डेप्युटेशन पर नहीं मिल रहे आईपीएस अफसर, केंद्र में 230 पोस्ट खाली

गृह मंत्रालय राज्यों से नाराज : डेप्युटेशन पर नहीं मिल रहे आईपीएस अफसर, केंद्र में 230 पोस्ट खाली

डेप्युटेशन पर नहीं मिल रहे आईपीएस अफसर, केंद्र में 230 पोस्ट खाली

Google Image | केंद्रीय गृह मंत्रालय

New Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय राज्यों से नाराज है। दरअसल, राज्य अपने आईपीएस अफसरों को डेप्युटेशन पर केंद्र में नहीं भेज रहे हैं।  जिसकी वजह से बड़ी संख्या में आईपीएस अफसरों के केंद्रीय पद खाली पड़े हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर की है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी के शासित राज्यों से भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का कोटा नहीं भर पा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक आईपीएस अफसर केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के इच्छुक हैं।

आईपीएस की 230 पोस्ट खाली
केंद्र में आईपीएस अधिकारियों की कमी है। इसका सबसे बड़ा कारण अफसरों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अनिच्छा है। लिहाजा, केंद्रीय सेवाओं में अफसरों की कमी है। जानकार सूत्रों ने बताया कि भाजपा शासित राज्य भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति कोटे पर अफसरों को भेजने में विफल हैं। अगर गृह मंत्रालय के आंकड़ों की बात करें तो एसपी लेवल पर कुल 107 पद खाली पड़े हुए हैं। डीआईजी लेवल के 90, आईजी के 30, एडीजी का एक, स्पेशल डीजी और डीजी लेवल पर 1-1 पद खाली हैं। कुल मिलाकर केंद्रीय सेवाओं में 230 पोस्ट पर आईपीएस अधिकारी नहीं हैं।

इम्पैनल्ड सिस्टम खत्म करने के बावजूद सुधार नहीं
केंद्र में अफसरों को लाने के लिए नियमों को शिथिल किया गया है। मसलन, डीआईजी स्तर के आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए अब इम्पैनल होने की जरूरत खत्म कर दी गई है। गृह मंत्रालय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने अपने आदेश में यह बात कही है। कहा गया है कि डीआईजी रैंक पर केंद्र में आने वाले आईपीएस अधिकारियों को अब केंद्र सरकार के साथ पैनल में शामिल होने की आवश्यकता नहीं होगी। पिछले नियमों के अनुसार 14 साल सेवा दे चुके डीआईजी रैंक के आईपीएस अधिकारी ही केंद्र में प्रतिनियुक्त पर जा सकते थे। केंद्रीय गृह सचिव के नेतृत्व वाले पुलिस स्थापना बोर्ड ने उन्हें डीआईजी के रूप में इम्पैनल होना भी जरूरी था। यह बोर्ड अधिकारियों के करियर और सतर्कता रिकॉर्ड के आधार पर पैनल का चयन करता था। अभी तक केवल एसपी रैंक के अधिकारियों को केंद्र में इम्पैनल्ड होने की आवश्यकता नहीं थी। नया आदेश राज्य में कार्यरत डीआईजी रैंक के अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के योग्य बनाता है।

सीपीओ और सीएपीएमएफ में आईपीएस का संकट
यह नियम बनाने का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय पुलिस संगठनों (सीपीओ) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएमएफ) में भारी संख्या में खाली पड़े पदों को भरना है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए डीआईजी रैंक के आईपीएस अधिकारियों के संख्या को बढ़ाना है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने मौजूदा आईपीएस के कार्यकाल से जुड़ी नीति में बदलाव किए हैं।

राज्य अपने अफसरों को केंद्र के लिए नहीं छोड़ते
सीपीओ और सीएपीएमएफ से मिले आंकड़ों के अनुसार केंद्र में एक साल पहले तक डीआईजी स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित 252 पदों में से 118 (लगभग आधे) खाली थे। नियम शिथिल करने के बावजूद 90 पद खाली हैं। आईपीएस अधिकारियों का सीपीओ और सीएपीएफ में 40% का कोटा है। केंद्र ने नवंबर 2019 में राज्यों को यह कोटा 50% तक कम करने का प्रस्ताव दिया। पत्र लिखा था कि 60% से अधिक पद खाली हैं, क्योंकि अधिकांश राज्य अपने अधिकारियों को नहीं छोड़ रहे हैं।

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