सीबीआरआई की टीम ने सुपरटेक एमेरॉल्ड ट्विन टावर का किया मुआयना, एक हफ्ते में सौंपेगी ध्वस्तीकरण का प्लान

बड़ी खबर : सीबीआरआई की टीम ने सुपरटेक एमेरॉल्ड ट्विन टावर का किया मुआयना, एक हफ्ते में सौंपेगी ध्वस्तीकरण का प्लान

सीबीआरआई की टीम ने सुपरटेक एमेरॉल्ड ट्विन टावर का किया मुआयना, एक हफ्ते में सौंपेगी ध्वस्तीकरण का प्लान

Tricity Today | Supertech Twin Tower

सीबीआरआई की टीम ने सुपरटेक एमेरॉल्ड ट्विन टावर का किया मुआयना, एक हफ्ते में सौंपेगी ध्वस्तीकरण का प्लान Noida News : नोएडा के सेक्टर-93A में स्थित सुपरटेक एमेरॉल्ड ट्विन टॉवर्स को ध्वस्त करने की कवायद शुरू हो गई है। 1 दिन पहले सोमवार को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टिट्यूट (CBRI) की टीम ने मौके पर जाकर दोनों टावरों का मुआयना किया। बाद में टीम ने प्राधिकरण (Noida Authority) के अफसरों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की और इन दोनों टावरों के आसपास अन्य रिहायशी इमारतों के स्ट्रक्चर, फाउंडेशन और सरियों के डिजाइन से संबंधित प्लान का ब्यौरा मांगा। 

इन सब को स्टडी करने के बाद सीबीआरआई एक हफ्ते में टावरों को गिराने की कार्ययोजना बनाकर प्राधिकरण को सौंपेगी। टीम अपने साथ मैप, फोटोग्राफ्स और कुछ जरूरी साक्ष्य लेकर गई है। बीते सोमवार की सुबह करीब 10:15 बजे सीबीआरआई के निदेशक एस गोपालकृष्णन और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी सुबीर सिंह ट्विन टॉवर्स का मुआयना करने पहुंचे थे। उनके साथ नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल और नियोजन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। टीम ने ट्विन टॉवर्स और अन्य टावरों के बीच की दूरी का जायजा लिया। इन को ध्वस्त करने में आने वाले तकनीकी पक्षों को भी नोट किया। इन सब को ध्यान में रखकर ही इन्हें गिराने की योजना बनाई जाएगी।

आसपास के टॉवर का मांगा रिकॉर्ड
इससे पहले टीम ने प्राधिकरण के अफसरों से ट्विन टॉवर्स के साथ-साथ इसके आसपास की सभी बिल्डिंग का डिजाइन, बेस स्ट्रक्टर और फाउंडेशन प्लान मांगा है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि आसपास की इमारतें कितनी मजबूत हैं। बड़ी बात यह है कि प्राधिकरण के पास भी इन इमारतों की इस तरह की जानकारी नहीं है। इसके लिए अफसरों ने बिल्डर को खत लिखकर जानकारी देने को कहा है। अगले दो-तीन दिन में अथॉरिटी यह जानकारी सीबीआरआई को देगी। उसके बाद दो-तीन दिन में कार्ययोजना बनेगी। माना जा रहा है कि 1 हफ्ते में योजना तैयार हो जाएगी। 

विदेशी एजेंसी की मदद ली जाएगी
जानकारों का कहना है कि सीबीआरआई टावरों को ध्वस्त करने में दक्ष एजेंसी नहीं है। इसलिए विदेशी एक्सपर्ट कंपनियों की मदद ली जा सकती है। इसमें अमेरिका, यूरोप के कुछ देश, अफ्रिका और अन्य देशों की कंपनियों को मौका दिया जा सकता है। हालांकि सीबीआरआई ने आरडब्लूए को आश्वस्त करते हुए कहा है कि दोनों टावरों को गिराने का काम सुरक्षित ढंग से किया जाएगा। निवासियों और अन्य टावरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इन दोनों टावर को ध्वस्त करने में 1-2 करोड़ नहीं, बल्कि 6-7 करोड़ खर्च आने की संभावना है। एक्सपर्ट का कहना है कि गिराने के बाद मलबे को सेक्टर-80 में स्थित कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन प्लांट में ले जाकर री-साइकल किया जाएगा। हालांकि इस दौरान यह ध्यान रखा जाएगा कि आसपास के क्षेत्र में ज्यादा प्रदूषण ना हो।

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