हरियाणा छोड़ गौतमबुद्ध नगर आएंगी बड़ी कंपनियां, जानिए क्यों खुश है योगी आदित्यनाथ सरकार

Analysis: हरियाणा छोड़ गौतमबुद्ध नगर आएंगी बड़ी कंपनियां, जानिए क्यों खुश है योगी आदित्यनाथ सरकार

हरियाणा छोड़ गौतमबुद्ध नगर आएंगी बड़ी कंपनियां, जानिए क्यों खुश है योगी आदित्यनाथ सरकार

Tricity Today | Yogi Adityanath

हरियाणा छोड़ गौतमबुद्ध नगर आएंगी बड़ी कंपनियां, जानिए क्यों खुश है योगी आदित्यनाथ सरकार
  • -नए इंप्लॉयमेंट बिल से हरियाणा में खासकर गुरुग्राम और फरीदाबाद को होगा नुकसान
  • -गौतमबुद्ध नगर को मिलेगा लोकेशन का लाभ, विकास प्राधिकरण तैयारियों में जुटे
  • -उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही चीन से कंपनियां बुला रही है
  • -जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के चलते राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की निगाहें इस ओर हैं
कोरोना काल मे उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार ने चीन से कंपनियों को भारत लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब पड़ोसी राज्य हरियाणा की कंपनियां गौतमबुद्ध नगर का रुख करेंगी। दरअसल, हाल ही में हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) सरकार ने अपने रोजगार कानूनों में बड़ा बदलाव किया है। जिससे बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां परेशान हो गई हैं। कई कंपनियों ने तो हरियाणा का गुरुग्राम और फरीदाबाद शहर छोड़ने तक का ऐलान कर दिया है। ऐसे में इन कंपनियों के लिए नोएडा और ग्रेटर नोएडा सबसे मुफीद जगह है। दूसरी ओर जेवर में प्रस्तावित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) को लेकर पहले से ही कॉरपोरेट वर्ल्ड इस तरफ निगाहें लगाकर बैठा है।

भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली हरियाणा सरकार ने राज्य में प्राइवेट सेक्टर को लेकर एक विधेयक पारित किया है। जिसके तहत स्थानीय लोगों को रोजगार में आरक्षण दिया गया है। अब राज्य में स्थापित निजी कंपनियों को सूबे के लोगों को 75 फीसदी नौकरियां देनी पड़ेंगी। अब अर्थशास्त्री, वित्तीय मामलों के जानकार और कंपनी मैनेजमेंट के एक्सपर्ट राज्य सरकार के फैसले का विश्लेषण कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बेशक इससे वोट हासिल किया जा सकता है, लेकिन आर्थिक और वित्तीय कसौटी पर यह फैसला बेहद घातक साबित होगा। इससे गुरुग्राम के सटे टॉउन नोएडा, ग्रेटर नोएडा और नीमराना को ज्यादा फायदा मिलेगा। 

हरियाणा विधानसभा ने पिछले साल हरियाणा राज्य रोजगार स्थानीय उम्मीदवार विधेयक-2020 पारित किया था। इसमें निजी क्षेत्र की कंपनियों में 50 हजार से कम वेतन की नौकरियों में स्थानीय उम्मीदवारों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। दरअसल, इसका वादा सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) ने किया था। चुनाव से पहले यह उनके मेनिफेस्टो के मुख्य वादे में से एक था। 

निजी क्षेत्र में 75 फीसदी आरक्षण घातक साबित होगा
बिजनेस और वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह के आरक्षण से बिजनेस को नुकसान होगा। छोटी-बड़ी कंपनियां राज्य से बाहर निकलने का रास्ता देखने लगेंगी। क्योंकि 75 फ़ीसदी आरक्षण से कंपनियों का संतुलन बिगड़ जाएगा। स्थानीय लोगों की बहुलता हो जाएगी। अन्य राज्यों के सिर्फ 25 प्रतिशत कर्मचारी रहेंगे। इससे असंतुलन की स्थिति बनी रहेगी। कंपनियों के कामकाज पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। 10-20 परसेंट आरक्षण से छोटी-बड़ी कंपनियों का कामकाज ज्यादा प्रभावित नहीं होता है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद बेशक कंपनियां दूसरे राज्यों का रूख करेंगी।

कंपनियों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के सामने नई चुनौती आएगी। क्योंकि कम सैलरी में पर्याप्त स्किल्ड स्थानीय युवकों का मिलना चुनौती भरा रहेगा। गुरुग्राम के डीएलएफ साइबर सिटी में स्थित एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर मैनेजर काम करने वाले देवेंद्र कुमार सिंह बताते हैं, ‘’मैं पिछले 15 साल से एक ही कंपनी से जुड़ा रहा। ऑपरेशंस और ट्रेनिंग डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी संभालता हूं। इस वजह से नए लोगों से वास्त पड़ता रहता है। हमारे यहां ज्यादातर कर्मचारी गैर-हरियाणवी हैं। इस फैसले के बाद मैनेजमेंट पर अतिरिक्त दबाव है। आखिर 100 में से 75 नए लोगों को सिर्फ हरियाणा में कहां ढूंढा जाए।”

रोजगार के बजाय बेरोजगारी को बढ़ावा मिलेगा
ऐसे में उन्हें प्रशिक्षण देकर कामकाजी बनाने में स्टार्टअप्स और बड़ी कंपनियों को भी ज्यादा निवेश करना पड़ेगा। हालांकि मल्टीनेशनल और बड़ी इकाइयां अचानक बाहर जाने के बारे में विचार नहीं करेंगी। लेकिन नए स्टार्टअप हरियाणा में बिजनेस शुरू करने से बचेंगे। यहां तक कि भविष्य को ध्यान में रखते हुए मल्टीनेशनल और बड़ी इकाइयां भी राज्य से बाहर जाने के बारे में विचार कर सकती हैं। एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी के डायरेक्टर देवेंद्र कुमार पांडे बताते हैं, ‘राज्य सरकार का यह फैसला बेहद घातक है। इससे हरियाणा के लोगों को रोजगार मिलने के बजाय बेरोजगार बना दिया जाएगा। जब सारी कंपनियां सूबे से बाहर निकल जाएंगी, तो स्थानीय लोगों को कहां रोजगार मिलेगा।’

फिलहाल 59 फीसदी लेबर प्रवासी हैं
स्किल्ड लेबर की कमी का खामियाजा कंपनियों को भुगतना होगा। वहां प्रोडक्शन में भारी कमी आएगी। इसका सीधा फायदा नोएडा, ग्रेटर नोएडा और राजस्थान को मिलेगा। क्योंकि हरियाणा से निकलने वाली कंपनियां इन्हीं स्थानों को प्राथमिकता देंगी। पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 59 फीसदी लेबर प्रवासी मजदूर हैं। ये दूसरे राज्यों से आकर यहां की कंपनियों में काम करते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय युवकों को नौकरी देने से पहले उन्हें प्रशिक्षित करना पड़ेगा। 

छोटे स्टार्टअप के पास नहीं हैं साधन
ऐसी सैकड़ों SME हैं, जिनके पास प्रशिक्षण और ट्रेनिंग के लिए साधन की कमी है। ऐसे में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करने में इन कंपनियों को अतिरिक्त आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर गुरुग्राम में स्थित मेदांता हॉस्पिटल में नए कानून के बाद हॉस्पिटल मैनेजमेंट के सामने नई चुनौती है। हॉस्पिटल मैनेजमेंट को ट्रेंड टेक्निशियन ढूंढना होगा। यह उनके लिए बेहद मुश्किलभरा रहेगा। इसी तरह फाइव स्टार होटल्स, हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग और कार तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए प्रशिक्षित लोगों की कमी भारी पड़ेगी।

उद्योग मंडल CII ने जताई नाराजगी
उद्योग मंडल CII ने भी राज्य सरकार के इस फैसले पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। संगठन की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि, "आरक्षण से उत्पादकता और उद्योग प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है।" संगठन के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि ऐसे समय में जब राज्य स्तर पर निवेश आकर्षित करना महत्वपूर्ण है, हरियाणा सरकार इस तरह के आत्मघाती कदम से बच सकती थी। गुरुग्राम, मोहाली, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर आर्थिक उदारीकरण की वजह से ही इस मुकाम पर पहुंचे हैं। अगर यहां आरक्षण का बेतुका फॉर्मूला पहले से लागू होता, तो उन्हें विकसित नहीं किया जा सकता था। मसलन चेन्नई, द्रविड़ क्षेत्रीय राजनीति का केंद्र रहा है। स्थानीय लोगों के आरक्षण के वादे यहां की पार्टियां भी करती हैं, लेकिन हरियाणा की तरह आत्मघाती कदम कभी नहीं उठाया गया।

ऐसे बना था गुरुग्राम निवेशकों की पसंद 
1970 के दशक में जब मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने शहर में अपना संयंत्र स्थापित किया, तो गुरुग्राम की किस्मत बदल गई। आर्थिक उदारीकरण, राष्ट्रीय राजधानी और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से निकटता ने इस शहर को व्यवसाय का प्रमुख केंद्र बना दिया। 1997 में प्रमुख अमेरिकी ब्रांड जनरल इलेक्ट्रिक ने यहां अपनी इकाई स्थापित की। इसके बाद गूगल, नेस्ले, एचयूएल, कोका-कोला, पेप्सी, बीएमडब्ल्यू, एगिलेंट टेक्नोलॉजीज जैसी बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनियों ने इस शहर की विकास यात्रा को पंख दिया। फॉर्च्यून 500 में से 250 कंपनियां गुरुग्राम में बिजनेस करती हैं। इससे इस शहर की महत्ता समझी जा सकती है। लेकिन नए बिल के बाद हालात बदल जाएंगे।

गौतमबुद्ध नगर को लोकेशन का मिलेगा लाभ
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की भौगोलिक स्थिति भी इन्हें गुरुग्राम की तरह खास बनाती हैं। ये दोनों शहर भी राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली के 50 किमी के दायरे में स्थित हैं। इनके 100 किमी के दायरे में, नई दिल्ली का IGI और गाजियाबाद स्थित हिंडन हवाई अड्डे कार्यरत हैं। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा के जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे विकसित किया जा रहा है। यहां 6-8 रनवे बनाए जाएंगे। इन सबके तैयार होने के बाद यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। नोएडा, दिल्ली से आगरा को जोड़ने वाले यमुना एक्सप्रेसवे से भी जुड़ा है। अलीगढ़ को आगरा से जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-93 भी दोनों शहरों से कनेक्टेड है। इसके अलावा नोएडा-ग्रेटर नोएडा दिल्ली-कोलकाता और मथुरा-बरेली रेल लिंक से भी जुड़े हैं। इन शहरों की मौजूदा स्थिति और बेहतरीन कनेक्टिविटी निवेशकों के लिए शानदार विकल्प है।

योगी सरकार निवेश के लिए हर कदम उठा रही है
दूसरी तरफ योगी आदित्यानाथ की अगुवाई वाली उत्तर प्रदेश सरकार निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हर तरह की छूट देने को तैयार है। इस सिलसिले में पिछले साल मई में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए 38 श्रम कानूनों में से 35 को तीन साल के लिए निलंबित कर दिया था। भारतीय उद्योग संगठन (CII) के एक सदस्य ने कहा, “राज्य सरकार के इस फैसले से यूपी में निवेश बढ़ेगा। उद्योग-धंधों को बल मिलेगा और राज्य में रोजगार के नए विकल्प खुलेंगे।” हाल ही में एक टीवी चैनल के ‘राइजिंग उत्तर प्रदेश समिट’ में गत बुधवार को सीएम योगी ने कहा था कि, "हमने उत्तर प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित किया है।” गुरुग्राम की साइबर सिटी में काम करने वाले एक पेशेवर ने कहा, "नोएडा में नियोजित बुनियादी ढांचा बेहतर है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन और हरियाली की तुलना में हरियाणा से आगे है।"

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने माहौल बदला
उत्तर प्रदेश के नोएडा और हरियाणा के गुड़गांव शहर ने लगभग एक साथ ही विकास की राह पर कदम ताल की थी। शुरुआती दिनों में नोएडा ने बहुत तेजी के साथ तरक्की की, लेकिन 80 का आधा दशक बीतने के बाद यह रफ्तार धीमी पड़ गई और यकायक गुड़गांव तेजी से आगे निकल गया। गूगल समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए गुरुग्राम देश में सबसे पसंदीदा शहर बन गया। जिसका नुकसान नोएडा को उठाना पड़ा। इसके पीछे एक बड़ी वजह गुड़गांव के करीब इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का होना था। दूसरी ओर गौतमबुद्ध नगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की योजना राजनीतिक गतिरोध के चलते चार दशक से लटकी रही। अब जब उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बेहद तेजी के साथ काम किया है तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के प्रति देश-दुनिया की कंपनियों में आकर्षण बढ़ गया है। निसंदेह इन शहरों को बड़ा लाभ मिल सकता है। ऐसे में हरियाणा सरकार का यह नया कानून इन संभावनाओं को गति देगा।

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