पार्ट-1: गौतमबुद्ध नगर में खत्म हो जाएगा इन भाजपा नेताओं का पाॅलिटिकल करियर

Tricity Today Correspondent/Noida

 

इस बार के विधानसभा चुनावों में जिले के कई नेताओं का पाॅलिटिकल करियर दांव पर लगा है। अगर इन्हें टिकट नहीं मिला तो भविष्य में इनकी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी। ज्यादातर आधी उम्र वाले या बुजुर्ग नेता हैं। कई युवा हैं लेकिन खराब शुरूआत का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आज हम सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के बारे में बात कर रहे हैं।

 

सबसे पहले नोएडा से शुरूआत करते हैं। भारतीय जनता पार्टी के हरिश्चंद्र भाटी टिकट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वह इसी कारण पिछले पांच वर्षों से सांसद डा.महेश शर्मा के साथ साये की तरह हैं। महेश शर्मा के इस्तीफे से खाली हुई नोएडा सीट पर भी दावा कर रहे थे। लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी थी। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री नवाब सिंह नागर भी ऐसे ही नेता हैं। वह लगातार नोएडा सीट से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। इस चक्कर में वह दादरी सीट से भी टिकट गंवाने की स्थिति में पहुंच गए हैं। अगर उनका टिकट कटवाने में उनके विरोधी सफल हो गए तो नवाब सिंह नागर का पाॅलिटिकल करियर भी खत्म समझिए।

 

यही वजह है कि नवाब सिंह नागर का टिकट छीनने की भरपूर कोशिश की जा रही हैं। दरअसल, विरोधी यह भी जानते हैं कि नवाब सिंह नागर चुनाव लड़े तो इस बार न सिर्फ जीत पक्की है बल्कि भाजपा की सरकार बनने पर मंत्री मंडल में जगह मिलना भी तय है। ऐसा हुआ तो उनका राजनीतिक करियर बुलंदी पर होगा।

 

भारतीय जनता पार्टी में दादरी से सुंदर सिंह राणा, बिजेंद्र सिंह भाटी, रकम सिंह भाटी और पंडित श्रीचंद शर्मा भी टिकट की दौड़ लगा रहे हैं। टिकट के फेर में फंसकर श्रीचंद शर्मा भाजपा की क्षेत्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी में जगह नहीं बना पाए। उन्हें उनके वकीलों ने कहा था कि अगर संगठन में पद लोगे तो दादरी से विधानसभा टिकट नहीं मिल पाएगा। इसी कारण श्रीचंद शर्मा ने संगठन में शामिल होने की पहल नहीं की थी। अब टिकट मिलना भी आसान नहीं दिख रहा है।

 

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रकम सिंह भाटी डा.महेश शर्मा के विरोध में खड़े रहे हैं। महेश शर्मा का विरोध करते-करते वह पिछले चुनाव में पार्टी छोड़कर चले गए थे। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में दोबारा वापसी की। महेश शर्मा का कद बढ़ने लगा तो रकम सिंह भी पानी के बहाव के साथ बह रहे थे। उनकी आशा भी टिकट पर टिकी हैं। फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। बिजेंद्र सिंह भाटी ने भी अपने इंस्टीट्यूट में कुछ महीने पहले महेश शर्मा का कार्यक्रम आयोजित किया था। जिसका मकसद दादरी से टिकट की दावेदारी करना था।

 

जेवर से ठाकुर हरीश सिंह और संजय सिंह का भी यही हाल है। हरीश सिंह, ठाकुर धीरेंद्र सिंह के परिवार से हैं। लेकिन राजनीतिक रूप से विरोध करते आए हैं। संजय सिंह के बड़े-बड़े होर्डिंग यमुना एक्सप्रेस वे पर अब तक देखे जा सकते हैं। वह डा.महेश शर्मा से नजदीकियों के बूते टिकट हासिल करने की जुगत में थे। धीरेंद्र सिंह के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने के बाद जेवर के ये नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। अब जेवर क्षेत्र में कोई इतना कद्दावर नेता नहीं है कि धीरेंद्र सिंह के सामने खुद को सुरक्षित रख सके।

 

जिले की राजनीति पर पकड़ रखने वालों का कहना है कि भाजपा नेताओं को जानबूझकर इस दौड़ में लगाया गया था। उन्हें टिकट दिलाने के झूठे आश्वासन दिए गए। जिससे ये सारे लोग आपस में लड़कर खत्म हो जाएं। विरोधियों को आपस में लड़ाकर रखा गया है। ये लोग आपस में लड़ रहे हैं और एक नेता की कुर्सी सलामत है।

अपने पाठकों के लिए हम इस सीरीज में पांच विशेष समाचार प्रकाशित करेंगे। पढ़ते रहिए।

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