बिल्डर ने फंसाया पार्किंग का पेंच, लोग बोले- क्या तनाव पैदा होने के बाद दखल देगा प्रशासन?

Noida : बिल्डर ने फंसाया पार्किंग का पेंच, लोग बोले- क्या तनाव पैदा होने के बाद दखल देगा प्रशासन?

बिल्डर ने फंसाया पार्किंग का पेंच, लोग बोले- क्या तनाव पैदा होने के बाद दखल देगा प्रशासन?

Tricity Today | बिल्डर ने फंसाया पार्किंग का पेंच

बिल्डर ने फंसाया पार्किंग का पेंच, लोग बोले- क्या तनाव पैदा होने के बाद दखल देगा प्रशासन? नोएडा सेक्टर-78 के अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 अपार्टमेंट के निवासी बिल्डर के तौर-तरीकों से परेशान हैं। इस अपार्टमेंट का निर्माण करने वाले बिल्डर कलरफुल एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड ने फ्लैट का पजेशन देने के कई साल बाद भी अधिकांश बायर्स को उनकी पार्किंग अलॉट नहीं की है, जबकि बिल्डर बायर एग्रीमेंट के तहत फ्लैट के साथ ही पार्किंग भी दे दी जानी चाहिए थी। लेकिन निवासियों के बार-बार कहने के बावजूद बिल्डर ने अब तक ऐसा नहीं किया है।

पार्किंग्स पर मनमाने तरीके से डाले फ्लैट नंबर, निवासियों में आपसी तनाव की स्थिति
अपार्टमेंट के निवासी योगेन्द्र गौड़ का कहना है कि बिल्डर ने सभी फ्लैट बायर्स को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत सही ढंग से पार्किंग का अलॉटमेंट करने की बजाय कुछ पार्किंग्स पर मनमाने तरीके से कुछ लोगों के फ्लैट नंबर डाल दिए हैं। लेकिन अपार्टमेंट में अब तक पार्किंग का कोई विधिवत अलॉटमेंट नहीं किया गया है। ऐसे में ज्यादातर लोग पार्किंग अलॉट नहीं होने की वजह से जहां जगह मिले वहां गाड़ी खड़ी करने को मजबूर हैं। जिन लोगों को कथित रूप से बिल्डर ने कोई पार्किंग दे दी है। वहां किसी और की गाड़ी खड़े होने से परेशान होते हैं। इस वजह से निवासियों के बीच पार्किंग को लेकर आपसी तनाव पैदा होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। जबकि गलती बिल्डर की है, जिसने सभी फ्लैट ओनर्स को उनके बीबीए के हिसाब से पार्किंग अलॉट नहीं करके इस समस्या को जन्म दिया है। 

स्टिल्ट पार्किंग के स्थान पर बना दिए फ्लैट्स
अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 अपार्टमेंट के एक निवासी प्रवीण वर्मा का कहना है कि बिल्डर ने ऐसी स्थिति जानबूझकर पैदा की है, क्योंकि अपार्टमेंट के ओरिजिनल लेआउट में ग्राउंड फ्लोर की जो जगह स्टिल्ट पार्किंग के लिए रखी गई थी, वहां उसने फ्लैट बनाकर बेच डाले। जबकि बहुत सारी पार्किंग की जगह बिल्डर के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने में चली गई। पार्किंग की इस कमी के चलते बिल्डर ने फ्लैट ओनर्स को मेकैनिकल थमाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की, जिसका निर्माण शुरू होते ही फ्लैट ओनर्स ने उसका विरोध शुरू कर दिया। लेकिन बिल्डर ने निवासियों के विरोध के बावजूद बेसमेंट में बेढंगे तरीके से मेकैनिकल पार्किंग का निर्माण करा दिया। इस मेकैनिकल पार्किंग का जब भी संचालन किया जाएगा, उस पर भारी नियमित खर्च आएगा, जो अपार्टमेंट ओनर्स पर हमेशा के लिए एक बड़ा बोझ साबित होगा। 

मेकैनिकल पार्किंग की सबसे बड़ी समस्या
अपार्टमेंट के निवासी दीनानाथ मिश्र बताते हैं कि मौजूदा हालत यह है कि बेसमेंट में पार्किंग की अधिकांश जगह आधी बनी मेकैनिकल पार्किंग ने घेर रखी है, जिसका फिलहाल कोई इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। इतना ही नहीं, बिल्डर को यह भी पता है कि ज्यादातर फ्लैट ओनर मेकैनिकल पार्किंग लेने को तैयार नहीं होंगे। इन हालात में बिल्डर निवासियों को सही ढंग पार्किंग अलॉट करने की बजाय उन्हें इस मसले पर आपस में ही उलझाकर पल्ला झाड़ने की रणनीति आजमा रहा है।

प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी से शिकायत मिलने पर नहीं मिला कोई हल
अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 अपार्टमेंट के निवासी इस सिलसिले में कई बार प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी के पास भी अपनी शिकायत पहुंचाते रहे हैं। लेकिन उनकी इस समस्या का कोई ठोस समाधान अब तक निकल नहीं पा रहा है। हाल ही में 16 जुलाई को  फ्लैट बायर्स के अनुरोध पर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों की मौजूदगी में बिल्डर और बायर्स की बैठक बुलाई गई। लेकिन उसमें भी बिल्डर के अड़ियल रवैये की वजह से कोई समाधान नहीं निकल सका। 

रजिस्ट्री नहीं होने पर पार्किंग अलॉट नहीं हुई
योगेंद्र गौड़ बताते हैं कि बिल्डर ने यह दावा तो कर दिया कि अपार्टमेंट में पार्किंग की कोई कमी नहीं है और बहुत से बायर्स को पार्किंग अलॉट भी की जा रही है, लेकिन वह हमेशा की तरह न तो पार्किंग का कोई विस्तृत लेआउट पेश कर पाया और न ही अलॉट की गई पार्किंग का ब्योरा। अब दलील दी जा रही है कि पार्किंग उन्हीं फ्लैट बायर्स को अलॉट की जाएगी, जिन्होंने फ्लैट की रजिस्ट्री करा ली है। जबकि हकीकत यह है कि बिल्डर अपने बकाया पेमेंट्स की वजह से उन सैकड़ों फ्लैट्स की रजिस्ट्री कराने में सक्षम ही नहीं है, जिन्हें पार्किंग अलॉट की जानी है. साथ ही वे यह सवाल भी उठाते हैं कि रजिस्ट्री होने के बाद ही पार्किंग अलॉट करने का फैसला किस नियम के तहत किया गया है? यह बात नोएडा अथॉरिटी को भी अच्छी तरह पता है कि यहां हज़ारों बायर्स बिल्डर की वजह से बिना रजिस्ट्री के फ्लैट में रहने को मजबूर हैं। फिर उन्हें पार्किंग नहीं देने का क्या औचित्य है?   

जनप्रतिनिधि की नाकाम हुए  
प्रवीण वर्मा के मुताबिक सच्चाई तो यह है कि बिल्डर तरह-तरह के बहाने बनाकर अपनी खामियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है. दुर्भाग्य की बात यह है कि नोएडा अथॉरिटी और प्रशासन से लेकर स्थानीय जन-प्रतिनिधि तक इस समस्या के समाधान में अब तक नाकाम हैं। मौजूदा हालात में अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 अपार्टमेंट के कई निवासियों को अब तो यह डर लगने लगा है कि कहीं पार्किंग का यह मसला किसी दिन आपसी कलह और अशांति की वजह न बन जाए। उनकी मांग है कि नोएडा अथॉरिटी के अफसरों के साथ ही साथ पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी भी इस मामले में दखल देकर किसी अप्रिय स्थिति को उत्पन्न होने से पहले ही रोकने की पहल करें।

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