महागठबंधन ने करारी हार के बाद तेजस्वी यादव को बनाया अपना नेता, अखिलेश भी मौजूद रहे

राजनीति | 3 साल पहले | Testing

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भले ही बिहार में तेजस्वी यादव को हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन महागठबंधन ने तेजस्वी यादव पर विश्वास जताया है। गुरुवार को राबड़ी आवास पर महागठबंधन की एक बैठक हुई है। इस बैठक में 110 विधायकों ने तेजस्वी यादव को महागठबंधन का नेता चुना है। इस बैठक में राज्यसभा सांसद अखिलेश सिंह और बिहार प्रभारी सचिव विरेंद्र सिंह राठौर भी शामिल रहे है। 

इससे पहले कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायकों की पटना स्थित पार्टी मुख्यालय सदाकत आश्रम में भी बैठक भी हुई। बैठक में नवनिर्वाचित विधायकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस मौके पर पार्टी के वरीय नेताओं ने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ मंत्रणा की। बैठक के दौरान नेताओं के चेहरे पर कम सीटों के कारण सरकार नहीं बना पाने का मलाल साफ तौर पर दिख रहा था।

बिहार में तीन चरणों में 243 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए को 125 सीटें हासिल हुईं तो महागठबंधन ने 110 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दी। एनडीए के सहयोगी दलों की बात करें तो बीजेपी को 74, जेडीयू को 43, वीआईपी और हम को 4-4 सीटें मिली हैं। सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी है, जिसे 75 सीटें मिली हैं। कांग्रेस को 19 और वाम दलों को कुल 16 सीटें मिली हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 19 सीटों पर सिमट जाने के बाद पार्टी महासचिव तारिक अनवर ने गुरुवार को कहा कि इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए कि कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के कारण ही महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई और ऐसे में उनकी पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए कि उससे चूक कहां हुई।  तारिक अनवर ने नीतीश कुमार पर तंज कसा और कहा कि आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में एआईएमआईएम का प्रवेश शुभ संकेत नहीं है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने सीमांचल क्षेत्र की पांच सीटें जीती हैं।

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