सुरेंद्र सिंह नागर को यूपी भाजपा में उपाध्यक्ष बनाने का क्या मतलब है, जानिए

सुरेंद्र सिंह नागर को यूपी भाजपा में उपाध्यक्ष बनाने का क्या मतलब है, जानिए

Tricity Today | सुरेंद्र सिंह नागर

राज्यसभा सांसद सुरेंद्र सिंह नागर शनिवार को उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। सुरेंद्र सिंह नागर ठीक एक साल पहले समाजवादी पार्टी में दो बड़ी जिम्मेदारियां छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा में आने के लिए उन्होंने सपा में राष्ट्रीय महासचिव का पद छोड़ा था। राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दिया था। भाजपा ने उन्हें सबसे पहले वापस राज्यसभा भेजा और उसके बाद से लगातार उन्हें तवज्जो दी गई है। 

मसलन, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें सदस्यता दी। अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने उनसे मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुरेंद्र नागर की बेटी की शादी में शरीक हुए। सुरेंद्र नागर ने 2 अगस्त 2019 को समाजवादी पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। 10 अगस्त 2019 की भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। वह 22 सितम्बर 2019 को भाजपा के टिकट पर निर्विरोध जीतकर एक बार फिर राज्यसभा पहुंच गए।

27 जुलाई 2020 को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सुरेंद्र सिंह नागर को राज्यसभा का वाइस चेयरपर्सन नियुक्त किया। वेंकैया नायडू ने बतौर राज्यसभा चेयरमैन संविधान में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए छह सांसदों को वॉइस चेयरपर्सन नियुक्त किया था। यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। किसी भी सदन के सदस्य के लिए बड़े सम्मान की बात होती है। इससे पहले 28 अक्टूबर 2019 को राज्यसभा की सबऑर्डिनेट लेजिस्लेशन कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया था।

गौतमबुद्ध नगर के कोटे से हुई नियुक्ति

अब शनिवार को सुरेंद्र सिंह नागर को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सुरेंद्र सिंह नागर को गौतमबुद्ध नगर जिले के कोटे से यह नियुक्ति दी गई है। इसके पीछे के कई मायने हैं। दरअसल, पश्चिम उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा गुर्जर बिरादरी के मतदाता गौतमबुद्ध नगर जिले में हैं। सुरेंद्र सिंह नागर गुर्जर समाज से ताल्लुक रखते हैं। यही वजह थी कि समाजवादी पार्टी ने भी उन्हें राष्ट्रीय महासचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। 

सुरेंद्र सिंह ने अशोक कटारिया और नवाब सिंह की जगह ली

भारतीय जनता पार्टी की निवर्तमान कार्यकारिणी में गुर्जर समाज के दो प्रतिनिधि थे। प्रदेश महामंत्री अशोक कटारिया और उपाध्यक्ष नवाब सिंह नागर गुर्जर हैं। राज्य सरकार में गुर्जर समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए अशोक कटारिया को पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में योगी आदित्यनाथ ने बतौर परिवहन राज्यमंत्री शामिल किया। नवाब सिंह नागर को भी दर्जा प्राप्त मंत्री बनाते हुए उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया है। लिहाजा, दोनों लोगों को इस बार संगठन में समायोजित नहीं किया गया है। बिरादरी को प्रतिनिधित्व देने के लिए सुरेंद्र सिंह नागर को बतौर उपाध्यक्ष शामिल किया गया है।

यूपी के साथ-साथ बाहरी राज्यों में भी सुरेंद्र सिंह नागर का प्रभाव

सुरेंद्र सिंह नागर के रूप में भारतीय जनता पार्टी को एक कद्दावर गुर्जर नेता मिल गए हैं। सुरेंद्र सिंह नागर न केवल पश्चिम उत्तर प्रदेश में बड़ी पकड़ रखते हैं बल्कि राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड के गुर्जर समाज में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है। भारत जनता पार्टी सुरेंद्र सिंह नागर का इन राज्यों में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के दौरान अच्छा इस्तेमाल कर सकती है।

अब कांग्रेस, सपा और बसपा पर भारी पड़ेगी भाजपा

अगर पिछले कुछ वर्षों के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीतिक व्यवस्था पर ध्यान दें तो कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गुर्जर समाज के नेताओं को खासी तरजीह दी है। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के पास गुर्जर समाज से राष्ट्रीय स्तर का कोई बड़ा चेहरा नहीं था। सुरेंद्र सिंह नागर के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने सपा बसपा और कांग्रेस के मुकाबले एक मजबूत नेता खड़ा कर लिया है। सुरेंद्र सिंह नागर आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर से आगे बढ़कर भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में दिखाई दें तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व लगातार सुरेंद्र सिंह नागर को खासी तवज्जो दे रहा है।

ओबीसी में मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहती है भाजपा

भारतीय जनता पार्टी के बारे में अच्छी जानकारी रखने वाले प्रोफेसर केके शर्मा का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी को ब्राह्मण वैश्य और ठाकुरों की पार्टी माना जाता रहा है। पहली बार व्यापक रूप से भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व ने अन्य पिछड़ा वर्ग को पार्टी के साथ जोड़ा है। जिसके बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यही वजह है कि न केवल मजबूती के साथ पार्टी केंद्र में बैठी हुई है, बल्कि अधिकांश राज्य सरकारों में भारतीय जनता पार्टी पहुंच चुकी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में गुर्जर बिरादरी अच्छी खासी संख्या में है। ऐसे में सुरेंद्र सिंह नागर के कद को बढ़ाकर भाजपा बड़ा फायदा उठा सकती है।

प्रोफेसर केके शर्मा आगे कहते हैं कि सुरेंद्र सिंह नागर केवल 55 साल के हैं। इस उम्र में वह दो बार विधान परिषद के सदस्य, एक बार लोकसभा के सदस्य और अब दूसरी बार राज्यसभा के सदस्य हैं। करीब 25 वर्षों का उन्हें राजनीतिक अनुभव है। उनका यह प्रोफाइल किसी अनुभवी और कामयाब नेता से कम नहीं है। लोकसभा और राज्यसभा में तीन कार्यकाल राष्ट्रीय स्तर का नेता बनने के लिए पर्याप्त माने जाते हैं। निस्संदेह भारतीय जनता पार्टी ने सुरेंद्र सिंह नागर को यह जिम्मेदारी सौंपकर विपक्षी दलों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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