BIG NEWS: प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं जिले के निजी स्कूल, पिछले सत्र के 2700 छात्रों का भविष्य अधर में, पूरी जानकारी

प्रशासन को ठेंगा दिखा रहे हैं जिले के निजी स्कूल, पिछले सत्र के 2700 छात्रों का भविष्य अधर में, पूरी जानकारी

Tricity Today | निजी स्कूलों की मनमानी बच्चों का भविष्य बिगाड़ रही है

आर्थिक दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश का सबसे समृद्ध जिला गौतमबुद्ध नगर शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत बच्चों को शिक्षा देने के मामले में दयनीय स्थिति में है। आरटीई के तहत एडमिशन का सपना पाले बच्चों के ख्वाब चकनाचूर हो रहे हैं। पिछले सत्र में 4 हजार बच्चों ने आरटीई के तहत दाखिले के लिए आवेदन दिया था। मगर सिर्फ 1235 बच्चों को ही निजी विद्यालयों में दाखिला मिला था। इस तरह 2765 छात्र अभी भी एडमिशन के लिए प्रशासन और स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं।

अब तो हालात जीने-मरने के बन गए हैं। इस महीने के आखिर तक अगर इन्हें एडमिशन नहीं मिला, तो फिर नहीं मिल पाएगा। क्योंकि, 1 मार्च से सत्र 2021-22 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। नियमों के मुताबिक ये सारे छात्र अगले सत्र के दाखिले के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। दरअसल गौतमबुद्ध नगर के प्राइवेट स्कूल सरकार की महत्वाकांक्षी शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना को सिरे से नकार रहे हैं। इससे हजारों बच्चों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। 

कमेटी को दिखा रहे हैं ठेंगा
पिछले साल से एडमिशन के लिए दर-दर भटक रहे छात्रों का पूरा साल बर्बाद हो चुका है। उनकी एक साल की पढ़ाई पहले ही छूट गई है। अगर उन्हें अब भी दाखिला नहीं मिलता है, तो उनका आने वाला शैक्षणिक सत्र भी बर्बाद हो जाएगा। मगर जिले के निजी स्कूल इससे बेखबर हैं। आरटीई के तहत दाखिले में आने वाली मुश्किलों को हल करने के लिए जिला प्रशासन ने जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया था। शुरुआत में इस कमेटी ने तेजी दिखाई। 

करीब 22 स्कूलों को नोटिस जारी किया गया। पर बेखौफ स्कूल प्रबंधकों ने इसके बावजूद आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला देने से इनकार कर दिया। कमेटी अभी भी विद्यालयों को नोटिस भेज रही है। पर परिणाम के नाम पर ढाक के तीन पात हासिल हो रहा है। जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी 2765 बच्चों को पूरे साल के दौरान दाखिला नहीं मिल सका है। 

पिछले महीने किया था प्रदर्शन
इससे पीड़ित और परेशान अभिभावकों ने पिछले महीने ही जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन किया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से हल कराने का आश्वासन दिया था। मगर एक महीने बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं बदला है। स्कूलों की मनमानी से परेशान अभिभावकों ने समाजसेवी संगठनों का सहयोग मांगा है। 

सामाजिक संगठन करेंगे सहायता
इस संबंध में युवा क्रांति सेना ने भरोसा दिलाया है कि वह लॉटरी की पहली, दूसरी और तीसरी लिस्ट में चयनित उन बच्चों की मदद करेंगे, जिनका अब तक एडमिशन नहीं हो पाया है। इसके अलावा संगठन अभिभावकों और बच्चों के हित को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू करेगा। इसके लिए पैरेंट्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि इससे कितना फायदा मिलेगा, इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगा।

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