विद्युत निगम ने प्रतीक विस्टीरिया को 28 लाख जमा करने का भेजा नोटिस, बताई ये वजह

बड़ी खबर : विद्युत निगम ने प्रतीक विस्टीरिया को 28 लाख जमा करने का भेजा नोटिस, बताई ये वजह

विद्युत निगम ने प्रतीक विस्टीरिया को 28 लाख जमा करने का भेजा नोटिस, बताई ये वजह

Google Image | पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने प्रतीक विस्टीरिया सोसायटी को सिक्योरिटी मनी जमा करने का नोटिस भेजा है

विद्युत निगम ने प्रतीक विस्टीरिया को 28 लाख जमा करने का भेजा नोटिस, बताई ये वजह Noida News : पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने प्रतीक विस्टीरिया सोसायटी को 28 लाख का अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी जमा करने का नोटिस भेजा है। विद्युत निगम ने कहा है कि अगले 30 दिन में इस राशि का भुगतान करना आवश्यक है। अन्यथा निगम कनेक्शन काटने का फैसला ले सकता है। विभाग के इस नोटिस के बाद निवासियों में रोष है। उनका कहना है कि अचानक 28 लाख रुपए की अतिरिक्त राशि कहां से जुटाई जाएगी। जब पहले से लाखों रुपये सेक्योरिटी के नाम पर जमा हैं, तब अतिरिक्त भार क्यों लादा जा रहा है।

विद्युत निगम ने सेक्टर-77 में स्थित प्रतीक रियल्टर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को यह नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि उपभोक्ता के 45 दिनों के औसत खपत के आधार पर सिक्योरिटी डिपॉजिट तय किया जाता है। प्रतीक विस्टीरिया सोसाइटी के पिछले साल के खपत के अनुसार 2826347 रुपए का अतिरिक्त सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना पड़ेगा। हालांकि सोसाइटी ने पहले ही 42 लाख का सिक्योरिटी डिपॉजिट विद्युत निगम को किया है। 

नोटिस में विद्युत निगम ने कहा है कि 30 दिन में इस राशि की भुगतान की जाए। अगर तय तिथि में भुगतान नहीं किया गया, तो निगम सोसाइटी का कनेक्शन काटने पर विचार करेगा। विद्युत निगम के इस नोटिस के बाद से सोसाइटी के निवासी गुस्से में है। उनका कहना है कि जब 42 लाख रुपये की सिक्योरिटी पहले से ही जमा है, तो अब 30 दिन के अंदर यह 28 लाख रुपये का अतिरिक्त भार निवासियों पर क्यों डाला जा रहा है। 

लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बाद अभी धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं। ऐसे में अचानक इतनी बड़ी धनराशि का बोझ लोगों पर डालने का कोई मतलब नहीं है। साथ ही निवासियों का कहना है कि बिजली विभाग के पास पहले से जो लाखों रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट है, अब तक उस पर कोई इंटरेस्ट नहीं दिया गया। पिछले 7 साल का 6.45 पर्सेंट के हिसाब से ब्याज विभाग पर बकाया है। लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं होती।

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