जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों ने विधायक धीरेन्द्र सिंह का घेराव किया, लगाए गम्भीर आरोप

BIG BREAKING : जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों ने विधायक धीरेन्द्र सिंह का घेराव किया, लगाए गम्भीर आरोप

जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों ने विधायक धीरेन्द्र सिंह का घेराव किया, लगाए गम्भीर आरोप

Tricity Today | धीरेन्द्र सिंह का घेराव किया

जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसानों ने विधायक धीरेन्द्र सिंह का घेराव किया, लगाए गम्भीर आरोप Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा से बड़ी खबर सामने आ रही है। जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) से प्रभावित किसानों ने शुक्रवार की दोपहर स्थानीय विधायक ठाकुर धीरेंद्र सिंह (Dhirendra Singh MLA) का घेराव किया है। बड़ी संख्या में किसान रबूपुरा कस्बे में स्थित विधायक के कार्यालय पहुंचे। किसानों ने जमकर नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन लेने के बाद सरकार, जिला प्रशासन, यमुना प्राधिकरण और जनप्रतिनिधि उन्हें भूल गए हैं। उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। किसानों ने कहा, "हमने अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों की संपत्ति एयरपोर्ट बनाने के लिए दी है। अब हमारी और कोई देखने वाला नहीं है। समस्याओं के अंबार हैं और उनका समाधान शून्य है।"

किसान कल्याण परिषद के नेतृत्व में किया घेराव
किसान कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधीर त्यागी ने बताया कि आज सैकड़ों की संख्या में किसानों ने एकत्रित होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया है। किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। किसान अपनी समस्याओं को लेकर भटक रहे हैं, लेकिन इन पर कोई देखने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, "जिस इलाके में 2 इंच जमीन लेने के लिए गोली चल जाती थीं, उसी क्षेत्र के किसानों ने भविष्य के लिए और देश की तरक्की के लिए अपनी जमीन सरकार को एयरपोर्ट बनाने के लिए दी है। उसके बावजूद भी किसान आज अंधकार में हैं। हम सभी लोग इससे बहुत दुःखी हैं।"

किसानों के मुआवजे का मुद्दा उठा
उन्होंने कहा, "जेवर के किसानों ने काफी कम मूल्य में सरकार को जमीन दी है, लेकिन उसके बावजूद भी विस्थापन के लिए दर-दर की ठोकरे खा रहे हैं लोगों को उम्मीद थी कि सन 2017 में आई सरकार जन कल्याणकारी और किसानों की सरकार होगी, लेकिन ऐसा नही हुआ। किसानों को 4 गुना मुआवजे की बजाय सिर्फ 02 गुना मुआवजा दिया गया है।"

इन 6 मुद्दों पर किया प्रदर्शन

पहला मुद्दा :  किसानों ने आगे कहा, "जेवर क्षेत्र में पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से जमीनों का सर्किल रेट, इसलिए नहीं बढाये गए। जिससे किसानों को कहीं ज्यादा मुआवजा न मिल पाए। जबकि आस-पास के जनपदों में सालाना जमीनों के सर्किल रेट बढाये जाना नियमित प्रक्रिया है। इस क्षेत्र के किसानों के साथ, इससे बडा धोखा और क्या हो सकताहै कि’ पास में ही स्थित ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में किसानों को एक मीटर जमीन का मुआवजा 3750 रुपए दिया जाता है, वहीं, नोएडा औद्योगिक प्राधिकरण में 5500 रुपए प्रतिवर्ग मीटर दिया जाता है और यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास से ही होकर गुजर रहे ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेवे का मुआवजा 04 गुना दिया जाता है, जो इस क्षेत्र के किसानों के साथ गलत हुआ है।

दूसरा मुद्दा  : यमुना एक्सप्रेसवे इसी क्षेत्र के किसानों की जमीन पर बना हुआ है। जमीन देते समय उनकी एक आशा थी कि हमारा आवागमन सुलभ होगा, लेकिन भारी शुल्क के चलते इस क्षेत्र  के किसान यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से अपनी यात्रा नहीं कर पाता है। जबकि नेशनल हाईवे पर बने हुए टोल बूथों पर स्थानीय लोग अपना आधार कार्ड दिखाकर फ्री में यात्रा करते हैं। यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के लिए भी यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को भी करनी चाहिए।

तीसरा मुद्दा  : अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से प्रभावित किसान, जिनकी समस्याओं का समाधान तहसील और अपर जिलाधिकारी से नहीं हो पाता है। उनकी समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाना चाहिए।

चौथा मुद्दा : इस क्षेत्र में स्थापित होने वाले अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और उद्योग धंधों में मेन पावर और किसानों के पास मौजूद ट्रैक्टर ट्रॉली, जेसीबी और अन्य उपकरणों को सबसे पहले लगाया जाए। जिससे यहां के किसानों का जीवन यापन सुचारू रूप से चलता रहे।

पांचवां मुद्दा : लोगों के रोजगार के विषय में प्रशासन और सरकार को कार्य करना चाहिए और स्पष्टीकरण करना चाहिए। क्योंकि स्थापित होने से उद्योग और धंधे में करीब 20 किलोमीटर दूर से लोगों को यहां पर ही दिया जाता है जबकि दुनिया के सबसे बड़े कहीं जाने वाली लोकतंत्र में ऐसा कहना काफी दुखद है। किसानों की जमीन पर बड़े-बड़े अस्पताल और स्कूल बने हुए हैं। उन सभी को किसान का बेटा देखता है कि हमारे पूर्वजों की जमीन पर बड़े बड़े अस्पताल और स्कूल बने हुए हैं फिर भी हमको यहां पर सुविधा नहीं दी जाती है।

छठा मुद्दा : चकबंदी के समय राजस्व रिकॉर्ड में जो आबादियां थी। उन्हीं को आधार मानकरआबादियों की तोडफोड की जातीहै। सन 1947 में देश की आबादी लगभग 33 करोड थी। जो वर्तमान में बढ़कर 132 करोड़ से ज्यादा हो गयी है। जब आबादी 04 गुना से ज्यादा बढ़ गयी तो यह कैसे जायज ठहराया जा सकता है कि राजस्व रिकॉर्ड दर्ज आबादियों का विस्तार नहीं हुआ होगा। इसलिए जोर जबरदस्ती से किसानों की आबादियों से छेड़छाड़ नहीं की जाए।

उपरोक्त सभी बिंदुओं पर बैठक में मौजूद सभी किसानों ने एक राय होकर अगले 08 दिवस में संबंधित विभागों से उपरोक्त बिंदुओं पर अपना मंतव्य स्पष्ट किए जाने हेतु निर्णय लिया है। अगर आगामी 08 दिवस में किसानों द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर सरकार और शासन के प्रति उपरोक्त बिंदुओं पर गौर नही किया तो किसानों को मजबूरन आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पडेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी।
 

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