शिक्षा विभाग में बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, टीचर की सैलरी पाने वाले दूसरे विभाग में तैनात

Chandigarh : शिक्षा विभाग में बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, टीचर की सैलरी पाने वाले दूसरे विभाग में तैनात

शिक्षा विभाग में बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, टीचर की सैलरी पाने वाले दूसरे विभाग में तैनात

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शिक्षा विभाग में बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, टीचर की सैलरी पाने वाले दूसरे विभाग में तैनात Chandigarh : चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग में शिक्षकों की बहुत कमी है। इसके बावजूद चंडीगढ़ में जितने शिक्षक की भर्ती की गई है, वह भी शिक्षा का कार्य छोड़ कर किसी और विभाग में काम कर रहे हैं। शिक्षकों को शिक्षा को छोड़कर दूसरे विभाग में काम करने के लिए भेज दिया गया है। 

हर स्कूल से दो से तीन शिक्षक गायब
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग के ज्यादातर शिक्षक, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारी स्कूलों के बजाय दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं। शिक्षा विभाग में हो रहे इस खेल का खुलासा आरटीआई के द्वारा किया गया है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ के हर स्कूल के दो से तीन शिक्षक और कर्मचारी दूसरे विभागों में काम करते पाए गए हैं।

शिक्षक कर रहे चुनाव विभाग में ड्यूटी
चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल मौली में कार्यरत टीजीटी शिक्षक सुनील वर्मा ने वर्ष 1999 में ज्वाइन किया था। वह इस विद्यालय में सोशल स्टडी के शिक्षक हैं। टीजीटी शिक्षक सुनील वर्मा वर्ष 2009 से चुनाव विभाग में ड्यूटी दे रहे हैं। हर वर्ष सुनील वर्मा शिक्षक की ड्यूटी निभाने के लिए वार्षिक रिपोर्ट लेने हेतु मात्र चंद दिनों के लिए स्कूल आते हैं। वर्ष के बाकी दिनों में वह इलेक्शन डिपार्टमेंट में ही काम करते हैं। बीते वर्ष 2020 में सुनील वर्मा को तत्कालीन एसडीएम साउथ रूपेश कुमार ने चुनाव विभाग से वापस स्कूल भेज दिया था, लेकिन सुनील वर्मा को वापस फिर से उसी काम पर बुला लिया गया।

स्कूलों में शिक्षा की कमी
चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर–20 में जेबीटी शिक्षक राजेश कुमार वर्ष 2019 से ही चुनाव विभाग ड्यूटी कर रहे हैं। विभागीय जानकारों के अनुसार राजेश कुमार का वेतन शिक्षा विभाग स्कूल से जारी किया जाता है, लेकिन वह काम चुनाव विभाग के लिए कर रहे हैं। वही चंडीगढ़ के स्कूलों में शिक्षक की कमी साफ नजर आ रही है। इसके अलावा ऐसे कई शिक्षक हैं जो स्कूलों से पैसा लेने के बजाय अन्य विभाग में काम कर रहे हैं।

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