3700 केस, 55 वकीलों की फौज और करोड़ों खर्च, फिर भी सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट

नोएडा अथॉरिटी : 3700 केस, 55 वकीलों की फौज और करोड़ों खर्च, फिर भी सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट

3700 केस, 55 वकीलों की फौज और करोड़ों खर्च, फिर भी सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट

Google Image | CEO Ritu Maheshwari

3700 केस, 55 वकीलों की फौज और करोड़ों खर्च, फिर भी सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट Noida News : नोएडा प्राधिकरण से जुड़े हुए अलग-अलग अदालतों में करीब 3,700 केस चल रहे हैं। इन्हें संभालने के लिए अथॉरिटी ने 55 वकीलों की फौज खड़ी कर रखी है। इन पर सालाना करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद बड़े मामलों में प्राधिकरण को हार का सामना करना पड़ा है। इतना ही नहीं सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो रहे हैं। अथॉरिटी की सीईओ हाईकोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रही हैं। इससे न्यायपालिका और आम जनमानस की नजरों में नोएडा अथॉरिटी की छवि खराब हुई है।

एक ही दिन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में अथॉरिटी को लगे झटके
बीते शुक्रवार को दो मामलों में नोएडा प्राधिकरण की हार हुई है। पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में प्राधिकरण के खिलाफ दो बड़े फैसले सुनाए गए। हाईकोर्ट से नोएडा की सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद अब सभी केस की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। ऋतु महेश्वरी ने बाकायदा अफसरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी हैं। दरअसल, प्राधिकरण के विभागों में आपसी तालमेल नहीं है। जिसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अदालतों में चल रहे केसों में ठीक ढंग से पैरवी नहीं हो रही है।

एक के बाद मुकदमों में हो रही प्राधिकरण की फजीहत
उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में चल रहे दो अलग-अलग मामलों में बीते शुक्रवार को नोएडा प्राधिकरण को बड़ी फजीहत का सामना करना पड़ा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक मामले में नोएडा प्राधिकरण की सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था। सीईओ तय समय पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हो पाई थीं। वहीं उच्चतम न्यायालय में गलत तरीके से किए गए भूमि अधिग्रहण के दूसरे मामले में नोएडा प्राधिकरण को हार का सामना करना पड़ा है। अब नोएडा अथॉरिटी को मुआवजे के रूप में याची को 200 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान करना होगा। इससे पहले भी कई मामलों में नोएडा प्राधिकरण की फजीहत हो चुकी है।

सुपरटेक और यूनिटेक से जुड़े मामलों में छवि खराब हुई
सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट परिसर में बने ट्विन टावर मामले में नोएडा प्राधिकरण में भ्रष्टाचार को लेकर सख्त टिप्पणी की गई थी। तब प्राधिकरण के वकीलों ने ट्विन टावर का निर्माण पूरी तरह नियमों के तहत बताया था। उस मामले में नोएडा प्राधिकरण को काफी फजीहत का सामना करना पड़ा था। तब सीईओ ने लापरवाही बताते हुए वकील को नोटिस जारी किया था। इससे पहले यूनिटेक के सेक्टर-113 में भूखंड का आवंटन निरस्त किया गया था, तब नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ मामला उलट गया था। बड़ी संखया में ऐसे मामले हैं, जिनमें प्राधिकरण के अधिकारियों को न्यायालय की अवमानना का सामना करना पड़ा है।

ढाई साल बंद पड़ा रहा बस टर्मिनल का काम
सीईओ ऋतु माहेश्वरी के खिलाफ गैर जमानती वारंट का मामला सेक्टर-82 में बन रहे बस ट्रर्मिनल की जमीन से जुड़ा है। प्राधिकरण याचिकाकर्ता को जमीन के बदले जमीन या मुआवजा देने को तैयार है, लेकिन खसरा नंबर की जगह को लेकर विवाद चल रहा है। राजस्व विभाग की पैमाइश में जिस जगह यह खसरा नंबर बताया गया है, उसको याचिकाकर्ता मानने को तैयार नहीं है। याचिकाकर्ता और नोएडा प्राधिकरण के बीच मामला उच्च न्यायालय में होने के कारण वर्ष 2017 से लेकर 2020 तक करीब ढाई-तीन साल सेक्टर-82 में बस ट्रर्मिनल का निर्माण बंद पड़ा रहा। अब ट्रर्मिनल का काम तो पूरा हो चुका है, लेकिन संचालन शुरू नहीं हो सका है। अब इसके संचालन को लेकर नोएडा प्राधिकरण और रोडवेज के बीच पत्राचार चल रहा है। दरअसल, अब यूपी रोडवेज इस बस टर्मिनल को अनुपयोगी करार दे रहा है। इसका संचालन करने से इनकार कर रहा है।

लगातार बढ़ता जा रहा है मुकदमों का बोझ
दूसरी तरफ नोएडा प्राधिकरण पर मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। जिला न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक करीब 3,700 मुकदमें चल रहे हैं। हर साल करीब 500 नए मुकदमें जुड़ रहे हैं। जिनमें से हर रोज 40-50 मुकदमों में अलग-अलग अदालतों में सुनवाई होती हैं। इनमें से काफी मुकदमे 20 से 30 साल पुराने हैं। जो पक्ष मुकदमा हार जाता है, वह और ऊपरी न्यायालय में अपील कर देता है। खास बात यह है कि कई मामलों में जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक प्राधिकरण को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में बेहतर पैरवी के लिए पहली बार नोएडा प्राधिकरण ने इस साल फरवरी महीने में एक लॉ फर्म की नियुक्ति की है। फिर हालात काबू से बाहर हैं।

सबसे ज्यादा मुकदमें मुआवजे और जमीन को लेकर
अलग-अलग न्यायालय में प्राधिकरण के सबसे ज्यादा मुकदमे मुआवजे और भूमि पर अधिकार को लेकर चल रहे हैं। जिन गांवों के किसानों को वर्ष 1978 और उसके बाद मुआवजा दिया, उससे असंतुष्ट किसानों ने न्यायालय में अपील कर रखी हैं। जिनमें सुनवाई चल रही है। मुआवजे से जुड़े करीब 950 मुकदमे चल रहे हैं। इसके अलावा करीब 1,000 मुकदमे जमीन पर अधिकार को लेकर चल रहे हैं। इनके अलावा बकाए पर जुर्माना और भूखंड आवंटन निरस्तीकरण के खिलाफ लोग अदालतों में लड़ रहे हैं।

अथॉरिटी के पास 55 वकीलों की बड़ी फौज
प्राधिकरण से जुड़े मुकदमों का जिम्मा करीब 55 वकीलों की फौज सम्भाल रही है। इनमें से करीब 25 वकील उच्चतम न्यायालय में हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में 21 और गौतमबुद्ध नगर जिला न्यायालय में 10 वकील नोएडा अथॉरिटी से संबंधित मुकदमों की पैरवी कर रहे हैं। फिर भी नोएडा अथॉरिटी की सीईओ के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो रहे हैं। इन वकीलों पर प्राधिकरण को हर साल करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

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