सीएजी रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक्शन से जागा प्राधिकरण, अब बिल्डरों के लिए कोई एक अफसर नहीं लेगा फैसले

Noida Authority : सीएजी रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक्शन से जागा प्राधिकरण, अब बिल्डरों के लिए कोई एक अफसर नहीं लेगा फैसले

सीएजी रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक्शन से जागा प्राधिकरण, अब बिल्डरों के लिए कोई एक अफसर नहीं लेगा फैसले

Tricity Today | नोएडा अथॉरिटी

सीएजी रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक्शन से जागा प्राधिकरण, अब बिल्डरों के लिए कोई एक अफसर नहीं लेगा फैसले Noida News : सीएजी की भारी भरकम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के एक्शन ने नोएडा अथॉरिटी की नींद तोड़ी है। अब शहर के बिल्डरों को फायदे देने और इनसे जुड़े फैसले कोई एक अफसर नहीं ले पाएगा। नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) ने बिल्डरों को कंपलीशन सर्टिफिकेट, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट और परचेजेबल एफएआर देने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया है। अब बिल्डरों की परियोजनाओं को दिए जाने वाले अधिभोग प्रमाण पत्र और पर्चेबल एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) देने के लिए एक कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला होगा।

प्राधिकरण ने कमेटी में शामिल किए ये अफसर
नोएडा अथॉरिटी से मिली जानकारी के मुताबिक बिल्डरों के आवेदनों पर फैसला लेने के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उसमें बड़े और जिम्मेदार अफसरों को शामिल किया गया है। इस कमेटी में प्लानिंग विभाग के महाप्रबंधक, ग्रुप हाउसिंग डिपार्टमेंट के विशेष कार्याधिकारी, इंजीनियरिंग और जल विभाग के महाप्रबंधक व वित्त विभाग के मुखिया फाइनेंस कंट्रोलर को शामिल किया गया है। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी को सौंपेगी। इसके बाद मंजूरी देने का अधिकार मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पास होगा। आपको बता दें कि महालेखा परीक्षक ने नोएडा अथॉरिटी का ऑडिट किया। जिसमें बिल्डरों को फायदा पहुंचाने वाले फैसलों पर आपत्ति जताई है। इस व्यवस्था में बदलाव की सिफारिश सीएजी ने की।

अथॉरिटी की नई कमेटी ने काम शुरू किया
नोएडा प्राधिकरण की इस नई कमेटी ने काम करना शुरू कर दिया है। अफसरों का मानना है कि इस व्यवस्था से कई स्तर पर जांच होगी। इससे गड़बड़ी होने की संभावना नहीं होगी। इसके साथ अधिकारियों की सीधे जिम्मेदारी तय होगी। अभी तक अधिभोग प्रमाण पत्र जारी करने की फाइल प्लानिंग विभाग से सीधे एसीईओ और सीईओ के पास पहुंचती थी। दरअसल, बीते सालों में बिल्डर परियोजनाओं के लिए जारी हुए अधिभोग प्रमाण पत्र और पर्चेबल एफएआर की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। बीते समय में सेक्टर-93ए सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट परिसर में बने ट्विन टावर का मामला ताजा है। यहां नियमों की अनदेखी की गई। परियोजना के लिए नक्शों में बदलाव करके अधिभोग प्रमाण पत्र और पर्चेबल एफएआर जारी कर दिया गया। अवैध रूप से बने इन ट्विन टावरों को ध्वस्त करने का आदेश उच्चतम न्यायालय सुना चुका है। इसके अलावा अन्य बिल्डर परियोजनाओं को लेकर कुछ महीने पहले सामने आई सीएजी रिपोर्ट में काफी सख्त आपत्ति उठाई गई हैं।

सारे विभागों की दखल होगी तो बिल्डर सूचनाएं नहीं छिपा पाएगा
अधिकारियों ने बताया कि इस कमेटी में जल और इंजीनियरिंग विभागों के जीएम के शामिल होने से परियोजना में एसटीपी, सीवर लाइन, पानी कनेक्शन और निर्माण पूरा होने की रिपोर्ट आ जाती है। फाइनेंस कंट्रोलर अपने विभाग से पड़ताल करके मंजूरी देगा कि प्राधिकरण का बिल्डर पर कोई बकाया तो नहीं है। इसी तरह प्लानिंग विभाग मौके पर कंस्ट्रक्शन देखेगा और पास किए गए नक्शों का मिलान करेगा। सुपरटेक समेत शहर के कई बिल्डरों ने निर्धारित एफएआर से ज्यादा निर्माण किया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पिछले कुछ महीनों के दौरान अथॉरिटी ने ऐसे निर्माण तोड़े हैं।

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