BIG NEWS: यमुना प्राधिकरण ने किसानों को चार बड़ी सौगात दीं, पढ़िए पूरी जानकारी

Updated Feb 29, 2020 18:52:16 IST | Rakesh Tyagi

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अपने क्षेत्र के किसानों को चार सौगात दी हैं। इनसे जुड़े प्रस्ताव सोमवार को विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में रखे गए। जिन्हें बोर्ड ने मंजूरी दे दी हैं। किसानों की लीज बैक शुरू करने, शिफ्टिंग के मामले निपटाने और आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में आरक्षण दिया जाएगा।

Photo Credit:  Tricity Today
YEIDA Office
Key Highlights
किसानों से जुड़े प्रस्ताव शनिवार को विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में पेश किए गए
किसानों को आबादी के भूखंडों का विकास करवाने के लिए पैसे का विकल्प दिया
लीज बैक का काम जल्द शुरू होगा, लैंड शिफ्टिंग का प्रस्ताव पास, अब नीति का इंतजार

यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अपने क्षेत्र के किसानों को चार सौगात दी हैं। इनसे जुड़े प्रस्ताव सोमवार को विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में रखे गए। जिन्हें बोर्ड ने मंजूरी दे दी हैं। किसानों की लीज बैक शुरू करने, शिफ्टिंग के मामले निपटाने और आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में आरक्षण दिया जाएगा।

1.    प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में फैसला लिया गया कि प्राधिकरण क्षेत्र के 75 मामलों की लीज बैक की जाएगी। यह जमीन विकास प्राधिकरण ने अधिग्रहीत कर ली थी। लेकिन किसानों की आपत्तियों को जायजा पाते हुए इस जमीन को अधिग्रहण से मुक्त किया जाएगा। क्योंकि प्राधिकरण जमीन ले चुका है तो वापस देने के लिए किसानों के नाम पर वापस लीज करेगा। इसके लिए किसानों को केवल 100 रुपये का स्टांप शुल्क चुकाना होगा।
2.    इसके अलावा शिफ्टिंग के 88 मामले लंबित पड़े हैं। इससे भी किसानों को बड़ा फायदा होगा। किसानों के घर, घेर या कोई दूसरी संपत्ति प्राधिकरण के प्रोजेक्ट में आ जाती हैं। उन्हें हटाना प्राधिकरण के लिए अपरिहार्य होता है। ऐसे में प्राधिकरण संपत्ति के बदले मुआवजा और जमीन देता है। प्राधिकरण के अफसरों ने बताया कि शासन से जल्द ही शिफ्टिंग की पॉलिसी आएगी। पॉलिसी आते ही इन मामलों को निपटा दिया जाएगा।
3.    इसके अलावा प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले किसानों (एयरपोर्ट प्रभावित किसान भी) को आवासीय व व्यावसायिक भूखंडों की योजना में 17.5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। व्यावसायिक में दुकान और क्योस्क भी शामिल हैं।
4.    प्राधिकरण ने किसानों के लिए एक और फैसला लिया है। दरअसल, किसानों को आबादी के 7 प्रतिशत भूखंड दिए जाते हैं। भूखंड देते समय किसानों से विकास शुल्क लिया जाता है। लेकिन, किसान पैसा देने में असमर्थता जताते हैं। अब प्राधिकरण ने एक विकल्क किसानों को दिया है। अब किसान विकास शुल्क के बराबर अपना भूखंड का क्षेत्रफल कम करवा सकेंगे। इससे बिना विकास शुल्क चुकाए भूखंड मिल जाएगा।

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