गौतमबुद्ध नगर के 40 बिल्डरों की सम्पति नहीं हो रही नीलाम, जिला प्रशासन परेशान, जानिए क्यों

बड़ी खबर : गौतमबुद्ध नगर के 40 बिल्डरों की सम्पति नहीं हो रही नीलाम, जिला प्रशासन परेशान, जानिए क्यों

गौतमबुद्ध नगर के 40 बिल्डरों की सम्पति नहीं हो रही नीलाम, जिला प्रशासन परेशान, जानिए क्यों

Tricity Today | Noida Gate

गौतमबुद्ध नगर के 40 बिल्डरों की सम्पति नहीं हो रही नीलाम, जिला प्रशासन परेशान, जानिए क्यों Noida/Greater Noida News : जिन बिल्डरों पर बकाया है, उन 40 बिल्डरों से वसूली करने के लिए गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन उनकी संपत्ति की नीलामी कर रहा है लेकिन बड़ी बात यह है कि अभी तक जिला प्रशासन को कोई भी ऐसा खरीदार नहीं मिला है। गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन अब तक करीब 10 बार से ज्यादा नीलामी की तिथि तय कर चुका है लेकिन कोई भी खरीदार सामने नहीं आता है। अब इसको लेकर गौतमबुद्ध नगर के डीएम ने उत्तर प्रदेश शासन को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी है।

डीएम ने लखनऊ भेजी रिपोर्ट
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने बताया कि रेरा और अन्य बकाये की वसूली के लिए तीनों तहसीलों में प्रशासन की 12 टीम ने विशेष अभियान चलाया था और इस अभियान के तहत अभी तक 40 बिल्डरों की करीब 500 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इस संपत्ति को संबंधित तहसीलों में नीलाम करने के लिए 10 से अधिक बार तिथि तय की गई लेकिन तय तिथि पर कोई भी बोलीदाता इन्हें खरीदने के लिए नहीं आया।

शासन ने राजस्व विभाग को दी जिम्मेदारी
गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट उत्तरप्रदेश  शासन को भेज दी है। जिला प्रशासन की मांग है कि इन संपत्तियों की ई-नीलामी कराई जाए। अब इस मामले में उत्तर प्रदेश शासन ने राजस्व विभाग को जिम्मेदारी सौंप दी है कि वह संपत्तियों की ई-नीलामी कराने की व्यवस्था कराए।

कोर्ट ने निवेशकों की शिकायत पर दिया था आदेश
आपको बता दें कि फ्लैट नहीं मिल पाने से नाराज बड़ी संख्या में निवेशक रेरा में गए थे। रेरा ने एक हजार करोड़ से अधिक की आरसी जारी कर जिला प्रशासन को वसूली के लिए भेजी थी। वसूली न होने पर कुछ निवेशकों ने न्यायालय में अपील की थी। बकायेदार बिल्डरों से वसूली नहीं हो पाने पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी नाराजगी जताई थी। इसको लेकर कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी को तलब किया जा चुका है। कोर्ट ने ही आदेश दिया जल्द से जल्द बकायेदार बिल्डरों से वसूली की जाए।

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