BIG NEWS: नोएडा में 2 दिन रहा विकास दुबे, नामचीन क्रिमिनल लॉयर की मदद से सरेंडर करना चाहता था, पढ़िए पूरी खबर

BIG NEWS: नोएडा में 2 दिन रहा विकास दुबे, नामचीन क्रिमिनल लॉयर की मदद से सरेंडर करना चाहता था, पढ़िए पूरी खबर

Tricity Today | उज्जैन पुलिस की हिरासत में विकास दुबे।

नोएडा में 5 और 6 जुलाई को क्रिमिनल लॉयर के घर रहा विकास दुबेgangaसीएनएन न्यूज-18 की इंग्लिश वेबसाइट का सूत्रों के हवाले से दावाgangaनोएडा में बात नहीं बनी तो दुबे और वकील दिल्ली पुलिस के संपर्क में आएgangaदावा है- दिल्ली पुलिस ने यह सरेंडर करवाने से साफ इनकार कर दिया थाgangaइसके बाद राजस्थान पुलिस से संपर्क किया और आखिर में उज्जैन घटनाक्रम हुआ

कानपुर पुलिस मुठभेड़ का मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया। इस खबर की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। यूपी एसटीएफ की टीम विकास दुबे को लेकर जैसे ही कानपुर पहुंची, काफिले की एक गाड़ी पलट गई। हादसे के बाद विकास दुबे सुरक्षाकर्मी का हथियार छीनकर फायरिंग करते हुए भागने लगा। इसी बीच सुरक्षाकर्मियों ने भी अपने बचाव में गोलियां चलाईं, जिसके बाद विकास दुबे मारा गया। 

बता दे कि कानपुर कांड के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे की गुरुवार को उज्जैन में गिरफ्तारी हो गई है, लेकिन अब एक के बाद एक परतें खुल रही हैं। जानकारी मिली है कि विकास दुबे 2 दिन तक नोएडा में ही रहा था। वह नोएडा से उज्जैन के लिए निकला था। नोएडा में एक नामचीन क्रिमिनल लॉयर के घर विकास दुबे दो रात ठहरा था। सीएनएन न्यूज़-18 ने यह दावा किया है। यह भी दावा किया गया है कि नोएडा, दिल्ली और राजस्थान पुलिस से सरेंडर के लिए इस क्रिमिनल लॉयर ने संपर्क साधा था।

न्यूज़-18 की इंग्लिश वेबसाइट ने गुरुवार की देर रात एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसमें दावा किया गया है कि विकास दुबे एक क्रिमिनल लॉयर के माध्यम से नोएडा में आत्मसमर्पण करना चाहता था। इसके लिए वह क्रिमिनल लॉयर के घर रुका था। न्यूज़ वेबसाइट ने सूत्रों के हवाले से दी गई खबर में कहा है कि दुबे के आत्मसमर्पण के लिए नोएडा पुलिस से संपर्क किया गया था। हालांकि, इस प्रक्रिया को अंजाम देने से नोएडा पुलिस ने इंकार कर दिया। बाद में वकील गैंगस्टर के आत्मसमर्पण के लिए दिल्ली पुलिस के पास भी पहुंचा, लेकिन दिल्ली पुलिस ने भी मना कर दिया।

राजस्थान के कोटा शहर में सरेंडर का प्रयास हुआ

इसके बाद विकास दुबे राजस्थान के कोटा शहर गया। वहां भी उसने आत्मसमर्पण करने की कोशिश की, लेकिन राजस्थान पुलिस ने इंकार कर दिया। अंत में क्रिमिनल लॉयर और विकास दुबे उज्जैन में किसी तिवारी से बात करने पहुंचे। इस तिवारी सरनेम वाला वाले व्यक्ति का भाई कानपुर में एक बड़ा व्यापारी है।

तिवारी ने महाकाल मंदिर का घटनाक्रम रचा लेकिन एमपी पुलिस शामिल नहीं

वेबसाइट के सूत्रों ने दावा किया है कि वह तिवारी ही था, जिसने इस पूरी योजना को अंजाम दिया और विकास दुबे को महाकाल मंदिर में लेकर पहुंचा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में मध्य प्रदेश पुलिस को शामिल नहीं किया गया था। विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। दूसरी और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में पुलिस के प्रयासों की प्रशंसा की है। दोनों राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार हैं।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने गिरफ्तारी की पुष्टि की

विकास दुबे की गिरफ्तारी की पुष्टि खुद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने की। इसके बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, मध्य प्रदेश पुलिस जल्दी ही विकास दुबे को उत्तर प्रदेश पुलिस को सौंप देगी। गुरुवार की शाम उत्तर प्रदेश पुलिस का एक दस्ता उज्जैन के लिए रवाना हो गया है। यूपी स्पेशल टास्क फोर्स को दुबे को हिरासत में ले लिया है और कानपुर वापस लेकर आ रही है।

आपको बता दें कि 3 जुलाई को कानपुर के बिकरु गांव में डीएसपी, तीन सब इंस्पेक्टर और 4 कॉन्स्टेबल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गैंगस्टर विकास दुबे के खिलाफ 60 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस मुठभेड़ में चार और पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पिछले एक सप्ताह में दुबे के कई सहयोगियों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया है और मार दिया गया है। विकास दुबे इस मुठभेड़ के बाद फरार हो गया था। उसके कभी नोएडा तो कभी फरीदाबाद में होने की जानकारी मिल रही थी। यूपी पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया था।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सवाल खड़े किए

विकास दुबे की गुरुवार की सुबह उज्जैन में गिरफ्तारी होने के बाद विपक्षी पार्टियों ने उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर ले लिया है। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले में सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि इस गिरफ्तारी के लिए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को बधाई दी जानी चाहिए। नरोत्तम मिश्रा कानपुर के भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी रह चुके हैं। 

उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी ट्वीट करके योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरा। उन्होंने ट्वीट में लिखा, "खबर आ रही है कि कानपुर मामले का मुख्य आरोपी पुलिस हिरासत में है। अगर यह सच है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आत्मसमर्पण था या गिरफ्तारी थी। इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि उसके साथ खड़े लोगों का नाम उजागर हो सकें।"

नोएडा पुलिस कोर्ट और फिल्म सिटी में डेरा डाले पड़ी रही

पिछले छह दिनों के दौरान पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस हाई अलर्ट पर रही। गौतम बुध नगर में जिला न्यायालय को पुलिस ने कई दिनों तक घेर कर रखा। पुलिस को जानकारी मिल रही थी कि विकास दुबे गौतम बुध नगर की जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर सकता है। दूसरी ओर पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि विकास दुबे नोएडा फिल्म सिटी में किसी न्यूज़ चैनल के स्टूडियो पहुंचकर सरेंडर करना चाहता है। दो दिनों तक पुलिस ने फिल्म सिटी में भी डेरा डाले रखा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर थी।

यूपी पुलिस ने नेपाल सीमा को सील कर दिया था

इसी तरह नेपाल की सीमा से लगने वाले जिलों में भी पुलिस हाई अलर्ट पर रही। गोरखपुर, लखीमपुर, खीरी, बहराइच और बरेली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। बहराइच के पुलिस अधीक्षक विपिन मिश्रा ने कहा था कि इंटेलिजेंस से इनपुट्स मिले हैं कि विकास दुबे नेपाल भाग सकता है। इसलिए भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल के जवानों और वन विभाग के अधिकारियों का सहयोग लिया जा रहा है। सीमा के जंगल क्षेत्रों में एक गहन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया था।

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