correspondent

नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहर के तीन लाख फ्लैट खरीदार अब और नई परेशानी में घिर गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। जिसका असर नोएडा-ग्रेटर नोएडा...

Photo Credit:  TriCity Today
प्रतीकात्मक फोटो

नोएडा और ग्रेटर नोएडा शहर के तीन लाख फ्लैट खरीदार अब और नई परेशानी में घिर गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति की रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है। जिसका असर नोएडा-ग्रेटर नोएडा के 3 लाख से अधिक फ्लैट खरीदारों पर पड़ेगा। ये वह खरीदार हैं जो 10 साल से अपने फ्लैट पाने के लिए धक्के खा रहे हैं और बिना रजिस्ट्री के अभी फ्लैट में रह रहे हैं। विकास प्राधिकरणों की लापवाही और बिल्डरों की मनमानी से इनको अभी तक फ्लैट नहीं मिले हैं। जिन्हें मिल गए हैं उन्हें मालिकाना हक नहीं मिला है। अब इन खरीदारों को दोहरी मार झेलनी पड़ेगी।

यूपी केबिनेट ने बीते बुधवार को रजिस्ट्री की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। अभी तक संपत्ति की कीमत का कोई असर रजिस्ट्री फीस पर नहीं होता था। मतलब, एक करोड़ रुपये की प्रोपर्टी की रजिस्ट्री करवाने के लिए 20,500 रुपये फीस ली जाती थी और 10 लाख रुपये की रजिस्ट्री के लिए भी इतनी ही फीस चुकानी पड़ती थी। अब ऐसा नहीं होगा। अब रजिस्ट्री फीस प्रोपर्टी की कीमत का एक प्रतिशत धनराशि होगी। सरकार ने यह प्रस्ताव पास कर दिया है। शासनादेश जारी होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

अब नोएडा-ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदारों पर इसकी दोहरी मार पड़ने वाली है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 30-40 लाख से लेकर एक करोड़ रुपये और इससे भी ज्यादा महंगे फ्लैट लोगों ने खरीद रखे हैं। ऐसे में उनको संपत्ति की रजिस्ट्री करवाने के लिए काफी अधिक फीस चुकानी होगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जो फ्लैट खरीदारों ने बुक कर रखे हैं और उनको अभी तक कब्जा नहीं मिल पाया है, उन पर बिना वजह मार पड़ेगी। वर्ष 2009-10 में बुकिंग करने के बाद अब तक फ्लैट पाने के लिए धक्के खा रहे हैं। इस समय बिल्डर परियोजनाओं में या तो काम बंद पड़ा है या फिर काफी धीमी गति से चल रहा है। परियोजनाओं में खरीदारों को 2013-2015 तक कब्जा मिल जाना चाहिए था।

आम्रपाली, यूनिटेक, जेपी आदि बिल्डर की परियोजनाओं में अधिक खरीदार फंसे हुए हैं। इन्हें तो 2023 तक फ्लैट मिलेंगे। इन खरीदारों की संख्या करीब दो लाख है। ऐसे एक लाख खरीदार हैं, जिन्हें बिल्डरों फ्लैट तो दे दिए हैं लेकिन रजिस्ट्री नहीं करवाई हैं। रजिस्ट्री नहीं होने के लिए सीधे तौर पर प्राधिकरण और बिल्डर जिम्मेदार हैं। परियोजना के लिए प्राधिकरण से खरीदी जमीन की कीमत बिल्डर जमा नहीं कर रहे हैं। प्राधिकरण बिल्डरों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहे हैं। जिसकी वजह से फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं हो रही हैं। ऐसे खरीदार को भी बिना वजह अतिरिक्त शुल्क चुकाना पड़ेगा।

बीते करीब पांच साल में नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सर्किल रेट भी काफी बढ़ गए हैं। शहर के सबसे महंगे ए श्रेणी के सेक्टरों का सर्किल रेट 85 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर था, जो अब बढ़कर 1,03,500 रुपये हो गया है। सबसे सस्ते सेक्टर के सर्किल रेट भी 27 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 40 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गए हैं। फ्लैटों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। जिसके कारण नोएडा प्राधिकरण ने भी आवंटन दरों में बढ़ोतरी की है।

इतना ही नहीं आने वाले एक अगस्त को फिर नए सर्किल रेट लागू किए जाएंगे। सर्किल रेट बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में खरीदारों की दिक्कतें कम होने की उम्मीद नहीं है। अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोग पुराने सेक्टर के सर्किल रेट पर ही रजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।

फेडरेशन ऑफ नोएडा अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशंस के अध्यक्ष प्रोफेसर राजेश सहाय का कहना है कि सरकार मनमाने ढंग से फैसले ले रही है। कोई नियम या कानून बदला जाता है तो उस पर जनता से राय-मशविरा तो लेना होता है। यह नियम कब से लागू होगा, यह भी एक तारीख नियत की जाती है। सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया है। अपनी मर्जी से नियम बदल दिए हैं। सरकार को कम से कम उन लोगों को राहत देनी चाहिए जो साल या छह महीने पहले से स्टांप खरीदकर बैठे हैं। प्राधिकरण और बिल्डरों की आपसी गड़बड़ियों के कारण आम आदमी को सजा देने का कोई लॉजिक नहीं है।

नोएडा सेक्टर-77 की प्रतीक विस्टीरिया हाउसिंग सोसायटी में रहने वाले शरद सिंह ने कहा, मैं सोसायटी में करीब एक साल से रह रहा हूं। तीन बेडरूम का फ्लैट 90 लाख रुपये में लिया था। बिल्डर ने फ्लैट बेचते समय एक महीने के अंदर रजिस्ट्री करवाने का दावा किया था लेकिन अब तक नहीं हुई है। मैंने स्टांप खरीदकर तभी बिल्डर को दे दिए थे। अब रजिस्ट्री की फीस बढ़ने की खबर पता चली तो होश उड़ गए हैं। मुझे करीब 70 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ेंगे। हम भला ये पैसे कहां से लेकर आएंगे।

लॉजिक्स ब्लोसम ग्रीन्स में फ्लैट खरीदने वाले मनीष ने कहा, मैंने सेक्टर-143 की परियोजना में तीन बेडरूम का फ्लैट बुक करवा रखा है। फ्लैट की कीमत करीब 51 लाख रुपये है। वर्ष 2013 तक यह फ्लैट मिल जाना चाहिए था, जो अभी तक नहीं मिला। सात वर्षों से हम लोग धक्के खा रहे हैं। बिल्डर की कमियों का खामियाजा हम तो पहले से भुगत रहे हैं। अब सर्किल रेट और फीस का अनावश्यक खर्चा बढ़ गया है। मेरा मानना है कि हमारी रजिस्ट्री 2013 की दरों के मुताबिक की जानी चाहिए।

ग्रेटर नोएडा की पहली हाउसिंग सोसायटी सीनियर सिटीजन सोसायटी में रहने वाले मुकेश सिंह का कहना है कि हमारी सोसायटी का मामला सबसे जुदा है। सोसायटी के ऊपर प्राधिकरण का कोई बकाया नहीं है। हम लोग 10-10 वर्षों से अपने फ्लैटों में रह रहे हैं। पहले बिल्डर सोसायटी को अधूरी छोड़कर फरार हो गया। अब एक नई सोसायटी आई है, जो खुद को बिल्डर्स सोसायटी का उत्तराधिकारी बताती है लेकिन वे लोग आयकर विभाग से मुकदमा लड़ने में व्यस्त हैं। प्राधिकरण सोसायटी की ओर देखने को तैयार नहीं है। पूरा पौर लेने के बावजूद कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने के लिए तैयार नहीं है।

दूसरी ओर रजिस्ट्रेशन डिपोर्टमेंट के डीआईजी जीपी सिंह का कहना है कि नई व्यवस्था में क्या है, यह अभी हमें पता नहीं लगा है। शासनादेश आने पर ही रजिस्ट्री की फीस बढ़ने से संबंधित सारे तथ्य स्पष्ट होंंगे। अभी तक यही पता चला है कि शासनादेश लागू होने की तारीख के बाद जो फ्लैट की रजिस्ट्री कराएगा, उसे नए रेट के हिसाब से फीस देनी होगी।

कुल मिलाकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 100 से ज्यादा हाउसिंग सोसायटियों के करीब तीन लाख फ्लैट खरीदारों पर नए नियम की मार पड़ेगी। जबकि, यही मायने में इस परेशानी के लिए ये लोग जिम्मेदार नहीं हैं। यह परेशानी विकास प्राधिकरणों की लापरवाही और बिल्डरों के फर्जीवाड़ों के कारण पैदा हुई है।