जिले में जलभराव पर डीएम सुहास एलवाई सख्त, इन बिंदुओं की जांच करेगी समिति

गौतमबुद्ध नगर: जिले में जलभराव पर डीएम सुहास एलवाई सख्त, इन बिंदुओं की जांच करेगी समिति

जिले में जलभराव पर डीएम सुहास एलवाई सख्त, इन बिंदुओं की जांच करेगी समिति

Google Image | जलमग्न हुआ जिला कलेक्ट्रेट

जिले में जलभराव पर डीएम सुहास एलवाई सख्त, इन बिंदुओं की जांच करेगी समिति
  • सभी कंस्ट्रक्शन साइट पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है
  • टीम रेजिडेंशियल सोसाइटीज और कमर्शियल कंपलेक्स में जाकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच करेंगी
  • रिपोर्ट पर अगले महीने समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी
Gautam Buddh Nagar: बारिश की वजह से गौतमबुद्ध नगर के कई इलाकों में जलभराव की समस्या बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। सूरजपुर के आसपास और कलेक्ट्रेट परिसर में लबालब भरे पानी को लेकर शहरवासी नाराज हैं। अब इसका संज्ञान जिला पर्यावरण समिति (District Environment Committee - DEC) ने भी लिया है। डिस्ट्रिक्ट इन्वायरमेंट कमेटी जनपद की इस समस्या की जांच करेगी। यह टीम रेजिडेंशियल सोसाइटीज और कमर्शियल कंपलेक्स में जाकर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जांच करेंगी। इसके बाद अपनी रिपोर्ट डीईसी को सौंपेगी।

दरअसल कानूनों के मुताबिक नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी के दायरे में आने वाले सभी कंस्ट्रक्शन साइट पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जरूरी है। यहां तक कि शहर के पार्कों में भी इन्हें लगाया गया है। लेकिन अधिकारियों ने कहा कि जिले भर में ऐसे कितने संयंत्र चालू हैं, इसका कोई आकलन नहीं किया गया है। डीईसी के सदस्य और पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड ने कहा, “भूजल को रिचार्ज करने के लिए वर्षा जल संचयन प्रणाली आवश्यक है। नोएडा का भूजल स्तर पहले से ही कम है और यह हर साल कम हो रहा है। इसलिए वर्षा जल संचयन प्रणाली को बेहतर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। अफसरों का कहना है कि सभी स्थानीय अधिकारियों को वर्षा जल संचयन प्रणाली की स्थिति पर रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है।


जिलाधिकारी और समिति के अध्यक्ष सुहास एलवाई ने कहा, “अधिकारी हमें सिस्टम पर एक अपडेट देंगे। वे बताएंगे कि ये कैसे भूजल को रिचार्ज करने में मदद कर सकते हैं। रिपोर्ट पर अगले महीने समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी। यह समिति जिले भर में अवैध आरओ वाटर प्लांट पर भी रिपोर्ट तैयार करेगी। इससे पहले प्रशासन को पिछले महीने ऐसे दो प्लांट बंद होने की शिकायत मिली थी। विक्रांत तोंगड ने कहा, “जिले में सैकड़ों छोटे और बड़े आरओ प्लांट हैं और वे भूजल का उपयोग कर रहे हैं। यदि स्थानीय प्राधिकरण की जल आपूर्ति प्रणाली नियमित हो जाती है तो उनमें से अधिकतर की आवश्यकता नहीं होगी। हम प्रशासन को ऐसे पौधों का पता लगाने में मदद करेंगे।”

डीईसी ने जिले में जल निकायों, आर्द्रभूमि और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्रों और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली के बारे में निवासियों की शिकायतों की एक सूची भी मांगी है। अधिकारियों ने बताया कि अगले साल के लिए पर्यावरण योजना तैयार की गई है।

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