नोएडा : पुलिस ने बांग्लादेश के किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का पर्दाफाश किया, 4.50 लाख बांग्लादेशी करेंसी में किया सौदा

पुलिस ने बांग्लादेश के किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का पर्दाफाश किया, 4.50 लाख बांग्लादेशी करेंसी में किया सौदा

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो

नोएडा पुलिस ने धोखाधड़ी कर किडनी ट्रांसप्लांट करने नोएडा आए बांग्लादेशी नागरिकों सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी दस्तावेज से मरीज का रिश्तेदार बन कर आए थे। पुलिस ने बताया कि 18 जनवरी को सूचना मिली कि बांग्लादेश के सलेट जिले स्थित गदादर निवासी अहमद शरीफ पर किडनी डोनेट करने का दबाव बनाया जा रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस ने मुख्य चिकित्सक अधिकारी से विचार-विमर्श किया। इस पर 21 जनवरी को डॉ शशि कुमारी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी की शिकायत पर केस दर्ज किया गया।

डीसीपी हरीश चंद्रा ने बताया कि अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी शशि ने थाना फेस- 3 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश के कुछ लोग नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक निजी अस्पताल में अवैध रूप से किडनी का ट्रांसप्लांट करा रहे हैं। सभी आरोपी थाना फेस-3 क्षेत्र में स्थित एक गेस्ट हाउस में रुके हुए थे। इस मामले में डोनर अहमद शरीफ, मरीज मोहम्मद कबीर हुसैन, मोहम्मद सगीर, बांग्लादेश के विजयनगर निवासी ट्रैवल एजेंट अब्दुल और बिहार निवासी एक व्यक्ति शामिल था।

आरोपी अहमद शरीफ ने अस्पताल में मरीज मोहम्मद कबीर हुसैन को बहनोई बताया था। इस रिश्ते के तहत आरोपी किडनी डोनेट करना चाहता था। उसने स्टेट से संबंधित फर्जी दस्तावेज भी बनवा रखे थे। आरोपी ने किडनी डोनेट करने को लेकर 4.50 लाख ढाका बांग्लादेश की करेंसी में सौदा किया था। आरोपियों ने उपचार के नाम पर वीजा लेने के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। आरोपी ट्रैवल एजेंट अब्दुल ने सौदा तय किया था। मरीज और आरोपी दोनों के पास पुलिस को फर्जी रिश्ते के दस्तावेज मिले हैं। आरोपी बजुल्हक एयरपोर्ट से डोनर और मरीज को रिसीव कर सेक्टर 62 स्थित सहित अन्य अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए लेकर आता था। इसके एवज में आरोपी 40 और 50 हजार लेता था।

डीसीपी ने बताया कि गिरोह का सरगना बांग्लादेशी ट्रैवल एजेंट अब्दुल मनान है। जिसने फर्जी दस्तावेज व मेडिकल वीजा देकर आरोपित अहमद को भारत भेजा था। किडनी डोनेट करने के लिए चार लाख रुपये दिए थे। वहीं किडनी लेने वाले कबीर हुसैन से लाखों रुपये वसूले गए थे। अब्दुल ने किडनी देने व लेने वालों के मध्य रिश्तेदारी के फर्जी कागजात तैयार किए थे। रिसीवर व डोनर के पासपोर्ट पर मेडिकल वीजा अन्य शहरों का बनवाया गया, लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट का काम नोएडा के एक निजी अस्पताल में होना था। पुलिस को कबीर हुसैन व उनके भाई मोहम्मद सगीर की भूमिका संदिग्ध मिली है। जांच में सामने आया है कि आरोपित अब्दुल ने दो माह पूर्व भी एक व्यक्ति का किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नोएडा भेजा था।

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