Noida News: शहर का पहला एलिवेटेड रोड बनेगा सुरक्षित, सीआरआरआई के सुझाव पर अमल करेगा प्राधिकरण, होंगे विशेष बदलाव

शहर का पहला एलिवेटेड रोड बनेगा सुरक्षित, सीआरआरआई के सुझाव पर अमल करेगा प्राधिकरण, होंगे विशेष बदलाव

Google Image | Speed limit on Elevated road will get changed

नोएडा प्राधिकरण शहर के पहले एलिवेटेड रोड (एमपी-2 मार्ग) पर गाड़ियों की गति सीमा निर्धारित करने के संबंध में एक सर्वे कराएगा। इसकी जिम्मेदारी सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) को सौंपी गई है। इसके अलावा इस सड़क पर दबाव कम करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए भारी वाहनों की एंट्री या नो एंट्री पर भी सीआरआरआई से सुझाव मांगा गया है। प्राधिकरण जल्दी ही इस एलिवेटेड रोड पर सफर को सुरक्षित बनाने के लिए अहम कदम उठाएगा। 

फिलहाल 4.8 किलोमीटर लंबे नोएडा के महत्वपूर्ण एलिवेटेड रोड पर वाहनों की निर्धारित गति सीमा को लेकर असमंजस बना हुआ है। पहले इस पर 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तय की गई थी। बाद में इसे घटाकर 40 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया गया। अब यात्री इस पर 60 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड को सही बता रहे हैं। इसमें प्राधिकरण और प्रशासन की तरफ से भी चूक सामने आ रही है। 

दरअसल पूरे एलिवेटेड रोड पर कहीं भी स्पीड लिमिट से संबंधित कोई बोर्ड नहीं लगा है। इन सब उलझनों को दूर करने के लिए प्राधिकरण ने सीआरआरआई को पत्र लिखा है। उसमें इस महत्वपूर्ण सड़क से जुड़े सर्वे को पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है। उसके बाद नोएडा के पहले एलिवेटेड रोड पर वाहनों की गति सीमा तय की जाएगी। 

यातायात पुलिस ने की थी पहल
दरअसल एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने का सुझाव ट्रैफिक पुलिस ने प्राधिकरण को दिया था। एनएच-9 बंद होने की वजह से इन दिनों एलिवेटेड रोड पर यातायात का भारी दबाव है। इसको कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने यह विकल्प दिया है। बताते चलें कि सेक्टर-28 स्थित विश्व भारती स्कूल से शॉप्रिक्स मॉल तक नोएडा का सबसे पहला एलिवेटेड रोड है।

प्राधिकरण की तैयारी थी
हालांकि, प्राधिकरण ने पिछले साल अक्टूबर में ही उतरने-चढ़ने वाले सभी रैंप पर बैरियर लगवाने की तैयारी की थी। ताकि भारी वाहनों के प्रवेश पर पांबदी लग सके। मगर नियम लागू नहीं हो सका। बैरियर के पोल पर नो एंट्री के बोर्ड अब भी लगे हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने पर होने वाली असुविधा का विकल्प तलाशा जाएगा। इसके लिए सीआरआरआई की राय मांगी गई है। 

चार साल में ही स्थिति दयनीय
नोएडा का पहला एलिवेटेड रोड 480 करोड़ रुपये की लागत से बना था। इसे 28 जून, 2017 को लोगों के लिए खोला गया था। इसे बनाने में 79 हजार मिट्रिक टन सीमेंट और 26 हजार टन स्टील का इस्तेमाल किया गया था। तब ऐसा लगा था कि मुसाफिर दशकों तक इस पर बेधड़क आवागमन करते रहेंगे। मगर 44 महीने में ही एलिवेटेड रोड की हालत जर्जर हो चुकी है। इस पर गुजरने वाले वाहन हिचकोले खाने लगे हैं। 

गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन की वजह से एलिवेटेड रोड पर ट्रैफिक का दबाव कफी बढ़ा है। इस वजह से भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक की जरूरत है। गति सीमा और नो एंट्री पर लगातार प्राधिकरण से विचार-विमर्श किया जा रहा है। जल्दी ही सहमति बना ली जाएगी।
- गणेश प्रसाद साहा, डीसीपी ट्रैफिक

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