कुछ हटके : जानिए यूपी के किस मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण को अर्पित किया चांदी का सबसे बड़ा सिंहासन, 40 किलो चांदी हुई इस्तेमाल

जानिए यूपी के किस मंदिर में भगवान लक्ष्मी नारायण को अर्पित किया चांदी का सबसे बड़ा सिंहासन, 40 किलो चांदी हुई इस्तेमाल

Tricity Today | भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर

भगवान लक्ष्मी नारायण के मंदिर में मंदिर कमेटी की ओर से प्रभु को प्रदेश का सबसे बड़ा सिंहासन अर्पित किया गया है। मंदिर कमेटी का दावा है कि सिंहासन में 40 किलो चांदी का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर कमेटी की ओर से यह भी दावा किया गया है कि भगवान लक्ष्मी नारायण के लिए प्रदेश के किसी भी मंदिर में यह सबसे बड़ा चांदी का सिंहासन है।

रजत सिहासन के बारे में मंदिर के अध्यक्ष ' मुकुल ' विजय नारायण तिवारी व प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी ने जानकारी दी कि कानपुर के प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला के गर्भ गृह में यह सिंहासन स्थापित किया गया है। उत्तर भारत का 160 वर्ष प्राचीन दक्षिण भारतीय महाराज प्रयाग नारायण मंदिर ( शिवाला )  के गर्भगृह में भगवान लक्ष्मीनारायण , श्री देवी , भू देवी एवं सुदर्शन जी को विधिवत पुनर्निर्मित रजत शाही सिंहासन  पर विराजमान कराके , समर्पित किया गया । मंदिर में रजत सिंहासन पर प्रभु के विराजमान होने के बाद सर्वप्रथम महाआरती कर मन्दिर के प्रधान अर्चक द्वारा तुलसी अर्चना की गयी । इसी के साथ मंदिर भगवान के कपाट ( द्वार ) शंख ध्वनि , कालही ध्वनि , वाद्ययंत्र एवं बैंड बाजे की ध्वनि के साथ खोले गये ।

मंदिर में बना सिंहासन : मंदिर कमेटी की ओर से यह जानकारी दी गई कि 160 वर्ष पुराने मंदिर में भगवान लक्ष्मीनारायण पूर्व में भी चांदी के सिंहासन पर ही विराजमान थे। चांदी का पुराना सिंहासन बदल कर उन्हें डेफिनेशन पर विराजमान किया गया है। नए सिंहासन को बनाने के लिए लॉकडाउन के दौरान मंदिर परिसर के भीतर ही पूरी तैयारी की गई थी। कुशल कारीगरों द्वारा पूरा सिंहासन बनाया गया है। सिंहासन में 40 किलो चांदी का प्रयोग किए जाने के साथ ही विभिन्न आकृतियां भी बनाई गई है।

उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा सिंहासन : मंदिर कमेटी की ओर से जानकारी दी गई  की यह पुननिर्मित रजत शाही सिंहासन उत्तर प्रदेश का एक मात्र विशालतम सिंहासन है । उन्होंने बताया कि मंदिर की ओर से विभिन्न प्रदेश के बड़े मंदिरों से यह जानकारी की गई तो और लोगों को पता चला की चांदी का इतना बड़ा सिंहासन प्रदेश के किसी भी मंदिर में मौजूद नहीं है। चांदी के सिंहासन की सुरक्षा के लिए मंदिर कमेटी की ओर से पूरी जिम्मेदारी निभाई जाती है।

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