BIG BREAKING: यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद प्राधिकरण ने लिया बड़ा एक्शन, कम्पनी और आईआरपी पर एफआईआर

यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे के बाद प्राधिकरण ने लिया बड़ा एक्शन, कम्पनी और आईआरपी पर एफआईआर

Tricity Today | यमुना प्राधिकरण की बड़ी कार्रवाई

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने मथुरा हादसे पर संज्ञान लेते हुए आईआरपी अनुज जैन व आईएमसी पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 थाने में तहरीर दी है। इसमें कहा गया है कि इनकी लापरवाही मुसाफिरों पर भारी पड़ रही है। ये जानबूझकर एक्सप्रेस-वे के सेंट्रल वर्ज में क्रैश बैरियर नहीं लगवा रहे हैं। इसके चलते एक्सप्रेस-वे पर होने वाली घटनाओं में भारी जानमाल का नुकसान हो रहा है। जबकि इस दौरान एक्सप्रेसवे पर धन की उगाही की जा रही हैं। मगर इस पैसे का उपयोग निर्माण कार्यों में नहीं कर रहे हैं।

दरअसल 23-24 फरवरी की रात एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास डीजल लेकर जा रहा एक टैंकर अनियंत्रित हो गया और दूसरी तरफ गुजर रहे एक इनोवा कार से टकरा गया। इस हादसे में कार में सवार एक बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई। टैंकर नोएडा से मथुरा की तरफ जा रहा था। जबकि, कार में सवार लोग आगरा से नोएडा आ रहे थे। अगर एक्सप्रेस-वे पर सेंट्रल वर्ज में क्रैश बैरियर लगा होता, तो यह हादसा नहीं होता।

अथॉरिटी ने अपनी तहरीर में कहा है कि आईआरपी अनुज जैन और आईएमसी जानबूझकर आईआईटी दिल्ली द्वारा दिए गए फाइनल ऑडिट रिपोर्ट में सुरक्षा के संबंध में उल्लिखित सुझावों से जुड़े कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं करा रहे हैं। बार-बार इन प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने की समयसीमा बदली जा रही है। आईआरपी और आईएमसी, आईआईटी दिल्ली के सुझावों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इस वजह से यमुना एक्सप्रेस-वे पर होने वाले हादसों में जान-माल की अत्यधिक हानि हुई है। हालांकि ये यमुना एक्सप्रेस-वे के टोल पर टोल टैक्स की उगाही कर रहे हैं। 

मगर सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण सेंट्रल वर्ज में क्रैश बैरियर लगाने में ढिलाई की जा रही है। इसका खामियाजा मासूम मुसाफिरों को भुगतना पड़ रहा है। निर्धारित समय पर काम पूरा हो गया होता, तो मथुरा में बुधवार की सुबह हुआ दर्दनाक हादसा नहीं होता। प्राधिकरण ने कहा है कि आईआरपी और आईएमसी अनुज जैन इन सभी दुर्घटनाओं और क्षति के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं। यह दोनों कंपनियां यमुना एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षापूर्ण यात्रा के लिए जरूरी कार्यों में धन का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। अपनी तहरीर में प्राधिकरण ने इनके खिलाफ राष्ट्रीय संपत्ति का दुरुपयोग करने से जुड़े सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के लिए कहा है।

दर्जन भर बैठकें हो चुकी हैं
दरअसल आईआईटी दिल्ली के सुझाव को यथाशीघ्र प्रभाव में लाने के लिए यमुना अथॉरिटी और आईआरपी-आईएमसी के बीच लगातार बैठकें होती रही हैं। इस संबंध में अब तक दर्जनभर मीटिंग हो चुकी हैं। कई बैठकों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हिस्सा ले चुके हैं। 4 जनवरी, 2021 को हुई आखिरी बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, आईआरपी और कंपनी के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। इसमें सेफ्टी ऑडिट में सुझाए गए सुरक्षा उपायों को तुरंत और प्रभावी ढंग से लागू कराए जाने पर सहमति बनी थी। 

आईआरपी अनुज जैन और कंपनी ने प्राधिकरण को भरोसा दिलाया था कि जल्दी ही इन सभी सुरक्षा उपायों को एक्सप्रेस-वे पर लागू कर दिया जाएगा। सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगाने का सुझाव भी इन्हीं में से एक था। लेकिन आईआरपी ने इस जरूरी सुझाव को मूर्त रूप देने में लापरवाही की। क्रैश बैरियर लगाने की डेडलाइन में बार-बार बदलाव किया गया और समय सीमा बढ़ाई गई। प्राधिकरण ने अपनी तहरीर में इसका जिक्र किया है। शिकायत में कहा गया है, ‘इससे पता चलता है कि आईआरपी और आईएमसी इन सुझावों को अमलीजामा नहीं पहनाना चाहते थे।

शीर्ष अदालत की निगरानी में हुआ था ऑडिट
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेस-वे पर होने वाले हादसों को देखते हुए इसका आईआईटी दिल्ली से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया था। फाइनल रिपोर्ट में दिए गए सुझावों को लागू करवाने की जिम्मेदारी आईआरपी अनुज जैन को दी गई थी। क्योंकि, फिलहाल जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड का बोर्ड भंग हो गया है और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने अनुज जैन को आईआरपी नियुक्त किया था। रिपोर्ट में आईआईटी, दिल्ली ने सबसे सेंट्रल वर्ज पर क्रैश बैरियर लगाने का सुझाव दिया था। 

दुर्घटना के वक्त अक्सर तेज रफ्तार की वजह से वाहन दूसरे लेन या एक्सप्रेस-वे के दूसरी तरफ चले जाते हैं। इससे अन्य गाड़ियों और जानमाल को भारी क्षति होती है। क्रैश बैरियर लगने के बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन अपने लेन से बाहर नहीं जा पाएंगे और अन्य वाहनों को नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। मगर आईआरपी ने इस सबसे जरूरी प्रोजेक्ट को प्राथमिकता नहीं दी। अब तक इन्हें लगाने का काम पूरा नहीं किया जा सका है।

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