क्या राहुल गांधी हाथरस जा पाएंगे, नहीं तो फिर क्या करेंगे राहुल, पढ़िए

क्या राहुल गांधी हाथरस जा पाएंगे, नहीं तो फिर क्या करेंगे राहुल, पढ़िए

Tricity Today | Rahul Gandhi (File Photo)

हाथरस कांड के पीड़ित परिवार से मिलने के लिए गुरुवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी नोएडा पहुंच गए थे। दोनों कांग्रेसियों के साथ हाथरस जाना चाहते थे। नोएडा में पहला अवरोध तो कांग्रेसियों ने बेहद आसानी से पार कर लिया था, लेकिन ग्रेटर नोएडा से आगे नहीं बढ़ पाए। अब एक बार फिर शनिवार की सुबह कांग्रेस ने ऐलान किया है कि राहुल गांधी हाथरस जाएंगे। हालांकि, राहुल गुरुवार को ही यह बात सार्वजनिक रूप से कह चुके थे कि उन्हें हाथरस के पीड़ित परिवार से कोई मिलने से नहीं रोक पाएगा। अब एक बार फिर गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने राहुल गांधी और कांग्रेसियों को रोकने के लिए नोएडा में मजबूत मोर्चाबंदी कर दी है। अब सवाल उठता है कि आखिर राहुल गांधी क्या करना चाहते हैं? आइए हम आपको बताते हैं कि कांग्रेस की रणनीति क्या है?

अब से थोड़ी देर बाद राहुल गांधी पूरे दलबल के साथ डीएनडी पहुंचेंगे। राहुल गांधी के साथ हजारों की संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के पहुंचने की उम्मीद है। लिहाजा, डीएनडी पर भीड़ को थामने के लिए भरपूर इंतजाम किए गए हैं। अगर राहुल गांधी को डीएनडी से आगे गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने नहीं बढ़ने दिया तो राहुल गांधी डीएनडी पर ही धरना देकर बैठ सकते हैं। जानकारी मिल रही है कि इस धरने के लिए कांग्रेस ने पूरा बंदोबस्त कर लिया है। पूरे दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों से हजारों की संख्या में कांग्रेसी पिछले 24 घंटों में नोएडा और आसपास के इलाकों में आ चुके हैं।

इसके बाद गेंद उत्तर प्रदेश सरकार और गौतमबुद्ध नगर पुलिस के पाले में आ जाएगी।
राहुल गांधी दो ही सूरत में धरने से उठेंगे। पहला विकल्प यह है कि लंबी जद्दोजहद के बाद राहुल गांधी को तीन-चार लोगों के साथ हाथरस जाने की इजाजत दे दी जाए। राहुल गांधी और उनके साथ तीन-चार सांसद पुलिस के साथ हाथरस जाएं और पीड़ित परिवार से मुलाकात करके वापस लौट आएं। दूसरा विकल्प यह है कि राहुल गांधी को गौतमबुद्ध नगर पुलिस गिरफ्तार करके जेल भेज दे। राहुल गांधी और उनके 203 कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ गुरुवार को ही ग्रेटर नोएडा में दो एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। जिनके आधार पर उनकी गिरफ्तारी की जा सकती है। हालांकि इतना बड़ा जोखिम उत्तर प्रदेश सरकार लेना नहीं चाहेगी।

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