योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं के नाम शहर में बंटे पर्चे, गाजियाबाद में जमकर विरोध

यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं के नाम शहर में बंटे पर्चे, गाजियाबाद में जमकर विरोध

योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं के नाम शहर में बंटे पर्चे, गाजियाबाद में जमकर विरोध

Tricity Today | अतुल गर्ग के विरोध में बंटे पर्चे

योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं के नाम शहर में बंटे पर्चे, गाजियाबाद में जमकर विरोध Ghaziabad News : विधानसभा चुनाव 2022 का बिगुल बजने के बाद जनपद में अब पहले चरण में जिले में 10 फरवरी को मतदान होगा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जनपद गाजियाबाद की पांचों विधानसभा सीट के लिए प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया। भाजपा ने मौजूदा विधायकों पर भरोसा जताते हुए किसी भी सिटिंग विधायक का टिकट नहीं काटा है। 

अतुल गर्ग के विरोध में बटे पर्चे
सदर गाजियाबाद सीट से भाजपा प्रत्याशी अतुल गर्ग का विरोध शुरू हो गया है। वहीं, साहिबाबाद विधानसभा प्रत्याशी सुनील शर्मा का भी क्षेत्र में विरोध होना शुरू हो गया है। चुनाव को लेकर दोनों विधायकों की मुश्किले अब बढ़ने लगी है। राज्यमंत्री अतुल गर्ग के विरोध के नाम पर तो लाइनपार क्षेत्र में पर्चे भी बंटने शुरू हो गए है। जिनका शीर्षक है 'योगी जी से कोई बैर नहीं, पर अतुल गर्ग तुम्हारी खैर नहीं'।

केशव मौर्या के स्वागत के समय भी हुआ था विरोध
बता दें कि विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही लोगों में अतुल गर्ग को लेकर जो विरोध सामने आ रहा है। उससे लग रहा है कि कहीं इस बार लाइनपार क्षेत्र के लोग कहीं अतुल गर्ग का समीकरण न बिगाड़ दें। पूर्व में जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या के डासना आगमन के दौरान जब विजयनगर में स्वागत हुआ था। उसी दौरान अतुल गर्ग के विरोध के पर्चे फेंके गए थे। लाइनपर उत्थान मोर्चा के नाम से वितरित हो रहे पर्चों के माध्यम से अतुल गर्ग से पूछा गया है कि कोरोना संक्रमण की दुसरी लहर में जब लोग उपचार के लिए तड़प रहें थे, तब आप अपने कमरे में कोरेंटाइन होकर आराम से नींद फरमा रहें थे। 

क्या कहती हैं जनता
लोगों का मानना है कि जब स्वास्थ्य मंत्री को खुद जनता की फिक्र नही है तो वह किसी हक से लाइनपार क्षेत्र के लोगों से वोट मांग रहे है। सरकार में आने के बाद बच्चों की शिक्षा के लिए घोषणा के कॉलेज का इंतजार अभी भी किया जा रहा है। शहर में मूलभूल सुविधाओं का आज तक आभाव है। कोरोना काल में स्वास्थ्य मंत्री की मौजूदगी में एक ओर जहां लोगों से उपचार के नाम पर ठगा जा रहा था और रेमडिसीवर इंजेक्शन ब्लैक हो रहा था। सड़को पर ही कितने अपनों ने उपचार के आभाव में दम तोड़ दिया। न तो उस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने किसी की कोई मदद की न ही वह घर से बाहर निकले। जब धीरे-धीरे सब सामान्य होने लगा तब सरकार की उपलब्धियों का बखान करने और झूठे कार्यो का श्रेय लेने के लिए अपने दरबे से बाहर आए। 

कार्यकर्ताओं और नेताओं में जमकर विरोध
इसके साथ लाइनपार राज्यमंत्री प्रतिनिधि ने गरीब लोगों की जमीन पर कब्जा किया, तब भी कोई मदद नही की गई। अपने कार्यकर्ताओं का तिरस्कार कर उन्हें बंधुओ मजदूर समझा। मगर इस बार लोगों ने मन बना लिया है कि भाजपा को वोट नही दिया जाएगा, चाहे नोटा पर ही क्यों न बटन दबाया जाए। लाइनपर उत्थान मोर्चा का कहना है कि हमारा विधायक हमारे क्षेत्र का है, कोई पंजीवादी और परिवारवादी नहीं चाहिए।

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