मंदी से जूझ रही अपैरल इंडस्ट्री, उद्यमियों ने कपास और सूती धागे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध की गुहार लगाई

गौतमबुद्ध नगर: मंदी से जूझ रही अपैरल इंडस्ट्री, उद्यमियों ने कपास और सूती धागे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध की गुहार लगाई

मंदी से जूझ रही अपैरल इंडस्ट्री, उद्यमियों ने कपास और सूती धागे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध की गुहार लगाई

Google Image | प्रतीकात्मक तस्वीर

मंदी से जूझ रही अपैरल इंडस्ट्री, उद्यमियों ने कपास और सूती धागे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध की गुहार लगाई
  • प्रेसीडेंट ललित ठुकराल ने भारत सरकार से कपास और सूती धागे के निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया
  • पिछले 6 महीनों में इससे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है
  • कपास और सूती धागे के निर्यात को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है
  • ऐसा कर के ही भारत के अपैरल कारोबार और निर्यात को संरक्षित और बढ़ावा देना है
पिछले करीब डेढ़ साल से कोरोना वायरस महामारी की मार झेल रहे कपड़ा उद्योग की स्थिति बदतर हो गई है। गौतमबुद्ध नगर में अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर ने इस कारोबार से जुड़े उद्योगों और उद्यमियों को बचाने और वैश्विक निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाने के लिए कपास और सूती धागे के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के प्रेसीडेंट ललित ठुकराल ने भारत सरकार से कपास और सूती धागे के निर्यात पर तत्काल प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। इनके निर्यात ने भारतीय परिधान उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है। खासकर पिछले 6 महीनों में इससे कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। 

इस बारे में ललित ठुकराल ने कहा, अपैरल इंडस्ट्री पहले से ही कोविड महामारी की वजह से भारी नुकसान से जूझ रहा था। लेकिन इनके निर्यात से इस कारोबार को दोहरी मार पड़ी है। सूती और सूती धागे के बड़े पैमाने पर निर्यात से इस उद्योग में महत्वपूर्ण कच्चे माल की कमी हो रही है। इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता पर बल देते हुए ललित ठुकराल ने कहा कि कपास और सूती धागे के निर्यात को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ऐसा कर के ही भारत के अपैरल कारोबार और निर्यात को संरक्षित और बढ़ावा देना है।

करोंड़ों लोगों को मिला रोजगार
उन्होंने कपास और सूती धागे को उपलब्ध कराने के लिए एक सिस्टम विकसित करने की भी मांग की। जिससे स्थानीय परिधान उद्यमियों को निर्यात होने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह उद्योग को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वैश्विक बाजार में जीवित रहने में सक्षम बनाएगा। उद्योग में कार्यरत श्रमिकों को पैसा उपलब्ध कराएगा और नकदी प्रवाह सुनिश्चित करेगा। कोरोना की इस महामारी के समय में इसकी बेहद जरूरत है। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री देश के सकल घरेलू उत्पाद में 2% का योगदान देता है। इन उद्योगों से करीब 105 मिलियन लोगों (45 मिलियन प्रत्यक्ष और 60 मिलियन अप्रत्यक्ष रूप से) को रोजगार प्रदान करता है। उनमें से 70 प्रतिशत महिलाएं, बड़ी संख्या में अशिक्षित और गांवों से रोजगार की तलाश में यहां पहुंचे लोग शामिल हैं।

12 बिलियन अमेरिकी डॉलर मिला
उन्होंने आगे कहा, अपैरल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री विदेशी मुद्रा आय में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अपैरल निर्यात के माध्यम से वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत को 12.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा मिली। यह उद्योग एमएसएमई के तहत संचालित है और इसमें 95% घरेलू पूंजी है। इसमें आयात का हिस्सा बेहद कम है। विशेष रूप से, देश में बनने वाली आरएमजी और परिधान प्राकृतिक, मानव निर्मित, सिंथेटिक फाइबर से बने होते हैं। प्राकृतिक रेशे कपास, रेशम और ऊन हैं। ठुकराल ने कहा कि परिधान में इस्तेमाल होने वाला 75% कच्चा माल कपास है। इसके उत्पादन से किसानों को सीधा लाभ मिलता है।

दूसरे देशों को मिल रहा लाभ
ठुकराल ने कहा कि टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री वर्तमान में सूती धागे और कपड़ों की कमी का सामना कर रहे हैं। इससे उत्पादन, रोजगार और निर्यात प्रभावित हो रहा है। पिछले 6 महीनों में कपास की कीमतों में 30% से 60% तक की भारी वृद्धि से उत्पादन की लागत भी बढ़ी है। इससे उद्योग के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना और भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने इस संकट के लिए कपास और सूती धागे के अनियंत्रित निर्यात को जिम्मेदार ठहराया। बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड और यहां तक कि चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को 6 महीने पहले हुए एग्रीमेंट के मुताबिक कीमत पर निर्यात किया जा रहा है। यूरोपीय देशों के साथ भारत के किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), वरीयता व्यापार समझौते (पीटीए) आदि की कमी ने स्थिति को जटिल बना दिया है। बांग्लादेश, वियतनाम, थाईलैंड आदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे समझौतों का लाभ लेते हैं।

कच्चे माल के निर्यात में 56 फीसदी की बढ़ोत्तरी
अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से हालात पहले से बदतर होते गए हैं। पिछले 6 महीने में भारतीय सूती और सूती धागे के निर्यात में 56 फीसदी की वृद्धि हुई है। जबकि कपड़ा निर्यात में 24 फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने आगे कहा, अगर इस कपास और सूती धागे के निर्यात को घरेलू बाजार की ओर मोड़ दिया जाता, तो भारतीय परिधान निर्यात कई गुना बढ़ जाता। रोजगार के ज्यादा अवसर मिलते। कच्चे माल का निर्यात निस्संदेह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मानिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और स्किल इन इंडिया के साथ सबका साथ-सबका विकास के मिशन के खिलाफ है।"


नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर के प्रेसीडेंट ललित ठुकराल

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