अब नालों की वजह से खराब नहीं होंगे घरों के फ्रिज और एसी

नोएडा वालों के लिए खास खबर : अब नालों की वजह से खराब नहीं होंगे घरों के फ्रिज और एसी

अब नालों की वजह से खराब नहीं होंगे घरों के फ्रिज और एसी

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो

अब नालों की वजह से खराब नहीं होंगे घरों के फ्रिज और एसी Noida News : नोएडा शहर के लोगों के लिए खास खबर है। जिन आवासीय सेक्टरों के बीच या आसपास से नाले गुजर रहे हैं, वहां घरों में लगे एयरकंडीशनर और फ्रिज अब जल्दी-जल्दी खराब नहीं होंगे। दरअसल, नोएडा अथॉरिटी ने शहर के नालों को ढकने का फैसला ले लिया है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है। आपको बता दें कि शहर के जिन इलाकों से बड़े नाले गुजरते हैं, वहां गैस बेस्ड इलेक्ट्रॉनिक उपकरण समय से बहुत पहले खराब हो जाते हैं। करीब 3 दशकों से शहर के निवासी नालों की दुर्गंध और इनसे निकलने वाली गैसों से परेशान हैं। लगातार नालों को ढकने की मांग चल रही है।

पहले नाली ढकने की पॉलिसी नहीं थी फिर एनजीटी ने रोक लगाई
पहले नोएडा अथॉरिटी के पास कोई पॉलिसी ना होने और फिर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के चलते यह मांग पूरी नहीं हो पाई। नालों को ढकने के आड़े कई दूसरी समस्याओं का हवाला देकर अथॉरिटी अभी तक इस मांग पर विचार नहीं कर रही थी। अब शहर के लोगों को बदबू से बचाने के लिए अब नोएडा प्राधिकरण ने नालों को ढकने का काम शुरू कर दिया है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शहर के अलग-अलग 10 नालों को इस योजना में शामिल किया गया है।

सेक्टर-27 वाले नाले को ढकने से होगी शुरूआत
अभी सेक्टर-27 स्थित नाले को ढकने का काम शुरू करवाया गया है। व्यवस्था सफल होने पर इसे शहर के बाकी हिस्सों में लागू किया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि लोग काफी समय से नालों को ढकने की मांग कर रहे थे। लोगों की शिकायतें आती हैं कि इनके खुले रहने से आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों को बदबू आती है। अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल्दी खराब नहीं होंगे
नालों से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रोजन जैसी कई तरह की जहरीली गैस निकलती हैं। इन गैसों के कारण घरों में रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल्दी खराब हो रहे हैं। ऐसे में इनको ढकना चाहिए। वहीं, एनजीटी के नियम के तहत इनको पूरी तरह नहीं ढका जा सकता है। इसके बीच का रास्ता निकालते हुए नोएडा प्राधिकरण ने एनजीटी की गाइडलाइंस के तहत ही पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शहर के 10 नाले को ढकने का निर्णय लिया है। 

इन 10 नालों को पहले फेज में ढकेंगे
नोएडा का पूरा हिस्सा 10 वर्क सर्किल में बंटा हुआ है। ऐसे में हर सर्किल के एक-एक नाले को इसमें शामिल किया गया है। हालांकि, वर्क सर्किल-2 क्षेत्र में अधिक हिस्सा होने के कारण चार नाले शामिल किए गए हैं। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि अभी सेक्टर-21, सेक्टर-25, सेक्टर-28, सेक्टर-29, सेक्टर-37 और सेक्टर-27 से होकर बह रहे नाले को चिन्हित कर लिया गया है। इनको ढकने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें सेक्टर-27 वाले नाले का टेंडर जारी करके इस पर काम शुरू करा दिया गया है।

40 करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि अथॉरिटी खर्च करेगी
नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि सेक्टर-27 वाले नाले को ढकने के लिए 3 करोड़, 44 लाख, 43 हजार रुपये का खर्चा आएगा। सेक्टर-21 और 25 के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। इन पर क्रमश: 9 करोड़, 7 लाख, 19 हजार और 9 करोड़, 84 लाख, 62 हजार रुपये का खर्चा आएगा। इसके अलावा सेक्टर-28, सेक्टर-29 और सेक्टर-37 से होकर जाने वाले नाले को ढकने के लिए आईआईटी दिल्ली से परीक्षण कराया जा रहा है। इस पर 17 करोड़ और 11 लाख रुपये का खर्चा आएगा।

आईआईटी दिल्ली है प्रोजेक्ट की कंसलटेंट
नोएडा की सीईओ रितु माहेश्वरी ने बताया कि नालों में सफाई के लिए उनको खोलने की जगह रहेगी। एनजीटी के नियमों की तहत ही इनको ढकने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस परियोजना के लिए बाकायदा आईआईटी दिल्ली से कंसलटेंसी ली गई है। शहर के लोग करीब 30 वर्षों से नाले को ढकने की मांग कर रहे हैं।

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