सुपरटेक ट्विन्स टावर गिराने के लिए विदेशी एजेंसी से लेनी पड़ेगी मदद, इन तीन एजेंसियों से लेनी होगी मंजूरी, मलबे का होगा फिर उपयोग

BIG BREAKING : सुपरटेक ट्विन्स टावर गिराने के लिए विदेशी एजेंसी से लेनी पड़ेगी मदद, इन तीन एजेंसियों से लेनी होगी मंजूरी, मलबे का होगा फिर उपयोग

सुपरटेक ट्विन्स टावर गिराने के लिए विदेशी एजेंसी से लेनी पड़ेगी मदद, इन तीन एजेंसियों से लेनी होगी मंजूरी, मलबे का होगा फिर उपयोग

Tricity Today | सुपरटेक ट्विन्स टावर

सुपरटेक ट्विन्स टावर गिराने के लिए विदेशी एजेंसी से लेनी पड़ेगी मदद, इन तीन एजेंसियों से लेनी होगी मंजूरी, मलबे का होगा फिर उपयोग Emerald Court Case : नोएडा के सेक्टर-93ए में स्थित सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट हाऊसिंग सोसाइटी (Supertech Emerald Court) में बने दोनों अवैध टॉवरों को गिराने की कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CBRE Roorki) की टीम ने मौके पर आकर टॉवरों की जांच कर ली है। मौके पर मुआयना करने के बाद नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ बैठक की। इन बिल्डिंगों को गिराने के लिए तीन केंद्रीय एजेंसियों से मंजूरी लेनी होगी। इमारतों से निकलने वाले मलबे का दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। ख़ास बात यह है कि सीबीआरई ट्विन्स टॉवर को गिराने के लिए अमेरिका या यूरोप की किसी बड़ी एजेंसी से मदद लेगी।

सीबीआरई के निदेशक ने बिल्डिंग का अध्ययन किया
इन दोनों टावरों के साथ-साथ आसपास की दूसरी रिहायशी इमारतों का स्ट्रक्चर, फाउंडेशन और सरियों के डिजाइन का प्लान मांगा है। इन प्लान के आधार पर करीब एक सप्ताह में टावरों को गिराने की कार्य योजना तैयार करके सीबीआरआई नोएडा प्राधिकरण को देगी। टीम अपने साथ इस परियोजना के मानचित्र और कुछ जरूरी दस्तावेज अपने साथ ले गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 नवंबर तक दोनों टावरों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है। सोमवार की सुबह करीब सवा दस बजे सीबीआरआई के निदेशक एन गोपालकृष्णन और एक अन्य अधिकारी सुबीर सिंह मौके पर पहुंचे। इनके साथ नोएडा प्राधिकरण के वर्क सर्किल और नियोजन विभाग के अधिकारी थे। सीबीआरआई की टीम ने दोनों टावरों का स्थलीय निरीक्षण किया।

इन दो ख़ास बिंदुओं का ख्याल रखा जाएगा
  1. इस दौरान सीबीआरई के निदेशक ने अन्य टावरों से दोनों टावरों के बीच की दूरी और दोनों टावरों को ध्वस्त करने में क्या-क्या तकनीकी पक्ष हो सकते हैं, समेत अन्य बिंदुओं पर नोटिंग की है।
  2. किस तकनीक से इनको गिराया जा सकता है, इसको लेकर मंथन किया गया है। करीब पौने घंटे तक मौके पर रूकने और आरडब्ल्यूए से बातचीत के बाद सीबीआरआई की टीम नोएडा प्राधिकरण आ गई।

पूरी सोसायटी के नक्शे लेकर गई टीम
प्राधिकरण के आला अधिकारियों के साथ बैठक करके सीबीआरई के निदेशक ने आगे की योजना पर बातचीत की। इस दौरान सीबीआरआई ने संबंधित दोनों टावर, आसपास के आवासीय टावरों का स्ट्रक्चर व फाउंडेशन प्लान मांगा है। इस प्लान के मांगे जाने के पीछे तर्क यह है कि इससे संबंधित टावरों को गिराने से पहले यह पता चल जाएगा कि आसपास की वो इमारतें जिनमें लोग रह रहे हैं, वह किस मजबूती से बनी हुई हैं, ताकि सबकुछ प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से हो सके।

बिल्डर से प्राधिकरण ने सूचनाएं मांगी
इस पूरे मामले में और महत्वपूर्ण बात है। यह प्लान और जानकारी नोएडा प्राधिकरण के पास नहीं होता है। प्राधिकरण अधिकारियों को बिल्डर से यह जानकारी लेनी होगी। बिल्डर को यह जानकारी देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने पत्र लिख दिया है। दो-तीन दिन में नोएडा प्राधिकरण ने यह प्लान सीबीआरआई को मुहैया करा देगा। इसके बाद दो-तीन दिन उनको कार्ययोजना बनाने में लगेंगे। ऐसे में उम्मीद है कि एक सप्ताह में सीबीआरआई टावरों को गिराने की कार्ययोजना नोएडा प्राधिकरण को सौंप देगी।

विदेशी कंपनियों से मदद लेगी सीबीआरआई
सीबीआरआई टावरों को ध्वस्त करने के लिए विशेषज्ञ एजेंसी नहीं है। ऐसे में सीबीआरआई ने टावरों को गिराने के लिए अन्य नामी कंपनियों की मदद लेगी। इसमें यूएस हुए अफ्रीका में स्थित विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं। उन्होंने आरडब्ल्यूए वालों को भरोसा दिलाया कि टावरों को गिराने का काम सुरक्षित तरीके से होगा। संबंधित टावरों को तोड़ने में 1-2 करोड़ नहीं बल्कि 5-7 करोड़ से भी ज्यादा खर्चा आने की संभावना जताई जा रही है।

ड्रोन से हुए सर्वे की रिपोर्ट अभी नहीं आई है
टावरों को गिराने के लिए ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट संबंधित कंपनी को सोमवार को नोएडा प्राधिकरण को देनी थी। रिपोर्ट में कुछ बदलाव किया जा रहा है। ऐसे में संबंधित कंपनी सोमवार को प्राधिकरण को रिपोर्ट नहीं सौंप सकी।

टावर गिराने के लिए इनकी एनओसी जरूरी
  1. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  2. विस्फोटक अधिनियम के तहत मंजूरी
  3. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से मंजूरी

ट्विन्स टावर का मलबा दोबारा उपयोग होगा
ध्वस्तीकरण के बाद मलबे को शहर के सेक्टर-80 में स्थित कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन प्लांट ले जाया जाएगा। इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाएगा कि आसपास के क्षेत्र के वातावरण का पीएम 2.5 लेवल सामान्य स्तर पर रहे। साइट पर मलबे को री-साइकल किया जाएगा। जिसका प्रयोग अलग-अलग जगह किया जाएगा।

एसआईटी मांग रही है जानकारी
दूसरी तरफ एसआईटी को लखनऊ गए हुए पांच दिन का समय हो चुका है लेकिन अभी भी कुछ चीजों की जानकारी मांग रही है। सोमवार को भी कार्मिक विभाग से तत्कालीन समय में रहे अधिकारियों-कर्मचारियों से संबंधित जानकारी मांगी गई है।

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