मकर संक्रांति आज : जानिए मकर संक्रांति और खिचड़ी का कनेक्शन, सर्दियों के बाद सूर्य की स्थिति बदलने पर इसलिए खाई जाती है खिचड़ी

जानिए मकर संक्रांति और खिचड़ी का कनेक्शन, सर्दियों के बाद सूर्य की स्थिति बदलने पर इसलिए खाई जाती है खिचड़ी

Google Image | प्रतीकात्मक फोटो

मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने का पौराणिक विधान है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी को दान करने और प्रसाद स्वरूप खुद खाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। आयुर्वेदाचार्य का मानना है की खिचड़ी पर्व सूर्य के स्थिति परिवर्तन का पर्व माना जाता है। ज्योतिष विद्या के अनुसार सूर्य की बदली स्थिति धरती के जीव पर भी प्रभाव डालती है। ऐसे में मौसम परिवर्तन और सर्दियों में बदली हुई जीव की जीवन शैली के लिए खिचड़ी को आयुर्वेद में संपूर्ण आहार माना गया है। ऐसे में जब पूरे देश में मकर संक्रांति का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है तो आइए जानते हैं खिचड़ी खाने के आयुर्वेदिक फायदे......

खिचड़ी के महत्त्व को आयुर्वेद आचार्य शिशिर मिश्रा इस तरह गिनाया। उन्होंने कहा कि सर्दियों के बाद मकर संक्रांति पर्व पड़ता है। इस पर्व में खिचड़ी और उसके साथ तिल को ग्रहण करने का विधान है। खिचड़ी और तिल के साथ खिचड़ी में पड़ने वाली सभी सामग्रियां आयुर्वेद के हिसाब से संपूर्ण आहार मानी गई है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में त्रिदोष का संतुलन बिगड़ने पर शरीर अस्वस्थ हो जाता है। इन त्रिदोष को वात, पित्त और कफ के रूप में माना जाता है। सर्दियों में शरीर के इन त्रिदोष में असंतुलन हो जाना सामान्य है। इसके अलावा सर्दियों के समय पानी का कम सेवन किया जाना भी शरीर के लिए नुकसानदेह हो जाता है। पानी के कम सेवन की वजह से शरीर में विभिन्न रसायन के रूप में विष संबंधित तत्व भी जमा हो जाते हैं। ऐसे में मकर संक्रांति पर्व सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि शरीर को स्वस्थ करने का भी एक दिन के रूप में आयुर्वेद मे माना जाता है। यही वजह है कि ऋषियों द्वारा इस दिन प्रसाद के रूप में खिचड़ी ग्रहण किया जाना वरदान के रूप में माना जाता है।

इस तरह वरदान बनती है खिचड़ी :
खिचड़ी में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा होती है। सर्दियों में पानी की कमी से शरीर में विषाणु को खिचड़ी शरीर से बाहर किए जाने का कार्य करती है। इससे भविष्य में होने वाली बीमारियां दूर होती हैं। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में शरीर में हुई पानी की कमी को भी खिचड़ी में मौजूद तत्व धीरे-धीरे दूर कर देते हैं।

इन बीमारियों में असरदार : 
उड़द की दाल, चावल, हल्दी, देसी घी, दही, अदरक, हरी मिर्च, धनिया सहित खिचड़ी में उपयोग होने वाली विभिन्न सामग्रियों का अपना एक आयुर्वेदिक महत्व है। खिचड़ी में उपयोग होने वाली इन सभी सामग्रियों में संक्रमण को दूर करने के साथ ही विटामिन सी फाइबर कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन वसा सहित अन्य पोषक तत्व होते हैं। यह पोषक तत्व रक्त कोशिकाओं को सिकुड़ने से बचाते हैं। इसके अलावा शरीर में शुगर लेवल को भी संतुलित रखने में कारगर साबित होते हैं। खिचड़ी पर मौजूद पोषक तत्व गठिया और शरीर में जमा होने वाली वषा को भी संतुलित करने का कार्य करते हैं। यही वजह है की खिचड़ी को यदि सप्ताह में एक या दो दिन खाया जाए तो इससे बीमारियां दूर होती हैं।

मोटापा दूर करने में सहायक : 
आयुर्वेद में खिचड़ी को सुपाच्य आहार में गिना गया है। यही वजह है कि खिचड़ी को दिन या रात कभी भी खाया जा सकता है। खिचड़ी पर मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। खास बात यह है कि सुपाच्य आहार होने की वजह से खिचड़ी शरीर में वसा के रूप में जमा नहीं होती। इस वजह से खिचड़ी का सेवन करने वाले व्यक्ति को मोटापा जैसी समस्या से सामना नहीं करना पड़ता है। इसके अलावा खिचड़ी के सेवन से शरीर को प्रचुर मात्रा में ऊर्जा भी मिलती है।

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