नोएडा के कपड़ा उद्योग पर कोरोना की मार, कम्पनियां बन्द हुईं और लाखों के रोजगार गए

धक्का : नोएडा के कपड़ा उद्योग पर कोरोना की मार, कम्पनियां बन्द हुईं और लाखों के रोजगार गए

नोएडा के कपड़ा उद्योग पर कोरोना की मार, कम्पनियां बन्द हुईं और लाखों के रोजगार गए

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नोएडा के कपड़ा उद्योग पर कोरोना की मार, कम्पनियां बन्द हुईं और लाखों के रोजगार गए कोरोना की दूसरी लहर में गौतमबुद्ध नगर जनपद में लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं। जिले में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान करीब दो हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाई ठप हो गई हैं। जिसकी वजह से लाखों लोग बेरोजगार होकर अपने घर बैठ गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने के दौरान गौतमबुद्ध नगर में 2,500 करोड़ रुपए से ज्यादा का परिधान उद्योग में नुकसान हुआ है। जिसके बाद नोएडा अप्रैल एक्सपोर्ट कलस्टर (एनएईसी) ने सरकार से सूती कपड़े, कपास और अन्य कपड़ों को निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। नोएडा के अलग-अलग उद्यमी संगठनों की रिपोर्ट यह खुलासा कर रही हैं।

एनएईसी के बताया की परिधान उद्योग वर्तमान में सूती धागे और कपड़ों की कमी का सामना कर रहा है। कपास की कीमत में 30 से 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने से देश औद्योगिक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे होता जा रहा है। बता दें कि परिधान उद्योग में प्रयोग होने वाला 70 प्रतिशत कच्चा माल कपास है। चीन और बांग्लादेश के अलावा थाईलैंड जैसे देशों को 6 माह के लिए समझौते के साथ निर्यात किया जा रहा है। जबकि 1.30 करोड़ लोगों को रोजगार और 130 लाख करोड़ रुपए का निर्यात करने वाले देश के उद्योगों को कच्चे माल की अनियंत्रित कीमत का सामना करना पड़ रहा है। जिसका सीधा असर विदेश से होने वाले निर्यात पर पड़ा है। उत्पादक लागत बढ़ने से विदेश से आने वाले ऑर्डर अब चीन और बांग्लादेश को मिलने लगे हैं। यही हालत बनी रही तो अगले 2 सालों में हजारों इकाइयों पर ताले लग जाएंगे। 

एनएईसी के मुताबिक अगर केंद्र सरकार ने कपास के निर्यात को प्रतिबंधित नहीं किया तो आने वाले 2 सालों में नोएडा में दो हजार से ज्यादा इकाइयों में काम करने वाले 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो सकते हैं। इसलिए सरकार को कपास और सूती धागे के निर्यात पर तुरंत पाबंदी लगानी चाहिए।

कपास के निर्यात में 56 फीसदी बढ़ोतरी हुई
एनईसी के चेयरमैन ललित ठुकराल का कहना है कि जिले में 2000 उद्योग सालाना 25 हजार करोड़ रुपए के परिधानों का निर्यात करते हैं। 6 महीने के कारोबार से अंदाजा लगाया जाए तो करीब 60 फीसदी तक बोझ बढ़ा है, जो करीब 2500 करोड़ रुपए बैठते हैं। इस संकट के लिए कपास और सूती धागे का अनियंत्रित दिव्या जिम्मेदार है। 6 महीने में कपास के निर्यात में 56 फीसदी जबकि परिधान निर्यात में महज 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

केन्द्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो लाखों लोग फिर होंगे बेरोजगार
आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजीव बंसल का कहना है कि अब तक देश-विदेश में लॉकडाउन से कारोबार प्रभावित था। फ़िलहाल कपास के बेहिसाब निर्यात से नई समस्या सामने आने लगी हैं। नए आर्डर नहीं मिलने के कारण लाखों रोजगार खत्म होने की संभावना लग रही है। सरकार ने घरेलू उद्योगों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया है। आगामी दिनों में इसका बुरा असर पड़ेगा, अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो नोएडा में एक बार फिर 10 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो जाएंगे। सरकार को तत्काल निर्यात पर पाबंदी लगानी होगी।

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