Crime Story : मेडिकल स्टूडेंट की अपहरण से लेकर बरामदगी तक की पूरी कहानी, हनीट्रैप से फंसाया, इंजेक्शन लगाकर रखा बेहोश और...

मेडिकल स्टूडेंट की अपहरण से लेकर बरामदगी तक की पूरी कहानी, हनीट्रैप से फंसाया, इंजेक्शन लगाकर रखा बेहोश और...

Google Image | निखिल हलदर

नोएडा एसटीएफ ने एनकाउंटर के बाद एक बीएएमएस के छात्र को अपहरणकर्ताओ के चंगुल से सकुशल बरामद किया है। अपहरण की वारदात को 18 जनवरी को उत्तर प्रदेश के गोंडा में अंजाम दिया गया था। तीन दिनों बाद गोंडा और नोएडा पुलिस ने एक एनकाउंटर के बाद 3 आरोपियों को यमुना एक्सप्रेसवे से गिरफ्तार करके उनके कब्जे से पीड़ित बीएएमएस छात्र को बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक एक महिला बीएएमएस डॉक्टर अभी भी फरार है 

दरअसल, उत्तर प्रदेश के बहराइच के रहने वाले निखिल हलदर को 18 जनवरी की शाम 4 बजे एक फ़ोन आया। निखिल उस वक़्त अपने मेडिकल स्टोर में बैठे थे, फोन करने वाले ने गालियां देते हुए उनसे कहा कि उनका बेटा गौरव उनके कब्जे में है, अगर वो अपने बेटे को सही सलामत देखना चाहते है तो तुरंत 70 लाख रुपये की व्यवस्था कर ले। निखिल हलदर को एक बार तो यकीन तक नही हुआ, लेकिन उन्होंने कन्फर्म करने के लिए अपने बेटे के हॉस्टल में फ़ोन किया। जहां से उन्हें खबर मिली कि उनका बेटा हॉस्टल में नही है। इसके बाद निखिल घबरा गए और वो तुरंत पुलिस के पास पहुंचे और उन्हें बेटे के अपहरण और फिरौती के लिए आये फ़ोन की जानकारी दी।

फोन पर बात नहीं की, रिकॉर्डिंग भेजी
निखिल हलदर का कहना है कि जब उन्होंने अपहरणकर्ताओं से कहा कि वो उनके बेटे से फ़ोन पर बात करा दें, तो उन्होंने बात कराने के बजाय फोन पर रिकॉर्डिंग सुना दी, जिसमें उनका बेटा घबराया था और कह रहा था कि पापा आप इनका पैसा दे दो, ये लोग मारते हैं। इंजेक्शन लगाते हैं। इसके बाद आरोपियों ने कहा कि अगर पैसे नहीं मिले तो वो उनके बेटे के टुकड़े-टुकड़े कर देंगे

हाइवे-एक्सप्रेसवे की फुटेज काम आईं
इस बारे में गोंडा के एसपी शैलेन्द्र पांडे ने कहा, "जांच में जुटी पुलिस को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर कब और कैसे इस अपहरण को अंजाम दिया गया। आरोपियों का न तो कोई सीसीटीवी पुलिस को मिल रहा था और न ही कोई चश्मदीद। इसके बाद पुलिस ने जब पीड़ित के मोबाइल फ़ोन को खंगाला और उसका रिकॉर्ड चेक किया तो पुलिस को शक उस नंबर पर हुआ, जिससे आखिरी बार पीड़ित की बात हुई थी। पुलिस को जांच में ये भी पता लगा कि उस नंबर से पीड़ित ने पहली बार 15 जनवरी को ही बात की थी।" शैलेन्द्र पांडे ने कहा, "इसके बाद पुलिस ने तमाम हाइवे के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। तब पुलिस की टीम को पता लगा कि आरोपी दिल्ली के नवादा इलाके में छिपे हुए हैं। गोंडा पुलिस की एक टीम फौरन दिल्ली के नवादा इलाके में पहुच गई, लेकिन पुलिस को वहां कोई सुराग नही मिला। दो दिनों तक पुलिस की टीम दिल्ली और नोएडा के अलग-अलग इलाकों के भटकती रही। तभी 21 जनवरी की शाम एक बार फिर से निखिल हलदर के पास अपहरणकर्ताओं का फ़ोन आया।"

बदमाशों ने फिरौती की रकम बढ़ा दी
पिता के मुताबिक इस बार अपहरणकर्ता बेहद गुस्से में था, उसने फ़ोन उठाते ही गाली देना शुरू कर दिया। फिरौती की रकम 70 लाख से बढ़ाकर 80 लाख कर दी। पुलिस को बस यही मौका चाहिए था, पुलिस लगातार ट्रैक करने में लगी थी। उधर पिता घबरा गए थे और उन्होंने किसी भी तरह से अपहरणकर्ताओं को पैसा देने का मन बना लिया था। निखिल ने बताया कि उधर अपहरणकर्ताओं को जब लगा कि अब उन्हें पैसा मिल सकता है तो वो मुझे कार में लेकर लखनऊ की तरफ चल पड़े। पुलिस को इनके मूवमेंट की जानकारी मिल गई। जिसके बाद पुलिस ने तुरंत नोएडा एसटीएफ से संपर्क किया और दोनों की संयुक्त टीम ने आरोपियों को यमुना एक्सप्रेसवे के पास घेर लिया।"

इस बारे में पुलिस का कहना है कि खुद को पुलिस से घिरा देखने के बाद भी आरोपी घबराए नहीं और उन्होंने सरेंडर नहीं किया, बल्कि पुलिस टीम पर गोली चलाते हुए भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने मौके से ही तीन आरोपियों को दबोच लिया। और कार से ही बेहोशी की हालत में निखिल को भी बरामद कर लिया।

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